बुढ़िया और साहसी राजा की कहानी


बुढ़िया की सलाह

बुढ़िया  की जुबानी – बहुत समय पहले की बात है. राजस्थान में एक राजा राज्य करता था. प्रजा अपने राजा को बहुत पसंद करती थी. क्यों की वह दयालु और साहसी था. उसका खजाना धन से भरा हुआ था. राजा के पास अपार धन था, लेकिन वह फिर भी खुश नहीं था उसके दुःख का कारण पडोसी राज्य था. जो अक्सर उसके राज्य पर आक्रमण कर देता था. इस तरह जानमाल का भारी नुकसान होता था.




बुढ़िया और साहसी राजा की कहानी

बुढ़िया और साहसी राजा की कहानी

प्रजा राजा के पास विनती करती महाराज कुछ कीजिये इस तरह तो हम बर्बाद हो जायेंगे. राजा ने अपने राज्य के बूढ़े और समझदार लोगों को बुलाया और कहाँ मैं चाहता हूँ कि आप लोग ऐसा सुझाव दें, जिससे पड़ोसी राज्य द्वारा किया जाने वाला हमला हमेशा के लिए ख़त्म हो जाए और प्रजा सुखी रहे. जब कभी भी पडोसी राज्य पर कोई हमला करता है, तो हमारे सेनिक बहादुरी से लड़ते है. लेकिन दुश्मन हम पर हमला करके आसानी से भाग निकलता है.

 

सभा में मौजद सभी लोगों ने आपस में सलाह मशवरा किया. फिर एक बूढ़े ने राजा से कहाँ हमें पडोसी राज्य पर हमला करना चाहिए और उसे जीत लेना चाहिए. केवल यही एक रास्ता है. हमें दुश्मन के हमले का इन्तजार करना चाहिए.

 

राजा को सुझाव बहुत पसंद आया और उसने सेना को युद्ध की तैयारी का आदेश दिया. एक दिन राजा की अगुआई में फौज ने पडोंस के राजा की राजधानी पर हमला कर दिया. राजधानी राज्य के बीचो बीच थी. राजा की फौज बहादुरी से लड़ी, पर पड़ोसी राज्य के सेनिकों ने उन्हें हरा दिया. सेना के भाग खड़े होने पर राजा अकेला रह गया. उसने किसी तरह रेगिस्तान में छिपकर अपनी जान बचाई. कई दिनों तक राजा रेगिस्तान में इधर उधर भटकता रहा. दूर दूर तक उसे कोई बस्ती नजर नहीं आई. वह भूख और प्यास से तड़पता रहा. अंत में उसे एक झोपड़ी दिखाई दी. राजा उस झोपड़ी में गया. जहाँ एक बुढ़ियां बेठी दिखाई दी. राजा ने जो कि एक साधारण सैनिक की तरह दिखा रहा था, बुढ़िया से खाने के लिए कुछ माँगा. बुढ़ियां ने राजा को चटाई पर बैठ जाने को कहा. राजा थका हुआ था. इसलिए तुरंत बैठ गया, उसे झोपड़ी उस समय महल से भी ज्यादा सुन्दर दिखी रही थी. बुढ़िया चावल पकाकर ले आई, राजा इतना भूखा था कि वह एकदम से खाने पर टूट पड़ा. चावल बहुत गर्म थे. इसलिए राजा की उँगलियाँ जल गई. वह दर्द से चिल्ला उठा. ओह मेरी उँगलियाँ जल गई. बुढ़िया राजा की और देखकर जोर से हँस पड़ी, अम्मा तुम क्यों हँस रही हो? राजा ने गस्से में पूछा.

 

बुढ़िया ने उत्तर दिया, मैं तुम्हारी मुर्खता पर हँस रही हूँ . ऐसा ही मुर्खता हमारे राजा ने भी की थी.  क्या मतलब? राजा ने कहाँ.

 

बेटा जानते हो? हमारा राजा क्यों हारा? इधर देखो और मेरी बात सुनो, वह इसलिए हारा क्योकि वह अपने सेनिको को सीधे दुश्मन की राजधानी में ले गया. राजधानी होने के कारण वहाँ शत्रु के पहले हमला करता और धीरे धीरे आगे बढ़ता तो हार न होती. राजा ने भी तुम्हारी तरह अपनी उँगलियाँ जला ली थी. तुम्हें पहले बाहर की और के चावल खाने चाहिए थे, क्योकि वे कम गरम थे. फिर धीरे धीरे बीच के चावल खाने थे. अब समझ गए न कि तुम्हारा चावल खाने में और हमारे राजा के बीच में क्या सम्बंध है?

 

राजा बुढ़ियां की बात सुनकर हैरान रह गई. वह अपने महल में वापस आ गए. उसने बुढ़िया की सलाह के अनुसार दोबारा पड़ोसी राज्य पर हमला किया और उसे जीत लिया.

 

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