जैवमंडल की जानकारी Earth Biosphere


पृथ्वी के जैवमंडल Earth Biosphere के सौरमंडल, वायु, प्राणी जगत, वन्य प्राणी और भी महत्वपूर्ण बातें खास आपके लिए

जिस भाग पर जीव निवास करते है वह जैवमंडल Earth Biosphere कहलाता है. पृथ्वी पर समस्त जीवन इस पेटी में ही स्थित है. जैवमंडल की मोटाई केवल २८ किमी है, इसका विस्तार समुद्रतल के नीचे ११ किमी तक तथा पृथ्वी के ऊपर १७ किमी तक है, सभी प्रकार का जीवन इस मंडल में ही पाया जाता है. चाहे वह सूक्ष्म जीव प्राणी जगत तथा पेड पौधों के रूप में हों. अधिकतर जीवन, जल, धरातल और वायुमंडल के नीचे वाले भाग में पाया जाता है.




जैवमंडल की जानकारी Earth Biosphere

जैवमंडल की जानकारी Earth Biosphere

पृथ्वी सौरमंडल का अकेला ऐसा गृह है जिस पर जीवन पाया जाता है. इस ग्रह पर जल तथा वायु की उपलब्धता तथा तापमान की उपयुक्त दशाएँ विद्यमान है जो जीवन के लिए अति आवश्यक है.

सागरों में सबसे पहले जीवन का आरम्भ हुआ. अमीबा नामक एककोशिकीय जीव से जीवों का विकास हुआ. इसके बाद क्रमश: जीवों तथा पौधो की लाखों प्रजातिओं का विकास हुआ. जीवों की इस विविधता को जैव विविधता कहते है.

Earth Biosphere जैवमंडल का सबसे महत्वपूर्ण प्राणी मनुष्य के क्रिया कलापों का समस्त जीव जंतु तथा पौधों पर प्रभाव पड़ता है. वह अपनी अनंत आवश्कताओं की पूर्ति प्राकृतिक संसाधनों से करता है. प्राकृतिक संसाधनों का सर्वोतम उपयोग करने के लिए मानव ने पिछली शताब्दियों में अपनी योग्यता एवं क्षमता द्वारा अनेक तकनीकी (प्रोद्योगिकी) का विकास किया है. पहले वह पूर्ण रूप से प्रकृति से सामंजस्य स्थापित कर जीवन यापन करता था. जब उसने प्राकृतिक पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुँचाया. आज पर्यावरण विनाश संसार के सभी देशों की चिंता का मुख्य कारण है.

जीव जंतु एवं पेड पौधे भी जैवमंडल Earth Biosphere के महत्वपूर्ण अंग है. जीव जंतु चार श्रेणी में रखे गए है. लेकिन पेड पोधे अचर होते है. प्राणियों तथा पौधों की विभिन्न जातियाँ है जिनका नीचे विस्तार से वर्णन क्या जा रहा है.

 

प्राणी जगत Animal World  – Earth Biosphere

प्राणी अथवा जंतु जगत के अंतर्गत प्राणी, सरीसर्प, कीट पतंगे, कीड़े मकोड़े, पक्षी, मछलियाँ आदि आते है. समस्त विश्व में ११ मिलियन से अधिक प्राणियों की जातियाँ पाई जाती है. जिन प्राणियों को पालतू नहीं बनाया जा सकता उन्हें वन्य जीव कहते है. वन्य जीवों की विभिन्न जातियाँ होती है जो अलग अलग प्रकार की जलवायु दशाओ में अपने को समायोजित करती है.

 

वन्य जीव Wildlife

जलवायु तथा प्राकृतिक (Earth Biosphere) वनस्पति की भिन्नता के कारण संसार के विभिन्न भागों में भिन्न भिन्न प्रकार के वन्य जीव पाए जाते है. आद्र और उष्ण जलवायु में अनेक प्रकार के जानवर, पक्षी और कीड़े मकोड़ें पाए जाते है. इनमे से कुछ मुख्य जानवर है. हाथी, चीता, शेर, लंगूर, बंदर, हिरन, सिंह, चीतल, गेंडा आदि.

ठन्डे टुंड्रा प्रदेश में फर (बाल) वाले जानवर होते है. जैसे – भालू लोमड़ी, रेनडियर, बर्फीले तेंदुए और कस्तुरी बैल इत्यादि पाए जाते है.

 

भारत में वन्य जीव Wildlife in India

प्राकृतिक वनस्पति में भिन्नता होने के कारण भारत में विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणी जाते है. भारतीय वनों में लगभग ८९००० जंगली जानवरों और पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है. हमारे देश में लगभग २५००० मछलियों की प्रजातियाँ भी पाई जाती है.

परितंत्र अथवा पारिस्थितिकी तन्त्र Ecosystems or ecological system

प्राणी एवं पौधे मिलकर एक पारितंत्र अथवा पारिथ्तिक तन्त्र का निर्माण करते है. सभी जीवधारी परस्पर इस पारितंत्र पर्यावरण में क्रिया प्रतिक्रिया करते है. पारिस्थिति में जीवों तथा उनके पर्यावरण का अध्ययन किया जाता है.

 

जैविक व अजैविक पारितंत्र के दो अंग होते है. ये दोनों अंग सौर्य ऊर्जा पर निर्भर रहते है. उत्पादक अर्थात पौधे तथा उपभोक्ता प्राणी एवं वियोजक जैविक तत्वों में सम्मिलित है तथा अजैविक तत्वों में जल, तापमान, जलवायु तथा प्रकाश सम्मिलित है. सभी प्राणी जीवित रहने के लिए परस्पर एक दूसरे पर निर्भर है. उदाहरन के लिए हरे पौधे सूर्य के प्रकाश में प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा पर निर्भर रह्ते है. अत: उन्हें उपभोक्ता कहते है. उपभोक्ता तीन प्रकार के होते है. शाकाहारी, माँसाहारी एवं सर्वाहारी. शाकाहारी भोजन के लिए पेड पौधों पर निर्भर होते है. माँसाहारी, शाकाहारी प्राणियों का शिकार कहलाता है. जीवों के बीच इस आहार सम्बंध को आहार श्रखला कहते है.

 

जीवों के प्रकार एवं भोतिक पर्यावरण के आधार पर प्रकृति में अनेक प्रकार के परितंत्र पाए जाते है. जैसे सरोवरिय पारितंत्र, सागरीय पारितंत्र, घास पारितंत्र, वन पारितंत्र, मरुस्थलीय पारितंत्र तथा पर्वतीय पारितंत्र आदि.

 

किसी क्षेत्र में प्राकृतिक वनस्पति, प्राणियों एवं जलवायु के बीच एक घनिष्ट सम्बंध पाया जाता है. किसी विशेष क्षेत्र में परस्पर क्रिया करने वाले प्राणियों एवं पौधों के समूह को बायोम कहते है. हर बायोम में एक विशेष प्राणी एमव विश्व को दस प्रमुख बयोमों में विभाजित किया गया है. उष्ण कटिबंधीय सवाना बायोम, उष्ण कटिबंधीय चोडी पत्ति के वन तथा झाड़ियाँ बायोम, उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन बायोम, शीतोष्ण कटिबंधीय वन बायोम, शीतोष्ण कटिबंधीय घास क्षेत्र बायोम, मध्य अक्षांशीय चोडी पत्ती वाले एवं मिश्रित वन बायोम, भूमध्य सागरीय बायोम, मरुस्थलीय बायोम, टुंड्रा बायोम तथा टैगा बायोम.

बायोम सागर में भी पाए जाते है. जैसे मूंगे की चट्टानों से बना बायोम, बायोम स्थिर नहीं होते उदारहरण दलदलों में बाढ़ आने से उस बायोम के अन्दर विभिन्न प्रकार के समुदायों का विकास हो जाता है.

 

पादप जगत Plant kingdom

पृथ्वी के धरातल पर उत्पन्न होने वाली सारी प्राकृतिक वनस्पति पादप जगत के अंतर्गत आती है. वनस्पति उन समस्त पेड. पौधों को कहते है. जो किसी क्षेत्र में मनुष्य के प्रयासों के बिना अपने आप प्राकृतिक रूप में उगते है. प्राकृतिक वनस्पति में कटीली झाड़ियाँ, घास प्रदेश, वृक्षों के समूह (वन) सम्मिलित किये जाते है. वर्षा और तापमान ऐसे मुख्य कारक है जो किसी क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली वनस्पति को निर्धारित करते है. उदाहरण के लिए, अधिक वर्षा एवं उच्च तापमान वाले भागों में ऊचे तथा सघन वन पाए जाते है. रेगिस्तान में जहाँ बहुत कम वर्षा होती है. कटीली झाड़ियाँ उगती है. न्यून वर्षा तथा अति निम्न तापमान वाले ध्रुवीय एवं उपध्रुवीय भागों में टुंड्रा वनस्पति पाई जाती है.

 

वन Forest Information

वृक्षों की अधिकता वाले क्षेत्र वन कहलाते है. वनों में वृक्षों में अलावा घास, लताएँ तथा कटीली झाड़ियाँ भी उगती है. भिन्न भिन्न प्रकार के वृक्ष भिन्न भिन्न प्रकार की मिट्टी, भौतिक एवं जलवायवीय दशाओं में उगते है, कुछ वृक्षों की लकड़ी कठोर तथा कुछ वृक्षों की मुलायम (कोमल) होती है. कुछ वनों में सदाहरित वृक्ष पाए जाते है तथा कुछ वनों में पतझड़ वाले वृक्ष अधिकता से उगते है. कुछ वृक्षों की चोडी पत्तियाँ होती है. उपयुक्त विशेषताओ के आधार पर संसार में मुख्य रूप से निम्नलिखित वन पाए जाते है.

  • शीतोष्ण कटिबंधीय शंकुधारी वन.
  • शीतोष्ण कटिबंधीय चोडी पत्ती वाले वन.
  • भूमध्य सागरीय चोडी पत्ती वाले वन.
  • उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन अथवा मानसूनी वन.
  • उष्ण कटिबंधीय सदापर्णी वन अथवा वर्षावन.

 

घास प्रदेश Grass State

ये अनेक प्रकार की जलवायुवीय दशाओं में उगने वाली घासें तथा लम्बी जड़ वाले पौधे है. ये कम वर्षा वाले भागों में उगती है. जहाँ बड़े बड़े पेड उग नहीं पाते. घासों के अलावा इन भागों में छोटे एवं छितरे पेड भी उगते है. ये घास प्रदेश दो प्रकार के होते है. शीतोष्ण कटिबंधीय घास प्रदेश तथा उष्ण कटिबंधीय घास प्रदेश.

शीतोष्ण कटिबंधीय घास क्षेत्र शुष्क एवं ठंडे प्रदेशों में पाए जाते है. इन क्षेत्रों की घास छोटी तथा कम सघन होती है. आद्र्तायुक्त क्षेत्रों में लम्बी घासें ही उगती है. वृक्ष प्राय: उगते ही नहीं. इस प्रकार के घास क्षेत्रों को दक्षिण अफ्रीका में वेल्ड मध्य एशिया में स्टेपीस आस्ट्रेलिया में डाउन्स दक्षिण अमेरिका में पंपाज तथा उत्तरी अमेरिका में प्रेयरी के नाम से जाना जाता है. पशुचारण के लिए उपयोगी होने से इनका आर्थिक महत्व बहुत अधिक है. इन प्रदेशों में विभिन्न प्रकार का वन्य जीवन पाया जाता है.

 

मरुस्थल की वनस्पति Desert vegetation

अत्यंत शुष्कता मरुस्थलों की मुख्य विशेषता है. तापमान के प्रभाव के कारण मरुस्थल दो प्रकार के होते है. उष्ण एवं ठन्डे. महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर विश्व के बड़े शुष्क मरुस्थल स्थित है. उष्ण मरुस्थलों के प्रमुख उदाहरण पश्चिमी उत्तर भारत में थार तथा अफ्रीका में कालाहारी व सहारा मुख्य है. ठन्डे मरुस्थलों में मंगोलिया का गोबी मुख्य है.

मरुस्थल में कटीली झाड़ियाँ, केक्ट्स के पौधे तथा कहीं-कहीं विरल रूप से घासें पाई जाती है. यहाँ मरुद्भिद पौधे उगते है जो अत्यंत शुष्क दशा में भी समायोजित कर लेते है.

टुंड्रा एक शीत मरुस्थल है. यहाँ ग्रीष्म ऋतु बहुत छोटी होती है. इस ऋतु में यहाँ शैवाल, लाइकेन तथा माँस वनस्पति एवं छोटे रंग बिरंगे फूलों वाले पौधे उगते है.

 

मानव द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण से छेड़छाड़ The Environment Manipulating by Human Nature

मनुष्यों की बढती हुई जनसँख्या ने प्राकृतिक क्रिया कलापों में हस्तक्षेप करके पर्यावरण (Earth Biosphere) को बदल दिया है. वनोंद्योगो, कृषि पशुचारण, आखेट, मत्स्य आखेट, खनन एवं नगरीकरण जैसे अनेक मानवीय क्रियाओं का प्रकृति की जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. कृषि भूमि के विस्तार तथा लकड़ी की प्राप्ति के लिए मनुष्य ने वनों का लगभग सफाया ही कर दिया है. वन विनाश का बुरा प्रभाव वन्य जीवों पर भी पड़ा है. वनों के काटे जाने से जीवों के प्राकृतिक आवास समाप्त हो गए है. वन के विनाश के दुष्परिणाम बाढ़ मिट्टी का अपरदन, मरुस्थल प्रसार तथा जलवायु परिवर्तन आदि के रूप में दिखाई देते है. वन्य जीवों के आखेट से उनकी अनेक जातियाँ जातियाँ लुप्त हो गई है. तथा अनेक जातियाँ लुप्त होने के करीब है. नगरीकरण की वृद्धि से भी प्राकृतिक पर्यावरण का विघटन हुआ है. और प्रकृति का संतुलन गड़बड़ा गया है.

मानव द्वारा प्रकृति से छेड़छाड़ करने से विश्व के तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है जिसने वैश्विक उष्मन की समस्या को उत्पन्न किया है. इस समस्या से विश्व के सभी देश प्रभावित है. इससे सभी देश चिंतित है.

सयुंक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में जोहांसबर्ग दक्षिण अफ्रीका में सितम्बर २००२ में पृथ्वी सम्मेलन-२ का आयोजन किया गया इस सम्मेलन में पृथ्वी के पर्यावरण के विघटन से सम्बंधित क्षेत्रों की चर्चा की गई. स्वास्थ्य रक्षा स्वच्छ पेयजल, सफाई व्यवस्था, विद्युत उत्पादन, ऊर्जा के प्रदूषण विहीन साधन, पृथ्वी की जैव विविधता (Earth Biosphere) का संरक्षण एवं कृषिं.

विकसित तथा विकासशील देशों की प्राथमिकता में भिन्नता होने के परिणाम स्वरूप यह सम्मेलन पूर्ण रूप से सफल न हो सका.

 

महत्वपूर्ण तथ्य Key Facts

  • जीवों के निवास करने के स्थल को जैवमंडल कहते है.
  • पृथ्वी सौरमंडल का अकेला गृह है जहाँ जीवन पाया जाता है.
  • जीवन की सर्वप्रथम उत्पत्ति सागरों में हुई.
  • मनुष्य ने अपने क्रिया कलापों से पर्यावरण का बहुत विनाश किया है.
  • प्राकृतिक वनस्पति में घास प्रदेश, वन एवं मरुस्थलीय वनस्पति शामिल है.
  • विभिन्न आधारों पर वनों का बर्गीकरण किया गया है. जैसे पत्तियों के प्रकार, लकड़ी का प्रकार, वृक्षों का प्रकार आदि. इस प्रकार संसार में अनेक प्रकार के वन है.
  • घास प्रदेश उष्ण कटिबंधीय होते है. इनके स्थानीय नाम अलग अलग है.
  • प्राणी जगत में कीट पतंगे, सरीसर्प, मछली, पक्षी व जंतु आदि सम्मिलित है.
  • स्थल तथा जल में विभिन्न पारितंत्र विकसित हुए है.
  • विभिन्न जीवों के बीच पोषण की श्रंखला को आहार श्रंखला कहते है.
  • सागर के तटीय क्षेत्रों की जलवायु का व्यापार, मत्स्य, उत्पांदन नो परिवहन पर प्रभाव पड़ता है.
  • विश्व के सभी देशों के लिए वैश्विक उष्मन एक गम्भीर समस्या है. इसमें सभी देश चिंतित है.

 

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7 Responses

  1. ABDUL SAMAD says:

    STUDENT KO SIKHANE KE LIYE BHUT BHUT SUKRIYA

  2. Sanskriti says:

    very nice gave idea for my hindi speech .
    Thanks a lot for this information

  3. Kashish says:

    Very good for knowlad

  4. Kya mai bhi apne kuch thoughts aapke blog me post kr skta hoo ya nhi?

  5. Shweta says:

    Thxx for the information

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