जिमनास्टिक खिलाडियों की फिटनेस की जानकारी | Gymnastics Sports Information


जिमनास्टिक

पिछले 50 वर्षो में व्यायाम कौशल और प्रतियोगिता की प्रगतिशील कठिनाई के चलते शारीरिक मांगो और खेल की कलाबाजी प्रकृति को बढ़ावा मिला है. परिणामस्वरूप जिमनास्टिक (जिमनास्ट) की शारीरिक बनावट में भी बदलाव आया है. आज की महिला जिमनास्ट छोटे कद, लीन बाड़ी और पुष्ट मांसपेशियों की है जो उन्हें वजन की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाता है . वे अपनी प्युबर्टी से पूर्व ही कम आयु में ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयार होना शुरू कर देती है.




पुरुष विशेषताओं में भी पिछले कुछ वर्षो में बदलाव आया है, और वे करीब बीस वर्ष की आयु में प्रतियोगिताओ के लिए तैयार हो जाते है, जब उनकी मांसपेशियां पूरी तरह से विकसित हो जाती है.

दुर्भाग्य से इस खेल में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अक्सर गलत समझा जाता रहा है. सौन्दर्य प्रयोजनों के लिए बॉडी बिल्डिंग और वेट ट्रेनिंग जिम्नास्टिक्स में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से बहुत भिन्न है. वास्तव में गलत तरह से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जिमनास्ट के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए हानिकारक हो सकता है. आमतौर पर बॉडी बिल्डिंग में मांसपेशियों में समूहों को वेट ट्रेनिंग से मजबूत किया जाता है. जबकि जिम्नास्टिक्स में मूवमेंट्स पैटर्न पर जोर दिया जाना आवश्यक है, क्योकि इसमें शक्ति के साथ-साथ मांसपेशियों के तालमेल की भी जरुरत होती है.

 

चोट के कारण

जिमनास्ट अपने दोनों हाथो व पैरों को संयुक्त रूप से उपयोग करते हुए अपने आप को चोट लगने के जोखिम में डाल देते है. इस तरह छोटी चोटें व खरोंच आम बात है. अधिक गम्भीर चोटों में कलाई और प्रकोष्ठ भाग कार्टिलेज, घुटने में कमर दर्द, डिस्क प्रॉब्लम टखने और कंधे में मोच और अस्थियाँ शामिल है. जिमनास्टिक में रीढ़, घुटना, सिर और कलाई की चोटों से बचने के लिए सही त्तारह से उछालने व वापस करने के तरीके सीख लेने आवश्यक है.

इसके कुछ कारण भी है जो कि इस प्रकार है :-

जिमनास्टिक में चोटों के मुख्य कारण अपरिपक्व हड्डियाँ, ओवर ट्रेनिंग, लैंडिंग तकनीको में त्रुटियाँ, मानसिक तनाव, गलत आहार रेस्ट व रिकवरी की कमी आदि होते है. हाल के आकड़े बताते है कि 70% तक घुटनों और टकनो की चोट के कारण अनुचित लैंडिंग तकनीक होती है.

 

 रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण बाते

जिमनास्टिक में होने वाली अधिकतर चोटों को, खिलाड़ी माता पिता, और कोच के बीच जागरूकता और ज्ञान के स्तर को बढाकर रोका जा सकता है. जिमनास्टिक के ज्यादातर चोटें अधिक प्रयोग की वजह से होती है क्योकि जिमनास्ट लगभग पुरे वर्ष ही प्रशिक्षण और प्रतियोगिता में हिस्सा लेते रहते है और इस दौरान रेस्ट और क्रास ट्रेनिंग को कम महत्व मिल पाता है. जिमनास्ट में चोटों को रोकने के लिए उचित कंडिशनिंग प्रोग्राम के साथ सही प्रशिक्षण प्रत्येक तकनीक के सही सिधान्तो को सीखने और किसी भी पहले से घायल जगह को आराम देने से की जा सकती है. जिमनास्टिक में जानकार और अनुभवी कोच का होना अतिआवश्यक है ताकि सही तकनीक और आयु के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके.

  • एक अच्छे स्ट्रेचिंग प्रोग्राम की स्थापना जिसमे हिपएडक्टर, जांघ के बाहर, जांघ के पीछे, जांघ के साइड, जांघ के सामने, पिंडली, पीठ, कंधे व गर्दन की मांसपेशियां शामिल होनी चाहिए. ध्यान रहे कि ओवर स्ट्रेचिंग न की जाये.
  • एक अच्छे स्ट्रेंथनिंग प्रोग्राम की स्थापना जहाँ वेट की जगह तकनीक के द्वारा किया जाए.
  • संतुलन प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देने की गतिविधियों की स्थापना.
  • प्रोप्रियोसेप्शन प्रशिक्षण शीत पुरे शरीर की कंडिशनिंग जिमनास्टिक में महत्वपूर्ण है.
  • प्लायोमेट्रिक और चपलता कार्यक्रम.
  • सही तकनीक सीखने में सक्रिय रहे. अत्यधिक थकान को रोकने के लिए उचित विराम आवश्यक है.
  • जिमनास्टिक शुरू करने से 30 मिनट पूर्व और बाद में आवश्यकता के अनुसार पानी पीते रहे.
  • गिरने या फिसलने से बचने के लिए रोजिन का इस्तेमाल करे.
  • क्रास ट्रेनिंग को बढ़ावा दे, जैसे तैराकी हमेशा सुरक्षा के लिए उपयोग करने से पहले फर्श और उपकरणों की जाँच करे. स्कूल और प्रशिक्षण में तालमेल.
  • उचित नीद और रिकवरी शारीरिक व मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है.

 

आहार और पोषण का महत्व

सीमेलविस विश्वविद्यालय, हंगरी में किये गए शोध से ये पता चला है कि अप्रशिक्षित स्कूल छात्राओ की अपेक्षा प्रशिक्षित जिमनास्ट अपनी शारीरिक बनावट को अधिक महत्व देते हुए आहार में अनियमितता रखते है. खानपान की अपरिपूर्ण आदतों के कारण वे अपने खेल प्रदर्शन को और ज्यादा कमजोर कर लेते है. इससे जिमनास्टिक में उचित आहार का बहुत महत्व है.

 

किसी खिलाड़ी का आहार किस तरह का होना चाहिए

भारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए सही आहार का होना अतिआवश्यक है. आमतौर पर जिमनास्टस को स्कूल होम वर्क और लम्बे प्रशिक्षण के अनुसार दिन में कई बार छोटे व पोषक आहार की आवश्यकता होती है.

सही किस्मो के खाद्य पदार्थो का सेवन करे ताकि संतुलित आहार प्राप्त हो सके.

प्रोटीन युक्त भोजन और नाश्ता चुने.

पुरे गेंहू अनाज, पूरी गेंहू की रोटी, फल, सब्जियों, आदि उच्च फाइबर खाद्य पदार्थो का सेवन करे, ये आसानी से पच जाते है.

वसा युक्त खाद्य पदार्थो का केवल एक छोटी मात्रा में सेवन करे, जैसे तले चिप्स और तला हुआ भोजन आदि.

खासतौर से महिला खिलाडियों को आयरन की उचित मात्रा लेने का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

 

 

प्रतियोगिता से पहले इन बातो का विशेष ध्यान रखे

प्रतियोगिता से 2 घंटे पहले हल्का नाश्ता ले, जैसे स्प्राउट्स, एक फल और 200 ग्राम कम वसा की दही, एक बाउल ओट्स या दलिया और दूध, वेजिटेबल, सेंडविच, एगह्वाईटस अथवा पीनट बटर के साथ ब्राउन ब्रैड आदि कार्बोहाइड्रेट की उचित मात्रा आवश्यक है ताकि ग्लाइकोजन सोर्सेस जल्दी वाशआउट न हो.

जिमनास्टिक Gymnastics sports information in Hindi

जिमनास्टिक Gymnastics sports information in Hindi

प्रतियोगिता के दौरान

लम्बी प्रतियोगिता के दौरान कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में होना जरुरी है.

फ्रूट बार्स, फल, दही आदि प्रतियोगिता के मध्य में सही पोषण दे सकते है.

प्रतियोगिता के दौरान पेय की आवश्यकता को स्पोर्ट्स ड्रिंक के माध्यम से पूरा किया जा सकता है जो कि कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे, साथ ही यह उच्च ताप के दुष्प्रभावो से भी बचाता है.

जिमनास्टिक को मानसिक रूप से प्रशिक्षित करना भी अनिवार्य है ताकि वह खेल में पूरी तरह एकाग्र रहे और तनाव से हो सकने वाली तकनीकी परेशानियों और गलतियों से बच सके. इसमें जिमनास्ट के माता पिता और कोच की भूमिका मुख्य है.

 

खिलाड़ी को रिकवरी के लिए क्या करना जरुरी है

प्रतिस्पर्धा के बाद, एक उच्च कार्बोहाइड्रेट नाश्ता और प्रोटीन युक्त पर्याप्त भोजन किया जाना चाहिए. यह तरल पदार्थ के सेवन को प्रोत्साहित करने के लिए भी एक अच्छा समय है.

जिमनास्ट अपने साथ कुछ खाद्य पदार्थ भी लेकर जा सकते है, जिसको प्रतियोगिता या प्रशिक्षण के तुरंत बाद खाया जा सकता है. उदहारण के लिए फल और दही, सेंडविच, खेल पेय, चाकलेट, दूध और किशमिश ब्रैड स्लाइस.

रिकवरी के लिए आहार, पेय के साथ ही उचित रेस्ट और नींद भी अतिआवश्यक है.

 

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