टहलना सेहत के लिए ब्रह्मास्त्र


टहलना कसरतों की रानी है

प्रात: काल में टहलना भ्रमण करने से स्वास्थ अच्छा रहता है. स्वच्छ वायु से फेफड़े शुद्ध होते है. चलने फिरने से शरीर में रक्त का संचार होता है. शरीर बलवान बनता है. प्राकृतिक दृश्यों की सुन्दरता को देखकर मन आनंद से भर जाता है. पशु पक्षी जगत से साक्षात्कार होता है.

टहलना

टहलना

अंग्रेजी भाषा में एक कहावत है.

Early to bed and early to rise. Makes a man healthy, wealthy and wise.




अर्थात जल्दी सोने और जल्दी उठ जाने से व्यक्ति स्वस्थ, संपन्न और बुद्धिमान बनता है. भारतीय मनीषियों का कथन है कि सुबह ५ बजे जागने वाला सुर (देवता) है, ६ बजे जागने वाला मानव है और ७ बजे के बाद जागने वाला असुर (दानव) है. इसलिए उषकाल या ब्रम्हमुहूर्त में उठना सभी दृष्टियों से श्रेयस्कर है, क्योकि इस समय देविकाल की वृष्टि होती है.

 

रूस में प्रसिद्ध दार्शनिक, चिंतन एवं साहित्यकार महात्मा टालस्टाय का मानना है कि देर रात में लेखन कार्य करने पर आलोचक को झपकी लग जाती है और रचना का स्तर गिर जाता है.

 

संत आचार्य विनोबा भावे लिखते है

दुनिया में प्रतिभा के जितने भी काम हुए है, वे सब बड़ें सबेरे हुए है. योगाभ्यास, गहरा अध्ययन, चिंतन, मनन, ध्यान, योग सब बड़े काम सबेरे सधते है. दुनिया में सारे पुरुषार्थ के काम, जिनमे प्रतिभा का उपयोग होता है, सब सबेरे होते है दिन उगने से पहले और रात्री समाप्त होने के पूर्व  लेकिन देर रात तक समय सिनेमा या टी.वी देखने में ही जाएगा तो उसका असर दिमान पर होगा, नींद पर होगा, स्वप्नों पर होगा, जीवन बड़ा दुखी होगा, रात माता की गौद के समान है. उसकी गोद में सोना माता की गोद में सोना है. रात को जागना, यानी जीवन को निर्वीय बनाना है.

 

सुबह जल्दी उठने और घुमने जाने या सैर करने की अनुशंसा में किसी कवि ने बड़े सरल ढंग से कुछ इस प्रकार लिखा है.

सुबह-सुबह का सैर सपाटा

कभी न होता इससे घाटा

ताज़ी हवा ताजगी देती

बदले में कुछ भी ना लेती.

चलना सबसे अच्छी कसरत

स्वस्थ शरीर बड़ी है दौलत

जीवन की आपा धापी में

मन को भाता है सन्नाटा

सूर्योदय से पहले उठना

मात पिता का वंदन करना

अच्छे बच्चे सभी जागते

प्रभु चरणों में मस्तक धरना  

मान बड़ा होता है दुनिया में,

कोई छोटा हो या मोटा.

टहलना

टहलना

 

विनोबाजी बच्चों ही नहीं शिक्षकों को भी सुबह टहलने जाने या वायु सेवन करने जाने की परामर्श देते हुए लिखते है.

शिक्षको को कई घंटो तक बालकों को सिखाना पड़ता है, उससे शिक्षक का जीवन नीरस बनता होगा, इसलिए में शिक्षक को सलाह दूँगा कि वे खुली हवा में थोड़ा घुमे. उसमे जीवन में ताजगी आएगी, स्वच्छ हवा मिलेगी, सुबह का निर्मल वातावरण तारिका, नक्षत्र देखने को मिलेंगे. हवा बहती है, तो स्फूर्ति आती है, तो मैं अनुभव से कहता हूँ कि शिक्षक को चार पाँच माइल ८ किमी रोज घूमना चाहिए. आकाश में जितनी कल्पना मिल सकती है, उतनी घर में नही मिलती. इसलिए कवि, तत्वज्ञानी, साहित्यिक सबको आकाश के नीचे घूमना चाहिए. आकाश के कारण दिल बड़ा होता है.

 

प्रात: काल में भ्रमण करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है. स्वच्छ वायु से फेफड़े शुद्ध होते है. चले फिरने से शरीर में रक्त का संचार होता है. शरीर बलवान बनता है. प्राकृतिक दृश्यों की सुन्दरता को देखकर मन आनंद से भर जाता है. पशु पक्षी जगत से साक्षात्कार होता है.

 

साबरमती आश्रम में गाँधीजी उठ जाग मुसाफिर भोर भई गीत के माध्यम से आश्रमवासियों को प्रात: काल में जल्दी उठ जाने की प्रेरणा देते थे. उन्होंने प्रात काल में जल्दी उठ जाने की प्रेरणा देते थे. उन्होंने प्रात काल घुमने जाने या टहलने को कसरतों की रानी तक कहा है.

 

ब्रम्हा मुहूर्त में जल्दी उठकर अध्ययन करने से विधाए सिद्ध होती है. जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हमारे पूर्वजों ने ब्रम्हा मुहूर्त में ही खोजा. पारसी लोग ब्रम्हा मुहूर्त में जाग जाते है और अपने कार्यों में निरत हो जाते है. इसलिए वे इतने बुद्धिमान और धनवान होते है.

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