कविता के विषय | कविता के रूप | हिंदी कविता

 कविता के विषय

कविता के विषय अनंत है. वस्तुतः व्यक्ति और समाज के जीवन का कोई भी पक्ष काव्य का विषय बन सकता है . आज का कवि जीवन के सामान्य तथा उपेक्षित पक्ष पर भी रचनाये कर रहा है. उसके विषय महापुरुषों तक ही सीमित नही है. अपितु वह छिपकली, केंचुआ तथा मेढक आदि पर भी काव्य रचना करने लगा है. परन्तु उन्नत विषय, भाव तथा विचार और आदर्श जीवन और उसका संदेश कविता को स्थायी महत्वपूर्ण तथा प्रभावकारी बनाने में अधिक समर्थ होते है.




कविता प्रेम और सौन्दर्य – प्रेम और सौन्दर्य कविता के सनातन विषय है. स्त्री और पुरुष का रूप सौन्दर्य, उनका पारस्परिक आकर्षण मिलन तथा वियोग मनुष्य कि सर्वाधिक प्रमुख तथा गहरी अनुभूति है. काव्य-शास्त्र के अनुसार ऐसी अनुभितियाँ श्रृंगार रस के अंतर्गत आती है. हिंदी में आदिकाल से लेकर आज तक श्रृंगार रस की कवितायेँ लिखी जा रही है.

प्रकृति सौन्दर्य – प्रकृति के सौन्दर्य और क्रिया कलापों ने सदेव ही कवियों को अपनी और आकर्षित किया है. कवि प्रकृति के बाह्रा रूपों का वर्णन करने के साथ ही उसके अन्दर का वह सौन्दर्य भी देख लेते है, जो सामान्यजन की आखों से ओझल रहता है. सतपुड़ा के घने जंगल कविता इसका उदाहरण है. श्रेष्ठ कवि प्रकृति के सौन्दर्य का वर्णन करनेके साथ-साथ उसके माध्यम से अपने विचारो तथा भावनाओं को भी प्रकट करते है. हिंदी साहित्य में प्रारम्भ से ही प्रकृति कवियों का प्रिय विषय रही है. आधुनिक काल में भी प्रकृति वर्णन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

भक्ति – ईश्वर के प्रति प्रेम तथा श्रध्दा की जो भावना ह्रदय में विद्यमान रहती है. उसे भक्ति कहते है. संसार के प्रत्येक देश की भाषाओँ में ईश्वर भक्ति सम्बन्धी कविताये मिलती है. हिंदी में भक्ति सम्बन्धी रचनाये प्रचुर संख्या में लिखी गई है. हिंदी साहित्य के मध्यकाल में तो कविता का मुख्य विषय ही भक्ति है. तथा उसे भक्तिकाल का ही नाम दिया गया है. जायसी, कबीर, सुर, तुलसी, मीरा, रसखान आदि प्रसिद्ध भक्त कवि है. आधुनिक समय में भी भक्ति सम्बन्धी रचनाये लिखी जाती है, परन्तु उनकी संख्या कम है.

रहस्यानुभूति – ईश्वर, जगत तथा जीवन के प्रति जिज्ञासा का भाव कविता में रहस्यानुभूति कहलाता है. कवि उस अज्ञात शक्ति का प्रसार सम्पूर्ण प्रकृति में पाता है तथा उससे अपना तादात्म्य अनुभव किया है. उसे प्रकट करने के लिए रूपकों का सहारा लेता है. मध्य युग में कबीर तथा आधुनिक युग में जयशंकर प्रसाद, निराला, महादेवी वर्मा, रामकुमार वर्मा आदि अपनी रहस्यवादी रचनाओ के लिए प्रसिद्ध है.

वात्सल्य – बालकों का सौन्दर्य और उनकी मोहक बाल क्रीड़ाये ह्रदय में आनंद की अनुभूति जगाती है. अत: इनको भी कवियों ने अपनी कविताओं का विषय बनाया है. बाल लीलाओं का वर्णन अनेक कवियों ने किया है. महाकवि सूरदास तो इस क्षेत्र में अद्वितीय है. आधुनिक युग में श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान ने वात्सल्य विषयक कविताये लिखी है.

हिंदी कविता

हिंदी कविता

देश प्रेम तथा वीरता – उत्साह मानव मन का एक स्थायी भाव है. कठिनाइयों का सामना करने अन्याय और अत्याचार का विरोध करने तथा निर्बलों और असहायों की रक्षा करने में उत्साह का भाव प्रकट होता है. उत्साह का यह भाव वीरता को जन्म देता है. वीरता का व्यापक रूप देश प्रेम में प्रदर्शित होता है. वीरतापूर्ण कविता को पढ़कर या सुनकर होने वाली अनुभूति को वीर रस कहते है. हिंदी के आदिकाल में तो वीर रस की कविता का प्राधान्य मिलता है. जिसके कारण उसे वीरगाथा काल कहते है. आधुनिक काल में विशेषकर पराधीनता के युग में देश प्रेम तथा वीरता की अनेक श्रेठ कविताओं की रचनाये की गई. आज भी देश को स्वदेश प्रेम कि प्रेरणा देने वाली कविताओं कि आवश्यकता बनी हुई है.

जीवन दर्शन – यद्यपि कविता उपदेश देने के लिए नही लिखी जाती, तथापि उसका एक प्रमुख उद्देश्य भावों को उदात्त बनाना है. जीवन के विभिन्न सुन्दर-असुंदर पक्षों को कवि इस प्रकार प्रस्तुत करता है कि पाठक या श्रोता को अनायास ही कुटिलता, क्रूरता, दम्भ और नीचता आदि दुर्गुणों से विरक्ति हो जाती है तथा इसके विपरीत वह सद्गुणों के प्रति आकर्षित हो जाता है. भावों के साथ विचारों की उच्चता से काव्य में गरिमा आती है. गरिमामय कविताये प्रेरणादायक भी होती है. उत्तम विचारो तथा नैतिक मूल्यों के कारण ही कबीर तुलसी, रहीम और वृन्द के नीतिपरक दोहे तथा गिरधर और दीनदयाल गिरि कि कुंडलियाँ अमर है. इनसे जीवन को व्यावहारिक शिक्षा, अनुभव तथा प्रेरणा प्राप्त होती है. आधुनिक युग में तो जीवन दर्शन सम्बन्धी कविताये प्रचुर संख्या में लिखी जा रही है.

हास्य व्यंग्य – मनोरंजन की दृष्टी से लिखी गई कविताओं को हास्य की कविताये कहते है. हास्य के साथ जब उदेश्य की दृष्टी से आलोचना की जाती है, तब उसे व्यंग्य कहते है. आजकल हिंदी में हास्य व्यंग्य की रचनाये अधिक लिखी जा रही है.

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