पैर क्यों छूटे है Touch Feet


भारत के लोगों में चरण स्पर्श का महत्व – Touch Feet

भारतीय आचार परम्परा में विशेष चरण स्पर्श को महत्व (Touch Feet) दिया जाता है. पूजा पाठ प्रारम्भ करने से पूर्व किसी शुभ कार्य को करने से पूर्व युद्ध या मोर्चे पर जाने के पूर्व किसी भी प्रकार की परीक्षा की घडी के पूर्व हमारा मस्तक शुभाशीष प्राप्त करने के लिए बुजुर्गो, गुरु, माता पिता आदि के समक्ष झुक जाता है.




भारत संस्कारों का देश है भारतीय संस्कृति का गौरव कहे जाने वाले संस्कारों के बिना उत्तम समाज, आदर्श परिवार शक्तिशाली राष्ट्र की काल्पन असम्भव है. जीवन के विकास तथा समाज को सुसंस्कृत बनाने में संस्कारों का बहुत महत्व है. न केवल मानुष का शरीर अपितु उसकी बुद्धि, भावना और आत्मा संस्कारों से ही प्रमाणित होती है. देश में सभ्यता का निर्माण भी संस्कारों से ही होता है और इन्ही संस्कारों में सर्वोत्कृष्ट संस्कार है चरण स्पर्श का महत्व.

चरण स्पर्श का महत्व पैर क्यों छूटे है Touch Feet

चरण स्पर्श का महत्व पैर क्यों छूटे है Touch Feet

प्रात: काल उठने से लेकर राशि शय्या पर जाने तक हम भारतीय दिन में कई बार झुककर चरण स्पर्श Touch Feet कर आशीर्वाद रूपी फल अपने बड़ों माता पिता, गुरु एवं ज्ञान वृहद लोगों से नित्य लेने का प्रयास करते है. एक तरह से आदर पूर्वक हम अपने बड़ों के प्रति सम्मान व्यक्त करते है. उनकी श्रेष्ठता के प्रति नत मस्तक होते है एवं उन्हें आदरांजली देकर अपने आपको धन्य समझते है. इस संस्कार से आयु, विघा, यश और शक्ति बढती है.

  • कहा गया है
  • अभिवादन शीलस्य नित्यं व्रिद्धोपसेविन:
  • चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयु

भारतीय आचार परम्परा में चरण स्पर्श Touch Feet को विशेष महत्व दिया जाता है.

पूजा पाठ प्रारम्भ करने से पूर्व, किसी सुभ कार्य को करने से पूर्व युद्ध या मोर्चे पर जाने के पूर्व किसी भी प्रकार की परीक्षा की घड़ी के पूर्व हमारा मस्तक शुभाशीष प्राप्त करने के लिए बुजुर्गो, गुरु, माता पिता आदि के समक्ष झुक जाता है.

 

चरण स्पर्श से मन में निर्मलता आती है. तपस्वी, त्यागी, सन्यासी, महात्मा के चरण स्पर्श Touch Feet से आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है.

मानव शरीर पंचभूतों से उत्पन्न हुआ है, जिनमे आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी होती है. हमारे ज्ञानेन्द्रिय नेत्र का सम्बन्ध अपनी विशेष कर्मेन्द्रिय चरणों से है. गति का प्रमुख साधन चरण है. नेत्र हमें श्रेष्ठता का भान कराते है, स्पर्श उस तेज को पुरे शरीर में प्रविष्ठ करता है, यही चरण भी कह सकते है. कि चरण स्पर्श का वैज्ञानिक दृष्टीकोण भी यही है. तभी तो हमारी संस्कृति में विद्वानों ने इसकी उपयोगिता मानी है. कवि सूरदासजी के दोहे की पंक्ति से इसकी स्पष्ट झलक दिखाई देती है जैसे

 

चरण कमल वंदो हरिराई

आज मानव अपने आपको कितना भी आधुनिक मान ले परन्तु चरण स्पर्श Touch Feet की परम्परा का निर्वाह वह बखूबी निभा रहा है. उसकी प्रतिष्ठा का कद चाहे जितना बड़ा हो, एश्वर्य या दौलत का परिमाण व्यापक और अतुलनीय हो परन्तु जीवन और व्यवहार में उसकी मनोवृति इस चरण स्पर्श संस्कार को पूर्ण रूप से स्वीकारती है. परन्तु क्या जिस विधान से उसे चरण स्पर्श करना चाहिए वह कर रहा है?

क्या थोडा सा झुककर हाथों का चरणों की और इशारा मात्र करना ही चरण स्पर्श है, क्या यही स्वस्थ परम्परा है? कदापि नहीं वास्तविक विधान यह है कि चरणों पर मस्तक रखकर चरण छूना यानी कि चरण छूने वाला किसी भी सम्मानीय व्यक्ति के दौनो चरणों पर मस्तक रखता है एवं दौनो हाथों से न चरणों का स्पर्श एक साथ करता है.

दाहिने हाथ से दाहिना चरण और बाएं हाथ से बाया चरण स्पर्श करना चाहिए. इस प्रक्रिया से सम्मानीय व्यक्ति से आत्मतेज की बिजली चरणस्पर्श करने वाले व्यक्ति में प्रवेश कर जाती है. उस क्रांति और ओज से उस व्यक्ति को विघा, यश और आयु बढ़ने का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

 

बड़ों के आशीर्वाद से ही हर प्रकार की उन्नति सम्भव है

यही कारण है कि भारतीय परिवारों के बाल्यकाल से ही प्रात: काल उठने पर गुरुजनों वृद्धों श्रद्धेय तस्वीरों के चरण स्पर्श करने की शिक्षा दी जाती है. हमारे भारतीय संस्कारों के कारण ही आज सम्पूर्ण विश्व हमारी परम्पराओं की और उन्मुख हो रहा है. पक्षी, आकाश में चाहे कितनी भी उड़ान भर लेकिन उसे जमींन पर ही उतरना पड़ेंगा.

मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारी युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता का कितना भी अन्धानुकरण कर हमारी भारतीय परम्पराओं और संस्कारों को अनदेखा करें लेकिन उन्हें अंत में उन्हें बुजुर्गों के आशीर्वाद छाव में ही ठंडक एवं शांति प्राप्त होगी.  बच्चो याद रखो हमारे संस्कार हमारी धरोहर है इनकी  महत्ता और इनकी शांति को कभी फीका मत पड़ने देना.

 

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