दिल्ली शहर की हिस्ट्री


दिल्ली शहर कितनी बार बसा और उजड़ा

दिल्ली कई शक्तिशाली सम्राटों और राजाओं के समय में भारत की राजधानी रही है. इस शहर का उत्थान और पतन कई बार हुआ है. दिल्ली शहर के पुराने खंडहर इस बात के प्रमाण है कि प्राचीन काल से अब तक यह शहर कई बार बसा और कई बार बसा और की बार उजड़ा.




दिल्ली शहर

दिल्ली शहर

विशालता के क्रम में दिल्ली का भारत में तीसरा स्थान है.

इससे बड़े दो शहर कलकत्ता और बम्बई है. आज नई दिल्ली भारत  की राजधानी है जो पुरानी दिल्ली के दक्षिण में स्थित है. दिल्ली मध्य प्रदेश के उत्तर में है. और यमुना नदी के पश्चिम किनारे पर स्थित है. सन १९८१ में इस शहर की जनसंख्या लगभग ६१ लाख थी. अब यह आकड़ा १ करोड़ को पार कर गया है.

दिल्ली कई शक्तिशाली सम्राटों और राजाओं के समय से भारत की राजधानी रही है. इस शहर का उत्थान और पतन कई बार हुआ है. दिल्ली शहर के पुराने खंडहर इस बात के प्रमाण है कि प्राचीन काल से अब तक यह शहर कई बार बसा और कई बार उजड़ा इतिहास के अनुसार यह शहर अब तक सात बार अलग-अलग स्थानों पर बसाया गया.

 

सबसे पहली बार दिल्ली का जिक्र महाभारत में आया है.

उस समय इस शहर का नाम इन्द्रप्रस्थ था. यह पुराने किले और हुमायु के मकबरे के बीच स्थित था. इतिहास में एक और दिल्ली का जिक्र आता है. जिसे महाराजा ढीलू ने अपने नाम से ई.पू पहली सदी में बसाया था.

 

१२ वी शताब्दी में दिल्ली पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी.

पृथ्वीराज चौहान को मुस्लिम शासक मोहम्मद गौरी ने हराकर दिल्ली पर अपना कब्जा कर लिया और इस प्रकार यह शहर कुछ दिनों के लिए विदेशियों के अधीन हो गया. तेरहवी शताब्दी के आरम्भ में कुतुबुद्दीन ऐबक ने क़ुतुब मीनार का निर्माण कराया और दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया.

 

आज की दिल्ली के उत्तर पूर्व में

दिल्ली के किले के पास अल्लाउद्दीन खिलजी ने एक दूसरी दिल्ली का निर्माण कराया. यह १२९६ और १३१६ के बीच की घटना है. सन १३२०-२५ के बीच तीसरी दिल्ली गियासुद्दीन तुगलक ने बसाई. इसका नाम तुगलकाबाद रखा गया. यह स्थान उसे पानी की कमी के कारण शीघ्र बदलना पड़ा और वह अपनी राजधानी क़ुतुब मीनार के पास ले गया. सन १३२५ और ५१ के बीच मुहम्मद बिन तुगलक ने चौथी बार इस शहर को बसाया और इसका नाम जहा पनाह रखा. फिरोज शाह तुगलक ने १३५१-८८ के बीच पाचवी बार इस शहर को बसाया और इसका नाम फिरोजाबाद रखा.

 

अकबर १५५६ –१६०५ और जहाँगीर ने अपनी राजधानी फतेहपुर सीकरी (आगरा) को बनाया.

इससे दिल्ली का महत्व कम हो गया. शाहजहाँ १६२९-५८ ने अपनी राजधानी के रूप में सातवी बार इसे बसाया और इसका नाम शाहजहाँनाबाद रखा. यही आज की पुरानी दिल्ली है. उसने शहर के चारों तरफ कई दरवाजे बनवाये. जो आज दिल्ली गेट, कश्मीरी गेट आदि नामो से प्रसिद्ध है.

 

१८ वी सदी में

मुग़ल साम्राज्य कमजोर पड़ गया. इस शताब्दी के मध्य दिल्ली ने बहुत से अच्छे बुरे दिन देखे. सन १८०३ में यह अंग्रेजों के अधीन हो गई. अंग्रेज अपना प्रशासनिक कार्यालय कलकत्ता से उठाकर दिल्ली ले आये. इस प्रकार दिल्ली में कई बार उथल पुथल हुई. यह कई बार बसी और की बार उजड़ी.

 

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