विश्व के देशो की क्रांति Revolution Info

विश्व के देशो की क्रांति

विश्व के देशो की क्रांति में रुसी क्रांति

समाजवाद शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम रॉबर्ट ओवेन ने किया था. वह वेल्स का रहने वाला था.



आदर्शवादी समाजवाद का प्रवक्ता रॉबर्ट ओवेन को माना जाता है.

वैज्ञानिक समाजवाद का संस्थापक कार्ल मार्क्स था. कार्ल मार्क्स जर्मनी का निवासी था.

कार्ल मार्क्स ने दास कैपिटल और कम्यूनिस्ट मैनी फेस्टो नामक पुस्तक लिखी है.

फ्रांसीसी साम्यवाद का जनक सेंट साइमन को माना जाता है.

फेबियन सोशिलिज्म का नेतृत्व जार्ज बर्नाड शा ने किया.

लंदन में फेबियन सोसायटी की स्थापना 1884 ई हुई.

दुनिया के मजदूरों एक हो का नारा कार्ल मार्क्स ने दिया.

रूस के शासक को जार कहा जाता था. यह जारशाही व्यवस्था मार्च 1917 ई में समाप्त हुई.

जार मुक्तिदाता के नाम से अलेक्जेंडर द्वितीय को जाना जाता है.

रूस का अंतिम जार शासक जार निकोलस द्वितीय था.

1917 ई हुई रुसी क्रांति का तात्कालिक कारण प्रथम विश्व युद्ध में रूस की पराजय थी.

सात नवम्बर 1917 ई की वोल्शेविक क्रांति का नेता लेनिन था.

लेनिन ने चेका का संगठन किया था.

लाल सेना का संगठन ट्राटस्की ने किया था.

रूस ने जार शासक अलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या बम विस्फोट में हुई.

एक जार एक चर्च और एक रूस का नारा जार निकोलस द्वितीय ने दिया था.

रूस में सबसे अधिक जनसंख्या स्लाव लोगो की थी.

अन्ना कैरेनिना के लेखक लियो टालस्टाय था.

शून्यवाद का जनक तुर्गनेव को माना जाता है.

रुसी साम्यवाद का जनक प्लेखानोव को माना जाता है.

सोशल डेमोक्रेटिक दल की स्थापना 1903 ई में रूस में हुई.

यह दल दो गुटों में विभाजित था वोल्शेविक और मेन्शेविक.

वोल्शेविक का अर्थ बहुसंख्यक और मेन्शेविक का अर्थ अल्पसंख्यक होता है.

वोल्शेविक दल का नेता लेनिन था.

16 अप्रैल 1917 ई में लेनिन ने रूस में क्रांतिकारी योजना प्रकाशित की, जो अप्रैल वीसिस के नाम से जानी जाती है.

1921 ई में लेनिन ने रूस ने नई आर्थिक नीति लागू की.

आधुनिक रूस का निर्माता स्टालिन को माना जाता है.

लेनिन की मृत्यु 1924 ई में हो गई.

राइट्स ऑफ़ मैन का लेकह्क टॉमस पेन है.

मदर की रचना मैक्सिम गोर्की ने की.

स्थायी क्रांति के सिन्धांत का प्रवर्तक ट्राटस्की था.

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लेनिन का नारा था, युद्ध का अंत करो.

कार्ल मार्क्स का आजीवन साथी रहा फ्रेडरिक एंजेल्स.

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में ओद्योगिक क्रांति

ओद्योगिक क्रांति की शुरुआत इंग्लैंड में हुई, क्योकि इंग्लैंड के पास उपनिवेशों के कारण कच्चे माल और पूंजी की अधिकता थी.

इंग्लैंड में ओद्योगिक क्रांति की शुरुआत सूती कपड़ा उद्योग से हुई.

ओद्योगिक क्रांति के आविष्कार

तेज चलने वाल शटल – जान – 1733 ई

स्पिनिंग जेनी – जेम्स हार ग्रीब्ज – 1765 ई

स्पिनिंग जेनी पानी की शक्ति से चालित – रिचार्ड आर्कराइट – 1767 ई

स्पिनिंग म्युल – क्राम्पटन – 1776 ई

घोड़ा द्वारा चलाये जानेवाला करघा – कार्ट राइट

सेफ्टी लैम्प – हम्फ्री डेवी – 1815 ई

सबसे पहले स्काटलैंड के मैकेडम नामक व्यक्तियों ने पक्की सड़के बनाने की विधि निकाली.

1761 ई में ब्रिंडले नामक इंजीनियर ने मैनचेस्टर से वर्सले तक नहर बनायी.

1814 ई में जार्ज स्टीफेंसन ने रेल द्वारा खानों से बंदरगाहों तक कोयला ले जाने के लिए भाप इंजन का प्रयोग किया.

ओद्योगिक क्रांति की दौड़ में जर्मनी इंग्लैंड का प्रतिद्वन्दी था.

 

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में इंग्लैंड में क्रांति

इंग्लैंड में गृह युद्ध चार्ल्स प्रथम के शासनकाल में 1642 ई में हुआ.

इंग्लैंड में गौरवपूर्ण क्रांति 1688 ई में हुई. उस समय इंग्लैंड का शासक जेम्स द्वितीय था.

सौ वर्षीय युद्ध इंग्लैंड और फ्रांस के बीच हुआ था.

गुलाबों का युद्ध इंग्लैंड में हुआ.

इंग्लैंड के सामन्तों ने राजा जॉन को सन 1215 ई में एक अधिकार पत्र पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया. इस अधिकार पत्र को मैग्नाकार्टा कहा जाता है. यह सर्वसाधारण के अधिकारों का घोषणा पत्र था.

ट्यूडर वंश के शक्तिशाली राजाओ के शासनकाल में संसद उनके हाथो की कठपुतली बनी रही.

एलिजाबेथ प्रथम का सम्बंध ट्यूडर वंश से था.

इंग्लैंड में गृह युद्ध सात वर्षो तक चला.

इंग्लैंड के राजा चार्ल्स प्रथम को फाँसी की सजा दी गई.

गृह युद्ध के दौरान राजा के समर्थकों को कैवेलियर कहा गया था. और संसद के समर्थको को राउंडहेड्स कहा गया.

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में प्रथम विश्वयुद्ध

प्रथम विश्व युद्ध का शुरुआत 28 जुलाई 1914 ई को हुई. यह चार वर्षो तक चला. इसमें 37 देशों ने भाग लिया.

प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण आस्ट्रिया के राजकुमार फडिंनेंड की बोस्निया की राजधानी सेराजेवो में हत्या थी.

प्रथम विश्वयुद्ध में सम्पूर्ण विश्व दो खेमों में बट गया. मित्रराष्ट्र और धुरी राष्ट्र.

धुरी राष्ट्रों का नेतृत्व जर्मनी ने किया. इसमें शामिल अन्य देश थे. आस्ट्रिया, हंगरी और इटली आदि.

मित्रराष्ट्रों में इंग्लैंड, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और फ्रांस शामिल था.

गुप्त संधियों की प्रणाली का जनक बिस्मार्क था.

आस्ट्रिया जर्मनी और इटली के बीच त्रिगुट का निर्माण 1882 ई में हुआ.

सर्बिया की गुप्त क्रन्तिकारी संस्था थी. काला हाथ.

रूस जापान युद्ध1904-1905 ई का अंत अमेरिकी राष्ट्रपति रुजवेल्ट की मध्यस्थता से हुआ.

मोरक्को संकट 1906 ई में पैदा हुआ.

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जर्मनी ने रूस पर आक्रमण एक अगस्त 1914 ई में और फ्रांस पर आक्रमण तीन अगस्त 1914 ई में किया.

आठ अगस्त 1914 को इंग्लैंड प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ.

26 अप्रैल 1915 ई को इटली मित्र राष्ट्रों की और से प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ.

प्रथम विश्वयुद्ध के समय अम्रेरिका का राष्ट्रपति वुडरो विल्सन था.

अमेरिका छह अप्रैल 1917 ई को प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ.

जर्मनी के यू बोट द्वारा इंग्लैंड के लूसीतानिया नामक जहाज को डुबाने के बाद अमेरिका पथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ, क्योकि उस जहाज पर मरनेवाले 1153 व्यक्तियों में 128 व्यक्ति अमेरिकी थे.

प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति ग्यारह नवम्बर 1918 ई को हुई.

18 जून 1919 ई को पेरिस शांति सम्मेलन हुआ, जिसमे 27 देश भाग ले रहे थे. शांति संधियों की शर्ते केवल तीन देश, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका तय कर रहे थे.

पेरिस शांति सम्मेलन में शांति संधियों की शर्ते निर्धारित करने में जिन राष्ट्राध्यक्षो ने मुख्य भूमिका निभाई, वे थे, अम्रेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लायड जार्ज और फ्रांस के प्रधानमंत्री जार्ज क्लेमेसो.

वर्साय की संधि 28 जून 1919 ई को जर्मनी के साथ हुई.

युद्ध के हर्जाने के रूप में जर्मनी से छह अरब 50 करोड़ पौंड की राशि की माँग की गई.

अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रथम विश्व युद्ध का सबसे बड़ा योगदान राष्ट्रसंघ की स्थापना थी.

पथम विश्व युद्ध के दौरान होने वाली वर्साय की संधि में द्वितीय विश्व युद्ध का बीजारोपण हुआ.

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में चीनी क्रांति

मंचू राजवंश का पतन 1911 ई में हुआ.

1911 ई में हुई चीनी क्रांति का नायक सनयात सेन था.

1905 ई में सनयात सेन ने तुंग मेंग दल की स्थापना की, जिसका उद्देश्य चीन में मंचू वंश के शासन को समाप्त करना था.

क्रांतिकारियों ने 29 दिसम्बर 1911 ई में सनयात सेन को अपनी सरकार का अध्यक्ष चुना.

कोविनेड लीग सोसायटी का संस्थापक सनयात सेन था.

1911 ई की क्रांति के समर्थन में सनयात सेन ने अपना नेतृत्व वापस ले लिया.

युआन शीह काई के समर्थन ने सनयात सेन ने अपना नेतृत्व वापस ले लिया.

1912 ई में सनयात सेन ने कुओमिनतांग पार्टी की स्थापना की. इस पार्टी के पुनर्गठन के लिए सेन के माइकेल बोरोदीन को आमंत्रित किया.

डॉ. सनयात सेन ने अपनी सेना के संगठन के लिए जनरल गैलेन को चुना.

डॉ. सेन के तीन सिन्धांत थे, राष्ट्रवाद, लोकतंत्रवाद और सामाजिक न्याय.

डॉ. सनयात सेन को चीन का राष्ट्रपिता कहा जाता है.

डॉ सनयात सेन की मृत्यु 1925 ई में हो गई.

डॉ. सनयात सेन की मृत्यु के बाद च्यांग काई शेक ने 1926 ई में कुओमिन्तांग पार्टी का नेतृत्व सम्भाला.

1927 ई में कुओमिन्तांग पार्टी से साम्यवादी लोग अलग हुए.

चीन ने गृह युद्ध 1928 ई में शुरू हुआ.

1925 ई को हुनान के विशाल किसान आन्दोलन का नेतृत्व माओत्से तुंग ने किया.

माओत्से तुंग का जन्म 1893 ई हुनान में हुआ था.

च्यांग काई शेक ने केन्द्रीय सरकार की सत्ता नानकिंग में सम्भाली.

च्यांग काई शेख ने अपनी सरकार की स्थापना फारमोसा में की.

साम्यवादियों के दमन करने के लिए च्यांग काई शेख ने ब्लूशर्ट आतंकवादीदल का गठन किया.

माओत्से तुंग के नेतृत्व में एक अक्टूबर 1949 ई जनवादी गणराज्य की स्थापना चीन में की गई.

चीनी साम्यवादी गणतंत्र का प्रथम अध्यक्ष माओत्से तुंग था.

चीनी जनवादी गणराज्य का प्रथम प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई था.

खुले द्वार की नीति का प्रतिपादक जान हे था.

चीन एशिया का मरीज के नाम से जाना गया.

चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना 1921 ई में हुई थी.

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में तुर्की क्रांति

तुर्की को यूरोप का मरीज कहा जाता था.

पान इस्लामिज्म का नारा अब्दुल हमीद द्वितीय ने दिया था.

युवा तुर्क आन्दोलन की शुरुआत अब्दुल हमीद द्वितीय के शासनकाल में 1908 ई में हुई.

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद तुर्की के साथ भीषण अपमानजनक संधि सेब्र की संधि दस अगस्त 1920 ई को की गई. मुस्तफा कमालपाशा ने इसे मानने से इंकार कर दिया.

आधुनिक तुर्की का निर्माता मुस्तफा कमाल पाशा को माना जाता है, इसके अतातुर्क (तुर्की के पिता) के उपनाम से भी जाना जाता है.

मुस्तफा कमाल पाशा का जन्म 1891 ई में सेलेनिका में हुआ था.

तुर्की में एकता और प्रगति समिति के प्रभाव में आया.

एक सेनापति के रूप में कमाल पाशा ने गल्लीपोती युद्ध ने शानदार सफलता हासिल की इसके बाद 1919 ई में कमाल पाशा ने सैनिक पद से इस्तीफा दे दिया.

1919 ई के अखिल तुर्क कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता मुस्तफा कमाल पाशा ने की.

1923 ई में तुर्की और यूनान के बीच में लोजान की संधि हुई.

23 अक्टूबर 1923 ई को तुर्की गणतंत्र की घोषणा हुई.

कमाल पाशा ने तुर्की में तीन मार्च 1929 ई को खिलाफत को समाप्त कर दिया.

बीस अप्रैल 1924 ई को तुर्की ने नए संविधान की घोषणा हुई.

तुर्की के नए गणतंत्र का राष्ट्रपति मुस्तफा कमाल पाशा हुआ.

रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी का संस्थापक मुस्तफा कमाल पाशा था.

विश्व के देशो की क्रांति

विश्व के देशो की क्रांति

मुस्तफा कमाल पाशा द्वारा किये गए महत्वपूर्ण कार्य निम्न है.

पहला – 1932 ई में तुर्की भाषा परिषद् की स्थापना

दूसरा – 1933 ई तुर्की में प्रथम पंचवर्षीय योजना का लागू होना

तीसरा – 1924 ई में तुर्की को धर्मनिरपेक्ष राज्य की घोषणा

चौथा – इस्ताम्बुल में एक मेडिकल कालेज की स्थापना

पाँचवा – ग्रिगोरियन कैलेन्डर का प्रचलन 26 दिसम्बर 1925 ई से लागू.

 

इस्ताम्बुल का पुराना नाम कुस्तुनतुनिया था.

25 नवम्बर 1925 ई को तुर्की में टोपी और औरतों को बुरका पहनने पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया.

कमाल पाशा की मृत्यु 1938 ई में हो गई.

 

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में इटली में फासिस्टों का उदय

फासिज्म का उदय सर्वप्रथम इटली में हुआ. इसका जन्मदाता मुसोलिनी को माना जाता है.

मुसोलिनी का जन्म 1883 ई में रोमाग्ना में हुआ था.

मुसोलिनी के दल का नाम फासिस्टवाद था, इसकी स्थापना मिलान में की गई थी.

ड्यूस के नाम से मुसोलिनी को पुकारा जाता था.

फासीवादी राष्ट्रवाद का समर्थन करते थे.

फासीवादी दल के स्वयंसेवक काली कमीज पहनते थे.

मुसोलिनी ने डियाज को सेना का अधिकारी नियुक्त किया.

मुसोलिनी द्वारा बनाये गए निगमों की संख्या 22 थी.

राष्ट्रीय निगम परिषद् का अध्यक्ष मुसोलिनी था, जिसकी सदस्यों की संख्या 500 थी.

ग्रैंड कौंसिल ऑफ़ फासिस्ट पार्टी के सदस्यों की संख्या 25 थी.

मुसोलिनी ने अक्टूबर 1922 ई में रोम पर और 1935 ई में अबीसीनिया पर आक्रमण किया.

जापान और जर्मनी के साथ मुसोलिनी ने रोम बर्लिन टोकियों धुरी का निर्माण 1936 ई में किया.

मुसोलिनी ने 10 जून 1939 ई को द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मित्रराष्ट्रों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की.

इटली में फासीवाद का अंत 28 अप्रैल 1945 ई को माना जाता है.

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में जर्मनी में नाजीवाद का उदय

जर्मनी में नाजी दल का उत्थान हिटलर के नेतृत्व में हुआ.

हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 ई को वान में हुआ था.

जर्मन सम्राट केंसर विलियम द्वितीय ने 10  नवम्बर 1918 ई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

1920 ई में हिटलर ने नेशनल सोशलिस्ट पार्टी या नाजी दल की स्थापना की.

जर्मन वर्क्स पार्टी का संस्थापक हिटलर था.

1933 ई में हिटलर जर्मनी का प्रधानमंत्री बना. उस समय राष्ट्रपति हिण्डेनवर्ग था.

एक राष्ट्र एक नेता का नारा हिटलर ने दिया.

हिटलर की आत्मकथा का नाम MY Kemf मेरा संघर्ष है.

नाजी दल का प्रचार कार्य गोयबल्स सम्भालता था.

जर्मन सुरक्षा परिषद की स्थापना चार अप्रैल 1933 ई में हुई.

हिटलर ने 16 मार्च 1935 ई में जर्मनी में पुन: शस्त्रीकरण की घोषणा की.

हिटलर ने एक सितम्बर 1939 ई को पोलैंड पर आक्रमण किया.

हिटलर की विस्तारवादी नीति का पहला शिकार आस्ट्रिया हुआ.

एडोल्फ हिटलर के लिए शामी विरोधी नीति का अर्थ था यहूदी विरोधी नीति.

हिटलर ने तीस अप्रैल 1945 ई को आत्महत्या की.

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में  जापानी साम्राज्यवाद

जापान के साम्राज्यवाद का सबसे पहला शिकार चीन हुआ.

1863 ई में एक अमेरिकी नाविक पेरी ने बल प्रयोग कर जापान का द्वार अमेरिकी व्यापार के लिए खोला.

जापान में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत मुतसुहितो ने की.

1872 ई में जापान में सैनिक सेवा अनिवार्य कर दी गई.

1905 ई में जापान ने रूस को हराया.

जापान रूस युद्ध की समाप्ति पांच सितम्बर 1905 को पाटर्समाउथ की संधि के द्वारा हुई.

जापान ने 1931 ई में अपनी साम्राज्यवादी आकांक्षाओ की पूर्ति के लिए मंचूरिया पर आक्रमण किया.

बीस अप्रैल 1933 ई को जापान ने राष्ट्रसंघ की सदस्यता त्याग दी.

पीत आतंक से जापान को सम्बोधित किया जाता था.

द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान ने धुरी राष्ट्र का साथ दिया था.

अमेरिका ने जापान पर पहला अणुबम 6 अगस्त 1945 ई को हिरोशिमा पर गिराया था.

द्वितीय विश्वयुद्ध में दस सितम्बर 1945 ई को जापान ने आत्मसमर्पण किया.

हिरोशिमा और नागासाकी पर अणु बम गिराए जाने के कारण जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध में आत्म समर्पण किया था.

 

 

विश्व के देशो की क्रांति में द्वितीय विश्वयुद्ध

द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत एक सितम्बर 1939 ई को हुई. यह छह वर्षो तक लड़ा गया. इसका अंत दो सितम्बर 1945 ई को हुआ. इसमें 61 देशों ने भाग लिया.

द्वितीय विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण जर्मनी का पोलैंड पर आक्रमण था.

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मन जनरल रोम्मेल का नाम डेजर्ट फॉक्स रखा गया था.

म्यूनिख पैक्ट सितम्बर 1938 ई में सम्पन्न हुआ.

जर्मनी ने वर्साय की संधि का उल्लंघन 1935 ई में किया.

स्पेन में गृह युद्ध 1936 ई में शुरु हुआ.

संयुक्त रूप से इटली और जर्मनी का पहला शिकार स्पेन था.

जर्मनी द्वारा सोवियत संघ पर आक्रमण करने की एक योजना को ओपरेशन बारबोसा कहा गया.

23 अगस्त 1939 ई को जर्मनी रूस आक्रमण समझौते पर हस्ताक्षर हुए. जर्मनी ने रूस पर समझौता उल्लंघन का आरोप लगाकर उस पर जून 1941 ई में आक्रमण कर दिया.

जर्मनी की और से द्वितीय विश्वयुद्ध में दस जून 1940 ई को इटली ने प्रवेश किया.

अमेरिका का द्वितीय विश्वयुद्ध में प्रवेश आठ सितम्बर 1941 ई को इटली ने प्रवेश किया.

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री विस्टन चर्चित और अमेरिका का राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी, रुजवेल्ट था.

इंग्लैंड की शानदार अलगाववाद की नीति का विचारक सेलिसेवरी था.

वर्साय की संधि को आरोपित संधि के नाम से जाना जाता है.

द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी की पराजय का श्रेय रूस को दिया जाता है.

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 ई को जापान पर अणुबम जो 100 मेगावाट का था गिराया.

अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में द्वितीय विश्वयुद्ध का सबसे बड़ा योगदान संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना है.

 

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