पंचवटी का सौदर्य Panchavati

पंचवटी का सौदर्य

पंचवटी का सौदर्य जिसमे पंचवटी मैथलीशरण गुप्त ने प्रकृति के सौदर्य का दर्शाया है. आँखों के आगे हरियाली रहती है हर घड़ी यहाँ जहाँ तहाँ झाड़ी में झिरती है झरनों की झड़ी यहाँ वन की एक-एक हिमकणिका जैसी सरस और शुचि है, क्या सौ-सौ नागरिक जनों की वैसी विमल रम्य रूचि है?




सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश में मैथलीशरण गुप्त द्वारा पंचवटी के सौदर्य तथा उसकी पवित्रता का वर्णन किया गया है.

पंचवटी का सौदर्य

पंचवटी का सौदर्य

व्याख्या – यहाँ पंचवटी में हर समय आँखों के सामने हरियाली रहती है. इस वन में यत्र तत्र झाड़ियों के मध्य झर – झर करते हुए झरने बहते है. सम्पूर्ण वन का प्रत्येक कण सरस तथा पवित्र है. जितनी सरसता तथा पवित्रता ओस के इन कणों में है, उतनी पवित्रता तथा सरसता क्या नगरों में रहने वाले नागरिकों में पायी जाती है? क्या नागरिको की प्रकृति के समान सुन्दर स्वच्छ भावनाए है? अर्थात नागरिको की भावनाए पवित्र नहीं है.

हिंदी ब्लॉग

indiahindiblog

India Hindi Blog हिंदी भाषी लोगो के लिए बनाया गया है, ये भारत के उन सभी लोगो के लिए है जो खुद ऑनलाइन पढ़ना चाहते है, अपने ज्ञान को बढाना चाहते है. हर तरह की जानकारियों से अपने आपको अपडेट रखना चाहते है. इसलिए हमारे द्वारा इस ब्लॉग को आपके लिए तैयार किया गया. आप इस ब्लॉग में सभी तरह की जानकारियों का ज्ञान ले सकते है. इस ब्लॉग में आपको चिकित्सा, टेक्नोलॉजी, खेल, सामान्य ज्ञान, इतिहास, अनमोल विचार, इन सभी का संग्रह आपके लिए यहाँ पर उपलब्ध है.

You may also like...

1 Response

  1. November 3, 2017

    Very impressive blog.

    Interesting article right on the subject.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *