पौधे रोपने वाला बादशाह


साठ हजार पौधे रोपने वाला बादशाह किंग

पौधे रोपने वाला बादशाह – वन महोत्सव के दिनों में जनता से किसी प्रकार का कर वसूल नहीं किया जाता था. उल्टे उसे मुफ्त खाना और नए कपडे जिससे वह अधिक से अधिक पौधे लगा सके. सावन की पूर्णिमा को इस वन महोत्सव का समापन होता. इस दिन सुल्तान अपनी रानियों और समस्त प्रजाजन के साथ जंगल में पिकनिक मानते जाता. वहाँ नाच गाने के कार्यक्रम होते और झूले डाले जाते. इसके बाद वृक्षारोपण प्रतियोगिता होती. इस प्रतियोगिता में केवल कुँवारी कन्याए भाग लेती और एक घंटे में जो कन्या सबसे अधिक पौधे रोपती, उसे वृक्षों की रानी की पदवी से अलकृत किया जाता और उचित पुरस्कार भी दिया जाता.




पौधे रोपने वाला बादशाह

पौधे रोपने वाला बादशाह

पन्द्रहवी शताब्दी में गुजरात में एक बादशाह हुआ, जिसका नाम सुल्तान महमूद बेगडा था. उसने लगभग ५२ वर्षों तक गुजरात पर शासन किया. वह बेहद वृक्ष प्रेमी था. पन्द्रहवी सदी का गुजरात न केवल उस समय हरा भरा था, बल्कि आज भी उस समय के पेड वहाँ हरियाली बिखेर रहे है. वह पूरी सल्तनत को हरियाली से समृद्ध देखना चाहता था. वह प्रतिवर्ष वन महोत्सव मनाता था. वर्षा के दिनों में होने वाला वृक्ष महोत्सव दो सप्ताह तक चलता. इस दौरान रास्तों के दोनों तरफ खाली पड़ी जमींन पर आम, ईमली, अशोक, पीपल, नीम व चन्दन के पौधे शाही बैंड बाजे की धुनों के साथ शुभ मुहूर्त में लगाये जाते.

 

वन महोत्सव के दिनों में जनता से किसी प्रकार का कर वसूल नहीं किया जाता था.

उल्टे उसे मुफ्त खाना और नए कपडें मिलते, जिससे वह अधिक से अधिक पौधे लगा सके. सावन की पूर्णिमा को इस वन महोत्सव का समापन होता. इस दिन सुल्तान अपनी रानियों और समस्त प्रजाजन के साथ जंगल में पिकनिक मनाने जाता. वहाँ नाच गाने के कार्यक्रम होते और झूले डाले जाते. इसके बाद वृक्षारोपण प्रतियोगिता होती. इस प्रतियोगिता में केवल कुँवारी कन्याये भाग लेती और एक घंटे में जो कन्या सबसे अधिक पौधे रोपती उसे वृक्षों की रानी की पदवी से अलंकृत किया जाता और उचित पुरस्कार भी दिया जाता.

वृक्षों की सुरक्षा के सम्बंध में सुलतान माली या नौकर चाकरों पर तनिक भी विश्वास नहीं करता था. वह स्वयं पेड लगाता और उनकी देखरेख पर नजर रखता. अपने लम्बे शासनकाल में उसने लगभग ६०००० हजार पेड़ लगाये. खुद पेड लगाने के साथ  वह पेड़ लगाने वालों को भी प्रोत्साहित करता और ईनाम देता.

पौधे रोपने वाला बादशाह

पौधे रोपने वाला बादशाह

ज्ञातव्य है कि गुजरात में फिरदौस और शअबान बाग़ इसी वृक्ष प्रेमी और प्रकृति प्रेमी सुल्तान की देन है. स्वामी रामानंद सरस्वती अपनी पुस्तक झूठा संसार के प्रष्ठ १८२ पर लिखते है. आप अपने बच्चे पैदा करने का मोह अधिक से अधिक पेड पौधे उगाकर पूरा कीजिये. आप प्रतीक्षा कीजिये कि आप आने जीवन में कम से कम दो चार पेड लगाकर उन्हें अवश्य ही बड़ा करेंगे.

बच्चे बड़े होकर आपके साथ विश्वासघात कर सकते है. आपको सता भी सकते है, आपकी हत्या भी कर सकते है. आपको इस तरीके से दुखी भी कर सकते है, लेकिन आपके द्वारा लगाये पेड़ पौधे हमेशा आपके प्रति वफादार रहेंगे. आपको हर वर्ष अपनी शक्ति व हस्ती के अनुसार फल और फूल भी देंगे. ठंडी व शीतल छाया आपको प्रदान करेंगे. मौसम की बदलती हुई आखों से वे आपके घर व आँगन की रक्षा करेंगे.

 

अगर आप किसी किराये के मकान में या फ्लेट में भी रहते हो, तो भी आप उसकी निचली मंजिल में बखूबी पेड़ पौधे लगा सकते है. ऊपरी मंजिल पर गमलों आदि में खूब पेड़ पौधे लगाये जा सकते है, सब्जिया भी बोई जा सकती है और फूल भी लगाये जा सकते है. आज ही सड़कों पर, धर्मशालाओं में पार्कों में सार्वजानिक रास्तों, स्कूलों में, अस्पतालों, मरघटों में, खूब पेड़-पौधे लगाइए और सच्चा सूख और सच्ची शांति पाइए और हमेशा गुनगुनाते रहिये. जन-जन की है यही पुकार, बच्चे दो और पेड़ हजार.

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