पंचवटी का सारांश Summary of Panchavati

पंचवटी का सारांश

पंचवटी राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त का प्रसिद्ध खंडकाव्य है. भगवान श्री राम ने सीता और लक्ष्मण सहित चौदह वर्ष की वनवास अवधि में तेरह वर्ष पंचवटी नामक वन में बिताये थे. पंचवटी महाराष्ट्र में नासिक के निकट गोदावरी नदी के तट पर स्थित है.




पंचवटी के प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन इस खंडकाव्य में किया गया है.  पंचवटी प्रदेश में चांदनी की अनुपम शोभा छाई हुई है. हरी घास वृक्ष आनन्द के साथ झूम रहे है. रात्री में चारों और पूर्ण शांति है. नियति नदी में क्रिया कलाप शांत भाव से चल रहे है. चन्द्रमा की चंचल किरणे पृथ्वी और जल राशि पर थिरक रही है. वृक्ष आनंद विभोर होकर झुमने लगे है. सुगन्ध फ़ैल रही है.

पंचवटी का सारांश

पंचवटी का सारांश

सर्वत्र आनंद है. प्रभात में जो सूर्य की किरणे पृथ्वी तल पर पड़ती है. वे ओस के मोतियों को बटोर लेती है. गोदावरी के जल की लहरे ताल देती हुई सी लगती है. पृथ्वी के इस सौन्दर्य की और चन्द्रमा और नक्षत्रों की दृष्टी लगी हुई है. यहाँ सर्वत्र हरियाली छाई हुई है. झरने कल-कल करते हुए प्रवाहित हो रहे है. पृथ्वी, जल, वायु, आकाश सभी इस चाँदनी रात में रस मग्न है.

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