जीवन में खेलो का महत्व Sports Importance


दैनिक जीवन में खेलो को महत्व (Daily Life Sports Importance)

इस पोस्ट में आपके लिए Sports Importance के बारे में बताया गया है. खेल व्यक्ति का स्वाभाविक मूल प्रवृति है. न केवल मनुष्य के लिए वरन अन्य प्रणियों के लिए भी खेल एक स्वाभाविक क्रिया है. इतना ही नहीं पशुओ के बच्चे (कुत्ते, बिल्ली) भी खेलते है. इसी प्रकार मनुष्य भी चाहता है कि वह स्वतंत्र रूप से क्रियाएँ कर सके और अपने जीवन में हर पल आनंद महसूस कर सके.




जीवन में खेलो का महत्व Sports Importance

जीवन में खेलो का महत्व Sports Importance

मनुष्य के हर काम में प्रत्यक्ष व् अप्रत्यक्ष रूप से खेल छुपा रहता है. वह क्रीडा (खेल) करते हुए अपने जीवन को सहज और सरल बना लेता है. खेल वह क्रिया है, जिसे व्यक्ति स्वेच्छा से और स्वतंत्र रूप से करता है. खेलने की इच्छा करना अनिवार्य नहीं है. यह तो स्वभाविक रूप से आनंदानुभूति के लिए प्रस्फुटित होती है.

 

वर्तमान काल में खेलों का महत्त्व निरंतर बढ़ता जा रहा है

विश्व के लगभग सभी देशो में खेलों के महत्त्व को स्वीकार किया गया है. चाहे वह स्वास्थ्य की दृष्टी से या फिर मनोरंजन की दृष्टी से हो. सबसे पहले यूनानी विचारक प्लेटो ने खेल के महत्त्व को समझा था. लेकिन उसने खेल को शारीरिक विकास का साधन बताया था. इसके बाद फ्रोबेल नामक शिक्षा शास्त्री ने अपनी किंडर गार्डन पध्दति का आधारभूत सिधांत खेल रखा.

उसका कहना था कि खेल बालक की स्वाभाविक प्रवृति है, इसलिए इसका सम्बन्ध शिक्षा से जोड़ देना चाहिए. खेल ही खेल में बालक ऐसी शिक्षा ले सकता है, जो एनी साधनों द्वारा प्राप्त करनी असम्भव है. श्री कुक ने खेल को सिखना एक महत्वपूर्ण साधन बताया है.

उनका कहना है कि बालक कुछ न कुछ सीखने के लिए खेल खेलता है, खेल में बालक की रचनात्मक प्रवृतियाँ स्पष्ट, बलबटी तथा आदर्श रूप में प्रकट होती है. खेल से व्यक्ति में निहित अतिरिक्त शक्ति का प्रवाह होता है. हम देखते है कि बालक दिन भर खेलते रहते है.

फिर भी नहीं थकते, क्योकि यह एक स्वाभाविक क्रिया है, यदि हम मानसिक कार्य करने के बाद यदि खेलते है, तो थकान के बजाय एक अतिरिक्त ताजगी महसूस करते है. सामाजिक भावनाओ का विकास भी खेलो के माध्यम से होता है. खेलो से वह दूसरों से सहयोग लेने व सहयोग देने की कला सीखता है.

 

राज्य और संस्कृति

एक राज्य से दूसरे राज्य, एक राष्ट्र से दूसरे राष्ट्र की संस्कृति, कला की जानकारी आसानी से प्राप्त कर लेता है. जीवन में हार-जीत, सवेंगात्मक विकास, भावात्मक विकास, स्वयं पर नियंत्रण आदि व्यक्ति खेलों के माध्यम से आसानी से ग्रहण कर लेता है.

इतना ही नहीं, उसका पूर्ण रूप से नेतिक विकास कर्तव्य परायणता, आज्ञाकारिता, स्वच्छता, समय की पाबंदी आदि अनुशासन का विकास होता जाता है, वर्तिमान युग में विद्यालय ही हमारी शिक्षा का मुख्य आधार स्तम्भ है. प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण समय विद्यालयों में व्यतीत करता है. अपने भविष्य को उज्जवल बनाने की राहें बनाता है. इन राहों को आगे बढ़ाने में खेल एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.

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