यौन शिक्षा का महत्व Sex Education

स्कूल में यौन शिक्षा का महत्व

सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा) विधार्थियों को १० से १५ वर्ष की उम्र में दी जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थी सही रास्ते पर चल सके. स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ यौन से सम्बंधित शिक्षा भी अनिवार्य दी जानी चाहिए. स्कूलों में यह शिक्षा अनिवार्य की जानी चाहिए, जिससे कि विद्यार्थी इस बातों के बारे में खुल के समझें.




यौन शिक्षा का महत्व Sex Education

यौन शिक्षा का महत्व Sex Education

वर्तमान में विद्यार्थियों की यह दशा हो गई है कि वे कच्ची उम्र में ही बुरी संगति के शिकार हो जाते है. जिसका सबसे बड़ा कारण सिनेमा तथा टी वी में अश्लील फिल्म दृश्य आदि दर्शाए जाते है, जिसके कारण विद्यार्थी के मन में बुरे विचार आते है. यौन सम्बंधी विचार मन में बार-बार आने से वे गलत काम कर बैठते है. विद्यार्थी आवास में ही किसी एक दोस्त जो कि बुरी संगति का है, उससे प्राप्त गलत जानकारी को ही सही समझ बैठते है.

 

सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा) विद्यार्थियों को १० से १५ वर्ष की उम्र में दी जानी चाहिए.

ताकि विद्यार्थी सही रास्ते पर चल सके. स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ यौन से सम्बंधित शिक्षा भी अनिवार्य दी जानी चाहिए. स्कूलों में यह शिक्षा अनिवार्य की जानी चाहिए, जिससे कि विद्यार्थी इन बातों के बारे में खुल के समझे. स्कूलों में विद्यार्थियों को विद्यार्थी जीवन में यह बताया जाए कि इनसे क्या-क्या हानियाँ होती है. उन्हें यह बताया जाए कि एड्स, जैसे संक्रमित रोगों से पूरा भारत देश उलझा हुआ है. एड्स एक टाइम बम के जैसा है, जिसके विषाणु कभी भी फूट सकते है. अगर विद्यार्थी इन सब बातों से अबोध रहेंगे तो उनक भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

विद्यार्थी जब पढाई करते है, तो उस समय पढाई की बजाय उनका ध्यान बुरे खयालातों में खो जाता है. उनके मन में, दिमांग में अश्लील विचार, चित्र आदि आने लगते है और उनका ध्यान पढाई से हटकर दूसरे कामों में अधिक लगने लगता है. सेक्स एजुकेशन के दौरान विद्यार्थियों को इस बात की जानकारी हो जाती है कि प्रजनन तो प्रकृति का नियम है. इसे गलत ढंग से न अपनाये.

इस बात की जानकारी दी जानी चाहिए कि जिस प्रकार सभी अंगों की सफाई की जाती है, उसी प्रकार इन अंगों की विशेष रूप से की जानी चाहिए. यौन सम्बंधित शिक्षा देते समय शिक्षको को खुलकर और अच्छी तरह से बात को समझाना चाहिए. किसी प्रकार की झिझक या शर्म महसूस नहीं करना चाहिए. क्योकि यह तो प्रकृति का नियम है और ये शिक्षा को केवल स्कूल में ही अच्छी तरह से समझाया जा सकता है. इस प्रकार स्कूलों में यौन शिक्षा का बड़ा महत्व है.

 

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