मोटापा खतरनाक है Dangerous Obesity

 

Dangerous Obesity मोटापा

मोटापा किस तरह से बढ़ता है ?

मोटापा क्या खाने से ज्यादा बढ़ता है?

मोटापा घटाने के लिए क्या – क्या करे?




आपने देखा होगा कि बच्चे बचपन में ही गोल मटोल प्यारे से होते है, सभी माता पिता यही चाहते है कि हमारा बच्चा हष्ट पुष्ट रहे. मगर इसी को देखते हुए माता पिता अपने बच्चे की हेल्थ में धीरे – धीरे बढ़ोत्तरी में बच्चे के मोटापे पर ध्यान नहीं देते और जब बच्चे का मोटापा एक चरम में इतना बढ़ जाता है जब वह हद से ज्यादा बढ़ जाता है.

बच्चो में मोटापे का खतरा ? आप बच्चों के मोटापे को  किस तरह से हेंडल कर सकते है. कुछ इन्ही बातों पर आपको गहन तरीके से सोचने की जरुरत है.  किसी भी देश की सरकार का पहला दायित्व है अपने नागरिकों की रक्षा करना. आमतौर पर इसका आशय बाहरी आक्रमण से देश के नागरिकों की रक्षा और सुरक्षा से ही लिया जाता है जबकि उतनी ही गंभीरता से स्वास्थ्य को भी लिया जाना चाहिए.

ऐसा ही एक और खतरा जो वैश्विक रूप से देशों पर मंडरा रहा है, वह बच्चों के मोटापे के लये खतरा बन रहा है. यह एक महामारी की गहराते जाते मोटापे से जो एक पूरी अगली पीढ़ी को तबाह कर सकता है. वर्ल्ड आबेसिटी फेडरेशन की और से पेडियाट्रिक ओबेसिटी के अक्टूबर अंक में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने बताया है कि २०२५ तक बच्चो, किशोरों और वयस्कों के लिए मोटापा के स्तर में वृद्धि को रोकने वाला विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य पूरा होने के आसार नजर नहीं आ रहे है. बल्कि बच्चो में मोटापे की दर और अधिक बढ़ने के संकेत है.

 

यूएस की प्रथम महिला मिशेल ओबामा के लेट्स मूव केम्पेन और बच्चो की कहने की आदतों से तंग अभिभावकों के लिए जेमी ओलिवर की फ़ूड रिवोल्यूशन जैसे उपायों के साथ दुनिया भर के स्वास्थ्य कार्यकर्ता बच्चो में मोटापा कम करने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे है. इन प्रयासों के बावजूद एक नए शोध से पता चलता है कि बचपन में मोटापे वाली महामारी अगले एक दशक में और भी बदत्तर होने ही राह पर है. २०२५ के वर्ष तक इस मामले में सबसे आगे चीन होगा जहाँ मोटे बच्चो की तादाद स्पेन की कुल आबादी को भी पार कर जायेगी.

फिलहाल चीन मोटापे से ग्रस्त बच्चो के लिहाज से विश्व में ८वे स्थान पर है. सबसे आगे वियतनाम सर्बिया और अजरबेजान जैसे कई देश है.

 

ज्यादा गहरा सकती है यह समस्या

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन ने अपनी रिपोर्ट में मोटापे से सम्बंधित ग्लोबल देता का विश्लेषण किया. जिसे ५० देशों के 500 शोधकर्ताओं ने वर्ष २००० से २०१३ तक १८४ देशो से एकत्रित किया था. २०१३ में दुनिया भर से १४.2 फीसदी बच्चे ज्यादा वजन और मोटापे के शिकार थे जो कि वर्ष २००० में १२.८ प्रतिशत थे. फेडरेशन का अनुमान है कि २०५५ तक दुनिया में १५.८ प्रतिशत बच्चे मोटापे से ग्रस्त हो जायेंगे. इसका मतलब है कि ५-१७ आयु वर्ग के कुछ २६.८ करोड़ बच्चे ओवेरवेट जबकि ९.1 करोड़ बच्चे मोटापे के शिकार हो सकते है. मोजूदा रुझान को बदलने में कारगर कोई नीतिगत हस्तक्षेप अगर नहीं किया गया तो समस्या बहुत बड़ी हो सकती है.

 

कई विकासशील देशों में अधिक समस्या

बचपन के मोटापे में सबसे बड़ी वृद्धि विकासशील देशों में अनुमानित की गई है. रिपोर्ट के अनुसार हमने पाया है कि अतिरिक्त वजन के शिकार हर पांच में से चार बच्चे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में है न कि अमीर विकसित देशों में. विश्व स्वास्थ संगठन के नीति निदेशक टॉम लोबस्टेन के अनुसार, पिछली सदी, तक सबसे बड़ी समस्या कुपोषण की थी लेकिन दुनिया भर में जंक फ़ूड का प्रसार और बढ़ते शहरीकरण के साथ अधिक वजन और मोटापे की समस्या तेजी से फैली है. संगठन के अनुसार विकासशील देशो में जहाँ पहले कुपोषण या कम भोजन की समस्या ज्यादा बड़ी मानी जाती थी, वही अब अधिक या अस्वास्थ्यकरण भोजन की समस्या भी उतनी ही तेजी से फैल रही है.

मोटापा Dangerous Obesity

मोटापा Dangerous Obesity

 

इस समस्या के लिए उठाये बड़े कदम

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि २०२५ तक दुनिया भर में मोटापे से ग्रस्त सबसे ज्यादा लगभग ५ करोड़ बच्चे अकेले चीन में होंगे. गौरतलब है कि चीन में वर्ष २००० से २०१३ के बीच मोटापे से पीड़ित बच्चो में 40 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई थी. दूसरे स्थान पर भारत होगा, जहाँ २०२५ तक 1.६७ करोड़ बच्चो के मोटापे से पीड़ित हो जाने का अनुमान है. अमेरिका 1.६७ करोड़, ब्राजील 1.१४ करोड़ और मिस्त्र 1.६ करोड़ जैसे देश क्रमश: तीसरे चौथे और पाचवे स्थान पर हो सकते है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के नीति निर्देशक लोबस्टेन के अनुसार मोटापे की महामारी से निपटने के लिए सरकारे पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है. संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर मोटापा और मधुमेह के बढ़ते प्रसार को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझोते हो चुके है लेकिन जरुरत प्रणालीगत समस्याओं से निपटने के लिए राजनितिक साहस की है. जैसे, खाद्य आपूर्ति का वाणिज्यीकरण कम करना, खतरनाक शहरी वातावरण का विकास, मोटर परिवहन का प्रभुत्व, मोबाइल से लेकर टीवी की स्क्रीन का बढ़ाना.

 

 

कमर के घेरे को बढ़ने से रोके

प्राचीन संस्कृत खाद्य खपत और पश्चिमी भोजन की लोकप्रियता ने चीन और भारत में लोगों की कमर का घेरा बढ़ाने में खासा योगदान दिया है. बच्चो में मोटापे (Dangerous Obesity) की खतरनाक दर के चलते ही भारत जैसे देश में स्कूलों के २०० मीटर दायरे में जंक फ़ूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने जैसी सिफारिश सामने आई है.भारत में जहाँ कभी मोटापे को खाते पीते घर या समृद्ध होने की निशानी माना जाता था वही अब यह धारणा बदल गई है.

 

 

अपने बच्चो को रोगों का घर न बनने दे

स्वास्थ योजनाकारों और सेवा प्रदाताओं को मोटापे का खतरा सम्बंधित बीमारीयों में वृद्धि के लिए तैयार रहने के लिए कहती हुई इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं का अनुमान है कि २०२५ तक 1.२७ और लगभग 40 लाख टाइप 2 डाईबिटिज से ग्रस्त होंगे. इसके अलावा और 2.७ करोड़ बच्चे उच्च रक्तचाप और लगभग 3.८ मिलियन बच्चे यकृत स्टीटोसिस या लिवर रोग से ग्रस्त हो जायेंगे.

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