अक्रोध एक वशीकरण मन्त्र


अक्रोध एक वशीकरण मन्त्र कहानी

अक्रोध एक वशीकरण मन्त्र है जो आपके जीवन को बदल देता है इसी पर आधारित एक सेठ की लाडली बेटी, जिसे माता पिता के लाड़ प्यार ने जिद्दी ढीठ बना दिया था वह आधुनिक और घमंडी थी. बड़ी हुई, हुई शादी हुई, जब ससुराल पहुंची तो, वह अपने स्वभाव के कारण सभी की आखों में खटकने लगी. सभी ने उससे सम्पर्क तोड दिया. उससे लड़की का मन भी नहीं लगता था. उसने फ़ोन करके भाई को बुला लिया और लड़ झगड़कर मायके आ गई. रास्ते भर वह भाई से ससुराल वालों की बुराई करती रही. घर पहुँची तो पिताजी से लिपटकर जोर-जोर से रोने लगी. पिता ने पूछा बेटी ससुराल कैसी लगी?




अक्रोध एक वशीकरण मन्त्र

अक्रोध एक वशीकरण मन्त्र

उत्तर था – एकदम नरक

ससुर – राक्षस

सास – जन्म-जन्म डायन थी.

ननद – लड़ाकू और चुगलखोर

देवर – आवारा, झूठा, मक्कार

झेठ – लोभी, लालची, धूर्त

पति – साक्षात यमराज

पडोसी – दुष्ट, पापी, बदमाश

पिता ने सोचा एक व्यक्ति गलत हो सकता है, किन्तु पूरा परिवार नहीं, निश्चित ही मेरी बेटी ने गलियाँ होंगी. अत: उसे ही समझाना होगा. दुसरे दिन सेठ ने बेटी को प्यार से बिठाया और कहा बेटी हम तुम्हे एक मन्त्र दे सकते है. जिसके द्वारा जिसे चाहो वश में कर सकती हो, उस मंत्र का नाम वशीकरण मन्त्र है. लड़की ने कहाँ हाँ-हाँ पिताजी मुझे ऐसा मन्त्र जरुर दो. तब पिता ने कहा चार माह तक क्रोध नहीं करना, कोई कुछ भी कहे, जवाब नही देना, किसी से विवाद नहीं करना. यह संकल्प लेकर जब वह ससुराल पहुँची तो किसी ने उसकी तरफ देखा तक नही, परन्तु उसने बुरा नहीं माना, दुसरे दिन जल्दी उठकर सास के चरण स्पर्श किये. तब सास ने आशीर्वाद देकर मन में सोचा. जो बहू १० बजे उठकर भी २० ताने सुनाती थी, वह इतनी सुधर कैसे गई, धीरे धीरे उसका अच्छा  व्यवहार देख परिवार के सदस्यों का व्यवहार भी बदल गया, सभी उससे बात करने लगे. वाकई में मंत्र का प्रभाव बहू को भी दिखने लगा. एक सप्ताह के अन्तराल में यह प्रभाव तो चार माह में क्या चमत्कार होगा. मंत्र पर उसकी श्रध्दा दृढ हो गई. एक दिन सास ने सारी जिम्मेदारी बहू को सौप दी. वह मालकिन बन गई. अब वह लड़ाकू नहीं लाड़ली बन गई सभी की. जब भाई लेने आया तो सभी ने मना कर दिया. पर रक्षाबंधन का पर्व था, अत: जाना भी अनिवार्य था. रास्ते भर वह भाई से ससुराल की प्रशंसा करती रही, घर पहुँचकर पिता ने लिपटकर रोई. तब पिता ने फिर पूछा बेटी ससुराल कैसी है.

एक दम स्वर्ग

ससुर – सदा स्नेह रखते है.

सास – माँ की कमी का आभास नहीं होने दिया.

ननद – अच्छी सहेली

देवर – मुझे माँ जैसा सम्मान देता है

जेठ – साक्षात बड़े भैया

पति – देवता पति परमेश्वर

पडौसी  – एकदम सज्जन

 

पिता बोले

शाबास बेटी तेरी साधना सफल हुई. परिस्थितियों के अनुरूप जो अपने को ढाल लेता है. वह जहाँ कही भी रहे स्वर्ग में जीता है. जहर भरे संसार में भी अमृत पिता है, जो जीवन की जीवंत गीता है. स्कूल बदल लेने से क्लास नहीं बदल जाती. क्लास का बदलना अपनी योग्यता पर निर्भर है. आज परिस्थितियों के अनुरूप अपने आपको ढाल लेने वाला ही समाज में भी जी सकता है. जो ऐसा नहीं कर पाता, वह समाज में रह भी नहीं सकता.

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