मित्र कैसे होना चाहिए


How Should Be Friends हमारे जीवन काल में मित्र कैसे होना चाहिए ?

दोस्त या मित्र का महत्व अलग ही होता है. सगे रिश्तेदारों से भी कुछ अधिक महत्वपूर्ण मित्र का स्थान होता है. मित्र के अभाव में व्यक्ति का जीवन एकांकी उदास, रुखा-रुखा और नेराश्यपूर्ण हो जाता है. मित्र कैसे होना चाहिए, वैसे तो हमारे अनेक मित्र होते है. इनकी संख्या जब-तब बढती घटती रहती है. किन्ही के रहने, नहीं रहने से हमें कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता. लेकिन सच्चे मित्र की तो बात ही और होती है. सच्चा मित्र चुनना पड़ता है. वह तो अनेक में से एक होता है. क्या मित्र का भी चुनाव होता है? आप यही प्रश्न पूछना चाह रहे हो न? तो पाठकों उत्तर है, जी हाँ मित्र को सावधानीपूर्वक, कसोटियों पर कसकर फेसला करना चाहिए. यूँ ही किसी ने भी मित्रता नहीं कर लेनी चाहिए. नहीं तो आपको यह जल्दबाजी का निर्णय बहुत भारी पड़ सकता है.




मित्र कैसे होना चाहिए , सही दोस्त की भूमिका

मित्र कैसे होना चाहिए , सही दोस्त की भूमिका

 

सही दोस्त की भूमिका मित्र कैसे होना चाहिए ?

सच्चा दोस्त हमारा भला चाहता है. वह हमें गलत निर्णय लेने पर सही राह दिखाता है. हमारी आत्मशक्ति को कमजोर पड़ता देख उसे मजबूत बनाने में मदद करता है.  हमारे सम्मुख आई विभिन्न छोटी-मोटी कठिनाइयों का हल खोजने में हमारी सहायता करता है. विलासा देने का कार्य करने से नहीं चूकना. दुखों को कम करने का प्रयत्न करता है, हमारी मदद करने पर बदले में हमसे वैसे ही अपेक्षा नहीं रखता. उसकी हर सहायता निस्वार्थ होती है. अच्छे मित्र के सद्गुण अपने आप ही हमने आ जाते है. अच्छा मित्र हमारी कमियों की स्वस्थ आलोचना कर, प्यार से इन कमियों से होने वाली हानियों से आगाह करता है.

विनम्रता का व्यवहार करना, गुरुजनों का आदर सम्मान करना, दूसरों की सहायता करना, मित्र कैसे होना चाहिए? आपस में सच्चा दोस्त हमारा भला चाहता है. वह हमें गलत निर्णय लेने पर सही राह दिखाता है. हमारी आत्मशक्ति को कमजोर पड़ता देख मजबूत बनाने में मदद करता है. हमारे सम्मुख आई विभिन्न छोटी-मोटी कठिनाइयों का हल खोजने में हमारी सहायता करता है, दिलासा देने का कार्य करने से नहीं चूकना दुखों को कम करने का प्रयत्न करता है.

मिल जुलकर रहना, शिष्ट शब्दावली का प्रयोग करना, दिखावटीपन  से दूर रहना, शुभेच्छा देने की इच्छा रखना तथा दूसरों की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी व्यक्त करना आदि अनेक सद्गुण है, जिन्हें हम किसी अच्छे मित्र द्वारा ही चरितार्थ होते हुए देख सकते है. अत: अच्छे मित्र का चुनाव करने पर इन सब अच्छे प्रभावों में से कुछ तो हमारे हिस्से आयेगा ही.

 

गलत मित्र की भूमिका

इनका प्रभाव भी हमारे जीवन को गहरे रूप से प्रभावित करता है. यह कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी कि दुर्गुणों को हम शीघ्रता से सीखते है, स्थायी रूप से दुर्गुण हमारे में आ जाते है और सद्गुणों को सीखने में बहुत देर लगती है, बड़ी कठिनाई होती है. अच्छी आदतें स्थायी रूप से हमारे स्वभाव में टिकती भी नहीं है. इसके लिए निरंतर प्रयास करना पड़ता है.

गलत मित्रों के कारण अनेक कुटेवों को हम अनजाने सीखते है. उनकी मर्जी से चलते रहो तब तक ठीक, अन्यथा क्रोधित हो जाते है. मित्रता को तोड़ने की बातें करने लगते है.

ऐसे मित्रों के साथ रहने से हम तनावग्रस्त हो सकते है. ऐसे मित्रों का साथ हमें जी का जंजाल लगने लगता है. इन्हें तत्काल छोड़ देना चाहिए. इनसे सम्बंध तोड़ देना चाहिए. इसमें अपने परिवार के सदस्यों की सहायता, गुरुजनों की मदद निसंकोच रूप से लेनी चाहिए. इनके साथ रहने से बुरे मित्रों से छुटकारा मिलने में आसानी हो जाती है. बुरे मित्रो से जितनी जल्दी हो सके उनके चंगुल से मुक्त हो जाना चाहिए.

अन्यथा हमारी मानसिक शांति भंग हो सकती है. सही मित्र के मिलने पर बुरा व्यक्ति सुधर सकता है तथा गलत मित्र सही व्यक्ति को भी बुरा बनाने में सक्षम होता है. किसी ने ठीक ही कहा है. ढेर सारे मुर्ख मित्रों की अपेक्षा विद्वान शत्रु भला होता है, अंत में, मित्र बनाइये जरुर, लेकिन उनके चुनाव में रहिये सावधान.

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3 Responses

  1. Aparna says:

    Nice essay for all students and all for elders

  2. Ashish says:

    Very good essay for the students n parents….

  3. Atul says:

    Its really nice

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