चन्द्र यात्रा की कहानी


The Moon Travel Story चन्द्र यात्रा कहानी

पिछले सेकड़ों वर्षों से मनुष्य अन्तरिक्ष में उड़ान भरने और चन्द्रमा (चन्द्र यात्रा) पर उतरने का स्वप्न देखता रहा है. अन्तरिक्ष अभियान की वास्तविक कहानी ४ अक्टूबर १९५७ से शुरू हुई थी. जब रूस ने स्तुपनिक प्रथम कृत्रिम उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा था. इसके एक महीने बाद स्पूतनिक द्वितीय में एक लाइका कुतिया को अन्तरिक्ष में भेजा गया. अंतरिक्ष में जाने वाला संसार का यह प्रथम जीवित प्राणी था.




१२ अप्रैल १९६१ को रूस के युरी गागरिन ने वोस्टोक अंतरिक्ष यान में बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा की थी. ५ मई १९६१ को अमेरिका के एलन शेपार्ड मर्करी ३ नामक यान द्वारा अंतरिक्ष की परिक्रमा करने में सफल हुए.

चन्द्र यात्रा

चन्द्र यात्रा

सन १९६१ में चंद्रमा की सतह पर पहुँचने के लिए अमेरिका ने अपना प्रसिद्ध अपोलो नामक अंतरिक्ष यानों का प्रोजेक्ट शुरू कर दिया था. इसमें कई यान अंतरिक्ष में भेजने की महत्वाकांक्षी योजना थी. २७ जनवरी १९६७ को अपोलो प्रोजेक्ट को एक गम्भीर धक्का लगा. जब अभ्यास के दौरान एक अंतरिक्ष यान में आग लग गई और उसमें बैठे तीन यात्री वर्जिल ग्रिसम, एडवर्ड व्हाईट और रोगर चाफी की, आग में जलने से मृत्यु हो गई. इस दुखद घटना से सबक लेकर अमेरिका ने अपने अंतरिक्ष यानो में कई सुधार किये. जुलाई सन १९६९ में तीन व्यक्तियों को बिठाकर अपोलो-II को चंद्रमा की और छोड़ा गया. ये तीन यात्री थे. नील आर्मस्ट्रांग, एडविन एल्ड्रिन और माइकल कोलिंस.

२० जुलाई १९६९ को रात के १० बजकर ५६ मिनिट पर इस यान से नील आर्मस्ट्रांग ने सर्वप्रथम चंद्रमा की सतह पर अपना पहला कदम रखा. सारा संसार इस उपलब्धि से आश्चर्यचकित रह गया. आर्मस्ट्रांग ने अपना पहला कदम चंद्रमा की सतह पर रखते ही धरती की और रेडियो संदेश में कहा था. आदमी का यह नन्हा सा कदम सम्पूर्ण मानवता के लिए एक बहुत बड़ी छलांग है. एडविन एल्ड्रिन भी चंद्रमा की सतह पर उतर गए. कोलिंस आदेशानुसार यान के अन्दर ही रहे. इस प्रकार मनुष्य ने चंद्रमा पर पहुँचने में सफलता प्राप्त की. ये दौनो यात्री २१ घंटे ३५ मिनिट तक चंद्रमा की सतह पर रहे.

अंतरिक्ष में जाने वाले प्रथम भारतीय स्काट लीडर राकेश शर्मा थे, जो ३ अप्रैल १९८४ को भारत सोवियत रूस की सयुक्त अंतरिक्ष यात्रा में गए थे. अपोलो कार्यक्रम के अंतर्गत १२ अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर सब मिलकर १६६ घंटे रहे. करीब १०० किमी तक वहाँ घूमे और वहाँ से ३८० कि.ग्रा चट्टानें और मिट्टी खोद कर पृथ्वी पर लाये.

 

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