धन का सच्चा स्वरुप Money Blog


The true nature of money (धन का किस तरह से सदुपयोग करे, इसको संचित कैसे करे)

दुर्गुणी धनवान कुछ नहीं, केवल एक भिक्षुक है. मरते समय तक जो धनि बना रहने का कहता है, वह बड़े भाग्यवान थे, लेकिन हमारा मत है कि वह अभागा है, क्योकि अगले जन्म में अपने पापों का फल तो वह स्वयं भोगेगा, किन्तु धन को न तो भोग सका और न ही साथ ले जा सका. सद्गुणी का सुखी होना तो निश्चित है.




धन का सच्चा स्वरुप Money Blog in Hindi, How to Save Money,

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धन इसलिए जमा करना चाहिए ताकि उसका सदपयोग किया जा सके और उसे सुख व संतोष देने वाले कामों में लगाया जा सके, किन्तु यदि जमा करने की लालसा बढ़कर तृष्णा का रूप धारण कर ले और आदमी बिना धर्म, अधर्म का ख्याल किया पैसा लेने या आवश्यकताओं की उपेक्षा करके उसे जमा करने की कंजूसी का आधी हो जाए तो वह धन धूल के बराबर है, जिनका ह्रदय बुरी भावनाओं से कलुषित हो रहा है, वे यदि कंजूसी से धन जोड़ भी ले, तो वह उनके लिए कुछ भी सुख नहीं पहुँचाता बल्कि उल्टा कष्टकर ही सिद्ध होता है.

ऐसे धनवानों को हम कंगाल ही कहकर पुकारेंगे, क्योकि पैसों से जो शारीरिक व मानसिक सुविधा मिल सकती है, वह उन्हें प्राप्त नहीं होती, उल्टी उसकी चौकीदारी की भरी जोखिम सिर पर लादे रहता है. दूसरों के कष्टों को पत्थर की भाति देखता रहता है, किन्तु शुभ कार्य में दान करने के नाम पर जिनके प्राण निकलते है, ऐसा अभागा कंजूस मक्खीचूस कदापि धनी नहीं कहा जा सकता है.

कंजूस डरता है कि कंही उसका पैसा डूब न जाए, इसलिए पैसों को छाती से छुड़ाकर किसी कारोबार में लगाने की हिम्मत नहीं होती. इन कारणों से कोई भी कंजूस स्वभाव का मनुष्य धनी नहीं हो सकता. मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं, वरन इससे भी कुछ बढ़कर है.

दुर्गुनी भनवान कुछ नहीं, केवल एक भिक्षुक है, मरते समय तक जो धनि बना रहने का कहता है, वह बड़े भाग्यवान थे, लेकिन हमारा मत है कि वह अभागा है, क्योकि अगले जन्म में अपने पापों का फल तो वह स्वयं भोगेगा, किन्तु धन को न तो भोग सका और न ही साथ ले जा सका. सद्गुणी का सुखी होना तो निश्चित है. यदि आपने बेईमानी करके लाखो रूपये की सम्पत्ति जमा कर ली तो क्या बड़ा काम कर लिया?

दीन दुखियो का रक्त चूसकर यदि अपना पेट बढ़ा लिया तो यह क्या बड़ी सफलता हुई? आपके अमीर बनने से यदि दुसरे अनेक व्यक्ति गरीब बन रहे हो, आपके व्यापार से दूसरों के जीवन पतित हो रहे हो, तो ऐसी अमीरी पर लागत है. स्मरण करिये. एक दिन आपसे पूछा जाए कि धन को कैसे पाया व कैसे खर्च किया?

स्मरण करिए आपके एक दिन न्याय तुला पर तोला जाये तो देखोगे कि आप उसके विपरीत निकले, जैसा कि होना चाहिए था. बिना पैसों के भी धनवान बना जा सकता है. उसके लिए जरुरी है प्रेम, पवित्रता सज्जनता, नम्रता, दयालुता आदि गुणों से अपने मन को भर लो. अपने तुच्छ स्वार्थो को सड़े गले व पुराने कुर्ते की तरह उतार फेंक दो. बस फिर दरिद्रता आपके द्वार से पलायन कर देगी. आपको कभी धन की कमी महसूस नहीं होगी. आप हमेशा सुखी रहोगे.

 

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