जादू सा असर आपकी बोली में लाये


आपकी बातों में जादू सा असर कैसे लायें

बात करते समय आपका सामान्य ज्ञान या समसामयिक विषयों की आपकी जानकारी आपको आकर्षण का केंद्र बनाती है. ये जानकारियों आत्मविश्वास और आपकी बातो के जादू सा असर भी पैदा करती है. हमेशा नजर मिलाकर बात करे, क्योकि नजरें झुकाकर इधर उधर देखते हुए बात करना आपके भीतर आत्मविश्वास की कमी को प्रकट करता है.




जादू सा असर आपकी बोली में लाये

जादू सा असर आपकी बोली में लाये

किसी ने ठीक ही कहा है कि बोलने की शैली से मनुष्य के व्यक्तिव का पता चलता है या यूँ कहिए कि किसी भी इंसान की बातों के सहारे उसके भीतर झाँका जा सकता है. जैस दिखने में तो कोआ तथा कोयल एक जैसे लगते है. मगर जब वे अपना मुहँ खोलते है, तो पता चल जाता है कि कौन है और कौन कोयला. इंसान की बोली ही तो है, जो उसे अनजान होने पर भी पहचान देती है तथा गैरों को भी अपना बनाने में सहायक होती है. इसी बोली के माध्यम से हम अपने विचार एक दूसरे तक पहुंचाते है.

 

यदि हमारी बोली जादू सा असर प्रभावपूर्ण है, तो यह दूसरों को स्वयं ही आकर्षित कर लेती है.

नेता अभिनेता से लेकर साधू संत तक हर व्यक्ति अपनी बोली से ही दूसरों पर अपनी छाप छोड़ पाता है. दरअसल बोलना एक कला है. जो कई बिगड़े तथा मुश्किल कामों को आसानी से हल कर देती है. हम कैसे बोलें जो दूसरों पर जादू कर दे? इसके लिए कई बातों पर ध्यान देना जरुरी है. बात करते समय अपनी आवाज पर ध्यान देना जरुरी है, क्योकि जरुरत से ज्यादा तेज या धीमी बोली सुनने वाले के भीतर खीझ पैदा कर सकती है.

 

बोलते समय जल्दबाजी न करें.इससे आपकी बातों पर असर पड़ता है – जादू सा असर

इत्मीनान से धीरे-धीरे बोलें ताकि सुनने वाला आपकी बातों को सुन समझ सके. उसमे रस ले सके. कहाँ कितना विराम देना है, इस बात का ध्यान रखे. बोलते गलत उच्चारण कभी-कभी शब्द का ही नहीं, पुरे वाक्य का अर्थ गलत देता है. बोलने से पहले स्पष्ट रूप से सोच ले कि आपको किस विषय पर बोलना है. यदि बोलने को कुछ भी नहीं है. तो चुप रहने की कोशिश करें. बातों को यूँ ही न बाधाएँ और हाँ बार-बार एक ही बात को दोहराना बातचीत का मजा किरकिरा कर सकता है.

 

हाठ ही नहीं, आखें, हाथ तथा चेहरे के हावभाव भी हमारी बातचीत को जीवंत बनाते है. इन पर भी गौर करना जरुरी है. बात करते वक्त ऐसी हरकते न करें, जो गलत प्रभाव छोड़ती हों. कोशिश करें कि लोगों से मिलते या बात करते समय चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान बनी रहे. अपशब्द बीच में न आएँ. बात करते वक्त सहज रहें. अपनी आवाज पर भी विशेष ध्यान दें. कर्कश तथा भद्दी आवाज सुनने वाले के कानों में तकलीफ पहुंचाती है.

 

बात करते समय आपका सामान्य ज्ञान या समसामयिक विषयों की आपकी जानकारी आपको आकर्षक का केंद्र बनाती है. ये जानकारियाँ आत्मविश्वास पैदा करती है. हमेशा नजर मिलाकर बात करें. क्योकि नजरें झुकाकर इधर-उधर देखते हुए बात करना आपके भीतर आत्मविश्वास की कमी को प्रकट करता है. सबसे मत्वपूर्ण बात यह है कि आप जो कह रहे है. उसके अर्थ सुनने वाले को बार-बार न पूछना पड़ें. इससे बात का वजन समाप्त हो जाता है.

इसलिए यदि आप चाहते है कि आपकी बात हर कोई सुने और समझे, लोगो पर आपकी बात का जादू सा असर हो, तो इस हल्की-फुल्की स्पीच थेरेपी को अपनाए, इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है. लेकिन यदि आप उपयुक्त बातों पर अमल करें तो निसंदेह आपकी बेहतर छवि बनेगी.

 

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