यूरोपीय कंपनी European Merchant Company


यूरोपीय कंपनी

प्राचीन यूरोपीय कंपनी व्यापार में किस तरह से काम करते थे ?

२० मई 1498 ई में वास्कोडिगामा ने भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट बंदरगाह पहुंचकर भारत और यूरोप के बीच नए समुदी मार्ग की खोज की.

यूरोपीय कंपनी के इतिहास में 1505 ई में फ्रांसिस्को द अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया.



यूरोपीय कंपनी के इतिहास में 1509 ई में अलफांसो द अलबुकर्क भारत में पुर्तगालियों का वायसराय बना.

अलबुकर्क ने 1510 ई में बीजापुर के युसुफ आदिल शाह से गोवा को जीता.

पुर्तगालियों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी कोचीन में खोली.

यूरोपीय कंपनी के इतिहास में 1596 ई में भारत में अंतिम रूप से पतन 1759 ई को अंग्रेजो और डचों के मध्य हुए वेदश युद्ध से हुआ.

31 दिसम्बर 1600 ई को इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ प्रथम से ईस्ट कंपनी को अधिकार पत्र प्रदान किया.

प्रारम्भ में ईस्ट इंडिया कंपनी ने 217 साझीदार थे और पहला गवर्नर टाइम स्मिथ था.

मुगल दरबार में जाने वाला प्रथम अंग्रेज कैप्टन होकीन्स था, जो जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में 1609 ई में जहाँगीर के दरबार में गया था.

1651 ई में सम्राट जेम्स प्रथम ने सर टाइम्स रो को अपना राजदूत बनाकर मुग़ल सम्राट जहाँगीर के दरबार में भेजा.

अंग्रेजी की प्रथम व्यापारिक कोठी सूरत में 1608 ई खोली गई.

1611 ई में दक्षिण पूर्व समुद्रतट पर सर्वप्रथम अंग्रेजों ने मुसली पटटम में व्यापारिक कोठी की स्थापना की.

1668 ई में इंग्लैंड के सम्राट चार्ल्स द्वितीय का विवाह पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन से होने के कारण चार्ल्स को दहेज़ के रूप में बम्बई प्राप्त हुआ था, जिसे उन्होंने दस पौंड के वार्षिक किराये पर ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दिया.

1668 ई में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने तीन गाँव सूतानुती, कालीघाट और गोविन्दपुर की जमीदारी 1200 रुपए भुगतान कर प्राप्त की और यहाँ पर फ़ोर्ट विलियम को निर्माण किया. कालांतर में यही कलकत्ता (कोलकत्ता) नगर कहलाया, जिसकी नींव जार्ज चारनौक ने रखी.

भारत में फ्रांसीसियों की प्रथम कोठी कैरों के द्वारा सूरत में 1668 ई में स्थापित की गई.

1674 ई में फ्रांसिस मार्टिन ने पांडिचेरी की स्थापना की.

प्रथम कर्नाटक युद्ध 1746 – 1748 ई में आस्ट्रिया के उत्तराधिकारी यद्ध से प्रभावित था. 1748 ई में हुई ए-ला-शापल की सन्धि के द्वारा आस्ट्रिया का उत्तराधिकारी युद्ध समाप्त हो गया और इसी संधि के तहत प्रथम कर्नाटक युद्ध समाप्त हुआ.

दूसरा कर्नाटक युद्ध 1749 – 1754 ई में हुआ. इस युद्ध में फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले की हार हुई. उसे वापस बुला लिया गया और उसकी जगह पर गोड़ेहू को भारत में अगला फ्रांसीसी गवर्नर बनाया गया. पांडिचेरी की संधि जनवरी 1755 ई के साथ युद्ध विराम हुआ.

कर्नाटक का तीसरा युद्ध 1756 – 1763 ई के बीच हुआ जो 1756 ई में शुरु हुए सप्तवर्षीय युद्ध का ही एक अंश था.  पेरिस की संधि होने पर यह युद्ध समाप्त हुआ.

1760 ई में अंग्रेजी सेना ने सर आयरकूट के नेतृत्व में वांडिवाश की लड़ाई में फ्रांसीसियों को बुरी तरह हराया.

1761 ई में अंग्रेजों ने पांडिचेरी को फ्रांसीसियों से छीन लिया.

1763 ई में हुई पेरिस संधि के द्वारा अंग्रेजों ने चन्द्रनगर को छौड़कर शेष अन्य प्रदेशो को लौटा दिया, जो 1749 ई तक फ्रांसीसी कब्जे में थे. ये प्रदेश भारत की आजादी तक फ्रांसीसियों के कब्जे में रहे.

यूरोपीय कंपनी

यूरोपीय कंपनी

 

बंगाल में अंग्रेजों का आधिपत्य

मुगल साम्राज्य के अंतर्गत आनेवाले प्रान्तों में बंगाल सर्वाधिक सम्पन्न राज्य था.

प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 ई को अंग्रेजों के सेनापति रॉबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच हुआ. जिसमे नवाब अपने सेनापति मीरजाफर की धोखाधड़ी करने के कारण पराजित हुआ. अंग्रेजों ने मीरजाफर को बंगाल का नवाब बनाया.

क्लाइव के हाथों की कठपुतली नवाब मीरजाफर को अंग्रेजों ने 1760 ई में हटाकर उसके दामाद मीरकासिम को बंगाल का नवाब बनाया.

मीरकासीम ने अपनी राजधानी को मुर्शिदाबाद से मुन्धेर मुगदलपुर स्थानांतरित किया.

बक्सर का युद्ध 1764 ई में अंग्रेजों और मीरकासिम, अवध के नवाब शुजादौला और मुग़ल सम्राट शाहआलम द्वितीय के बीच हुआ. इस युद्ध में भी अंग्रेज विजयी हुए. इस युद्ध में अंग्रेज सेनापति हेक्टर मुनरो था.

बक्सर के युद्ध के बाद एक बार फिर मीरकासिम की जगह मीरजाफर को नावाब बना दिया गया. 5 जनवरी 1765 ई में मीरजाफर की मृत्यु हो गई.

 

 

अंग्रेजों के मैसूर से सम्बंध

1761 ई में हैदर अली मैसूर का शासक बना.

हैदरअली की मृत्यु 1782 ई में द्वितीय आँग्ल मैसूर युद्ध के दौरान हो गई.

हैदरअली का उत्तराधिकारी उसका पुत्र टीपू सुल्तान हुआ.

1787 ई में टीपू  ने अपनी राजधानी श्री रंगपत्तनम में पादशाह की उपाधि धारण की.

टीपू ने अपनी राजधानी श्री रंगपत्तनम में स्वतंत्रता का वृक्ष लगवाया और साथ ही जैकोबिन क्लब का सदस्य बना.

टीपू की मृत्यु चतुर्थ आँग्ल मैसूर युद्ध के दौरान 1799 ई में हो गई.

 

प्रथम युद्ध – प्रथम आँग्ल मैसूर युद्ध

वर्ष – 1767 – 69

 

प्रथम युद्ध – द्वितीय आँग्ल मैसूर युद्ध

वर्ष – 1781 – 84

अंग्रेजी गवर्नर जनरल –  वारेन हेन्स्टिंग

 

प्रथम युद्ध – तृतीय आँग्ल मैसूर युद्ध

वर्ष – 1790 – 92

अंग्रेजी गवर्नर जनरल – कोर्नवालिस

 

प्रथम युद्ध – चतुर्थ आँग्ल मैसूर युद्ध

वर्ष – 1799

अंग्रेजी गवर्नर जनरल – लार्ड वेलेजली

 

 

महत्वपूर्ण सन्धिया

प्रथम आँग्ल मैसूर युद्ध – मद्रास की सन्धि – 1769 ई

द्वितीय आँग्ल मैसूर युद्ध – मंगलूर की संधि – 1784 ई

तृतीय आँग्ल मैसूर युद्ध – श्री रंगपत्तनम की सन्धि – 1792 ई

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