दशहरा हिंदी निबंध | Dashehra Hindi Essay

दशहरा एक भारतीय त्यौहार

हमारे देश में विभिन्न धर्मो और जातियों के लोग रहते है. उनके विविध कर्म संस्कार होते है. वे अपने कर्मो और संस्कारो को समय-समय पर विशेष रूप से प्रकट करते रहते है. इन रूपों को हम आये दिन, त्योहारों, पर्वो, आयोजनों में देखा करते है. इस प्रकार के अधिंकाश तिथि, पर्व, त्यौहार, आयोजन, उत्सव आदि सर्वाधिक हिन्दुओ में होते है. हिन्दुओ के जितने तिथि, त्योहारों, पर्व, उत्सव आदि है. उनमे दशहरा-विजयादशमी का महत्व अधिक बढ़कर है. यह भी कहा जाना कोई अनुचित या अतिश्योक्ति नहीं है कि दशहरा हिन्दुओ का सर्वश्रेष्ठ पर्व त्यौहार या उत्सव है.




दशहरा का त्यौहार सम्पूर्ण भारत में ही नही अपितु पुरे विश्व में हिन्दू धर्म मत के अनुयायी बड़े ही उल्लास और प्रयत्न के साथ मनाते है. यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. अंग्रेजी तिथि गणना के अनुसार यह त्यौहार अक्टूबर माह में पड़ता है.

दशहरा का त्यौहार उत्सव मनाने के कई कारण और मत है. प्राय: सभी हिन्दू धर्मावलम्बी इस धारण से इसे मनाते है कि इसी समय भगवान श्री राम ने युग-युग सर्वाधिक अत्याचारी लंका नरेश रावण का अंत करके उसकी स्वर्णमयी नगरी लंका पर विजय प्राप्त की थी. चूँकि प्रतिपदा से लेकर दशमी तक लगातार भयंकर युद्ध करने के उपरान्त ही श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी. इसलिए इसे विजयादशमी भी कहा जाता है. दशहरा शब्द ही विजयादशमी शब्द का पर्याप्त और प्रतीक है.

दशहरा त्यौहार पर्व और पुण्य तिथि के भी रूप में मनाया जाता है. मुख्य रूप से बंगाल निवासी इसे महाशक्ति की उपासना आराधना के रुप में मानते है. उनका यह घोर विश्वास होता है कि इसी समय महाशक्ति दुर्गा ने असुरो का विध्वंस करके कैलाश पर्वत को प्रस्थान किया था. महाशक्ति की पूजा उपासना ध्यान भक्ति आदि के द्वारा वे लगातार नौ दिनों तक अखंड पाठ और नवरातों तक पूजा के दीप जलाया करते है. इसलिए इसे लोग नवरात भी कहते है. दुर्गा के अतिरिक्त अन्य देवी देवताओ के भी व्रत, उपासना, पाठ, संकीर्तन आदि पुण्य कार्य विधान इसी समय सभी श्रद्धालु अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए निष्ठा से करते है.

दशहरा हिंदी निबंध

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इस त्यौहार के समय सबमे अद्भुत ख़ुशी और उमंग की झलक होती है. प्रकृति देवी अपनी सुन्दरता को सुखद हवा, वनस्पतियो के रंग बिरंगे फूलों फसलों फलों, और सभी जीवधारियों विशेष रूप से मनुष्यों के रौनकता और चंचलता के रूप में प्रकट करती हुई दिखाई पड़ती है. उधर मनुष्य भी अपनी विविध सौन्दर्य सज्जा से पीछे नही रहता है. दशहरा के समय जगह-जगह मेलों, दंगलों, सभाओं, उद्घाटनों प्रितिभोजो, समारोहों आदि के कारण सारा वातावरण अपने आप में बन-ठनकर अधिक रोचक दिखाई देने लगता है.

दशहरा के त्यौहार का बहुत बड़ा संदेश है. वह यह कि सत्य और सदाचार की असत्य और दुराचार पर निश्चय ही विजय होती है. यह त्यौहार हमें यह सिखलाता है कि हमें पूरी निष्ठा और श्रद्धा बनाये रखनी चाहिए.भारतीय सांस्कृतिक चेतना का अगर कोई वास्तविक त्यौहार है तो सबसे पहले दशहरा ही है.

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