पृथ्वी का प्रकाश चक्र Earth Light Cycle


पृथ्वी का प्रकाश चक्र – In what way is the light cycle of the earth?

पृथ्वी का प्रकाश चक्र Circle of Illumination – वैसी काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी के प्रकाशित और अप्रकाशित भाग को बाँटती है.

पृथ्वी के परिभ्रमण की दिशा पश्चिम से पूर्व है. जिस कक्षा में पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है वह दीर्घवृत्तीय है. अत: तीन जनवरी को सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी अपेक्षाकृत कम हो जाती है, जिसे उपसौरिक Perihelion की स्थिति कहते है. यह दूरी 9.15 करोड़ मील है. इसके विपरीत उत्तरायण की स्थिति में चार जुलाई को पृथ्वी सूर्य से कुछ दूर चली जाती है, इसको अपसौरिक Aphelion कहते है. यह दूरी 9.45 करोड़ मील होती है.



पृथ्वी का प्रकाश चक्र में एपसाइड रेखा

उपसौरिक और अपसौरिक को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा सूर्य के केंद्र से गुजरती है. इसे एपसाइड रेखा कहते है.

 

पृथ्वी का प्रकाश चक्र में अक्षांश Latitude

यह ग्लोब पर पश्चिम से पूरब की और खीची गई काल्पनिक रेखा है जिसे अंश में प्रदर्शित किया जाता है. वास्तव में अक्षांश वह कौण है. जो विषुवत रेखा तथा किसी अन्य स्थान के बीच पृथ्वी के केंद्र पर बनती है. विषुवत रेखा को शून्य अंश की स्थिति में माना जाता है. यही से उत्तर की और बढ़ने वाली कोणिक पूरी दूरी को उत्तरी अक्षांश और दक्षिण में बढ़ने वाली दूरी को दक्षिणी अक्षांश कहते है. इसकी अधिकतम सीमा पर ध्रुव है, जिन्हें 90 डिग्री उत्तरी या दक्षिणी अक्षांश कहा जाता है. सभी अक्षांश रेखाए समानांतर होती है. वे दो अक्षांशों के बीच की दूरी क्षेत्रफल जोन के नाम से जानी जाति है. दो अक्षांशो के मध्य की दूरी 111 किमी होती है.

 

पृथ्वी का प्रकाश चक्र में देशांतर Longitude

यह ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की और खीची जाने वाली काल्पनिक रेखा है. ये रेखाए समानांतर नहीं होती है. ये रेखाए उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव पर एक बिंदु पर मिल जाती है. ध्रुवों से विषुवत रेखा की और बढ़ने पर देशान्तरों के बीच की दूरी बढती जाती है तथा विषुवत रेखा पर इसके बीच की दूरी अधिकतम 111.32 किमी होती है. ग्रीनविच वेधशाला से गुजरने वाली रेखा को 0 डिग्री देशांतर माना जाता है. इसकी बायीं और की रेखाएँ पश्चिमी और दाहिनी और की रेखाए पूर्वी देशांतर कहलाती है.

देशांतर के आधार पर ही किसी स्थान का समय ज्ञात किया जाता है. दो देशांतर रेखाओ के बीच की दूरी गोरे Gore नाम से जानी जाती है.

शून्य अंश अक्षांश और शून्य अंश देशांतर अटलांटिक महासागर में अवस्थित है.

संक्राति Solstice – सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन की सीमा को संक्रांति कहते है.

कर्क संक्रांति – 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत होता है, इसे कर्क संक्रांति कहते है. इस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन होता है.

मकर संक्रांति – 22 दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा पर लम्बवत होता है. इसे मकर संक्रांति कहते है. इस दिन दक्षिणी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन होता है.

विषुव Equinox – यह पृथ्वी का वह स्थिति है, जब सूर्य की किरणे विषुवत रेखा पर लम्बवत पड़ती है. और सर्वत्र दिन और रात बराबर होते है.

22 सितम्बर और 21 मार्च को सम्पूर्ण पृथ्वी पर दिन और रात बराबर होते है. इसे क्रमश: शरद विषुव और वसंत विषुव कहते है.

 

पृथ्वी का प्रकाश चक्र में सूर्यग्रहण Solar Eclipse

जब कभी दिन के समय सूर्य और पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा के आ जाने से सूर्य की चमकती सतह चन्द्रमा के कारण दिखाई नहीं पड़ने लगती है तो इस स्थिति को सूर्यग्रहण कहते है. जब सूर्य का एक भाग छिप जाता है, तो उसे आंशिक सूर्य ग्रहण और जब पूरा सूर्य ही कुछ क्षणों के लिए छिप जाता है, तो उसे पूर्ण सूर्यग्रहण कहते है. पूर्ण सूर्यग्रहण हमेशा अमावस्या को ही होता है.

 

पृथ्वी का प्रकाश चक्र में चन्द्रग्रहण Lunar Eclipse

जब सूर्य और चन्द्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है, तो सूर्य की पूरी रौशनी चन्द्रमा पर नहीं पड़ती है. इसे चन्द्रग्रहण कहते है. चन्द्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात्रि में ही होता है. प्रत्येक पूर्णिमा को चन्द्रग्रहण नहीं होता है क्योकि चन्द्रमा और पृथ्वी के कक्षा पथ Orbit Path में 5 डिग्री का अंतर होता है जिसके कारण चन्द्रमा कभी पृथ्वी के ऊपर से या नीचे से गुजर जाता है. एक वर्ष में अधिकतम तीन बार चन्द्रग्रहण भी आंशिक अथवा पूर्ण हो सकता है.

पृथ्वी का प्रकाश चक्र Earth Light Cycle

पृथ्वी का प्रकाश चक्र Earth Light Cycle

पृथ्वी का प्रकाश चक्र में समय का निर्धारण

एक देशांतर का अंतर होने पर समय में चार मिनिट का अंतर होता है चूँकि पृथ्वी पश्चिम से पूरब की और घूमती है. फलत: पूरब की और बढ़ने पर प्रत्येक देशांतर पर समय चार मिनट बढ़ता जाता है. तथा पश्चिम जाने पर प्रत्येक देशांतर पर समय चार मिनट घटता जाता है.

 

पृथ्वी का प्रकाश चक्र में अंतर राष्ट्रीय तिथि रेखा

180 डिग्री देशांतर को अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा कहते है. 1884 ई में वाशिंगटन में सम्पन्न इन्टरनेशनल मेरिडियन कांफ्रेंस में 180 वे याम्योत्तर को अन्तराष्ट्रीय तिथि रेखा निर्धारित किया गया है. ऐसा इसलिए किया गया ताकि विभिन्न देशो के मध्य यात्रियों को कुछ स्थानों पर एक दिन का अंतर होने के कारण परेशानी न हो. अंतराष्ट्रीय रेखा आर्कटिक सागर, चुकी सागर, बेरिंग स्ट्रेट व प्रशांत महासागर से गुजरती है. ग्रीनविच मेरिडियन से गणना करते हुए इस रेखा के पूर्व वाले क्षेत्र एक दिन आगे होंगे या दूसरे शब्दों में इस रेखा से पश्चिम वाले क्षेत्रो से 12 घंटे पीछे चल रहा होता है. जैसे सोमवार के बाद रविवार आना. परन्तु यदि जलयान पूर्व की यात्रा करते हुए तिथि रेखा को पार करता है तो एक दिन का लाभ होता है, जैसे यदि वह सोमवार को यात्रा प्रारम्भ करता है तो तिथि रेखा पार करने पर नए क्षेत्र में बुधवार का दिन उसे प्राप्त होगा. बेरिंग जलसन्धि अन्तराष्ट्रीय तिथि रेखा के समानांतर स्थित है.

 

पृथ्वी का प्रकाश चक्र में समय जोन व मानक समय

विश्व को 24 समय जोनो में विभाजित किया गया है. इन समय जोनो को ग्रीनविच मीन टाइम व मानक समय में एक घंटे के अन्तराल के आधार पर विभाजित किया गया है. अर्थात प्रत्येक जोन 15 डिग्री के बराबर होता है. ग्रीनविच याम्योत्तर 0 डिग्री देशांतर पर है जो कि ग्रीनलैंड व नार्वोनियन सागर व ब्रिटेन, स्पेन, अल्जीरिया, फ्रांस, माले, बुर्किनाफासो, घाना व दक्षिण अटलांटिक समुद्र में गुजरता है. प्रत्येक देश का मानक समय ग्रीनविच मीन टाइम से आधा घंटे के गुणक के अंतर पर निर्धारित किया जाता है. मानक समय स्वेच्छा से चयनित याम्योत्तर का स्थानीय समय होता है जो एक विशिष्ट क्षेत्र या देश के लिए मानक समय निर्धारित करता है. अत: जब ग्रीनविच में दोपहर के 12 बजे हो तो उस समय भारत में शाम के 5*1/2 बजेंगे.

 

विषुवत रेखा Equator – पृथ्वी की मध्य सतह से होकर जाने वाली वह अक्षांश रेखा है जो उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से बराबर दूरी पर होती है. यह शून्य अंश का अक्षांश रेखा है. विषुवत रेखा के उत्तरी भाग को उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी भाग को दक्षिणी गौलार्द्ध कहते है.

 

कटिबंध Zone – प्रत्येक गोलार्द्ध को ताप के आधार पर कई भागों में बाटा गया है. इन भागो को कटिबंध कहते है. यह निम्न है –

 

उष्ण कटिबंध Tropical Zone – विषुवत रेखा से 30 डिग्री उत्तर और 30 डिग्री दक्षिण का भाग. यहाँ वर्ष में दो बार सूर्य शीर्ष पर चमकता है. इस भाग का मौसम सदेव गर्म रहता है.

 

उपोष्ण कटिबंध Sub Tropical Zone – 30 डिग्री से 45 डिग्री उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशो के बीच स्थित क्षेत्र जहाँ कुछ महीने ताप अधिक और कुछ महीने ताप कम रहता है.

 

शीतोष्ण कटिबंध Temperate Zone – 45 डिग्री से 66 डिग्री उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशो के बीच का क्षेत्र. यहाँ सूर्य सिर के ऊपर कभी नहीं चमकता है, बल्कि उसकी किरणें तिरछी होती है. अत: यहाँ ताप हमेशा कम रहता है.

 

ध्रुवीय कटिबंध Polar Zone – 66 डिग्री से 90 डिग्री के मध्य स्थित क्षेत्र जहाँ ताप अत्यंत की कम रहता है, जिसके फलस्वरूप वहाँ हमेशा बर्फ जमी रहती है.

indiahindiblog

India Hindi Blog हिंदी भाषी लोगो के लिए बनाया गया है, ये भारत के उन सभी लोगो के लिए है जो खुद ऑनलाइन पढ़ना चाहते है, अपने ज्ञान को बढाना चाहते है. हर तरह की जानकारियों से अपने आपको अपडेट रखना चाहते है. इसलिए हमारे द्वारा इस ब्लॉग को आपके लिए तैयार किया गया. आप इस ब्लॉग में सभी तरह की जानकारियों का ज्ञान ले सकते है. इस ब्लॉग में आपको चिकित्सा, टेक्नोलॉजी, खेल, सामान्य ज्ञान, इतिहास, अनमोल विचार, इन सभी का संग्रह आपके लिए यहाँ पर उपलब्ध है.

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *