साफ सफाई का रखे ध्यान Home Cleanliness


साफ सफाई

त्योहारों के अलावा अपने घर में साफ सफाई बनाये रखे

बारिश निकल जाने के बाद अहसास होता है कि चलो अब कीचड़ भरे जूते-चप्पल घर में आकर गन्दा नहीं करेंगे. सीलन भी कम हो जायेगीं. मक्खी मच्छर और तमाम तरह के कीड़ें मकौड़े और बारिश के कारण होने वाले रोगों से निजात मिलेगी मगर सीलन के कारण दीवारों का पेंट उखड गया है. खिड़की दीवारों के पेंट भी ख़राब हो गए, कुछ की लकड़ी फुल गई है उन्हें भी ठीक कराना है. फिर पितृपक्ष भी अभी-अभी गुजरा है. अपने पुरखों को सबने तरह-तरह से याद किया है. भोजन में उन्हें कौन सी चीजे पसंद थी. इन्हें बनाने का खास ख्याल रखा गया है, जिससे कि कम से कम साल में एक बार उन्हें इस तरह याद किया जा सके. यही पुरखों के प्रति सच्ची श्रदधा है, इसलिए श्राद्ध है लेकिन आम तौर पर पितृपक्ष में कोई नए काम नहीं किये जाते, न ही नई चीजे खरीदी जाती है. यह एक शोक का अवसर माना जाता है.



 

साफ सफाई का समय

पितृपक्ष के बाद नवरात्रि के उत्सव का आ जाना एक तरह से इस शोक को कम करता है. नवरात्रि के बाद फ़ौरन ही तो दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाती है. खरीदारी से पहले और त्योहारों का स्वागत करने के लिए सफाई की तैयारी करनी पड़ती है. तभी तो घर को ठीक से सजाया जा सकता है. बेहतर तो यह है कि पहले तय किया जाए कि सफाई कितनी करनी है.

कहाँ करनी है कब करनी है कई बार ऐसा हो सकता है कि घर के फैले काम, खास तौर से सफाई के काम हमें बहुत डराते है, उन कामों को देखते ही जैसे अपने अन्दर ऊर्जा और शक्ति की कमी महसूस होने लगती है. यदि चाहे तो इसके लिए अपनी काम वाली को अतिरिक्त पैसे देकर या दो तीन दिन के लिए किसी मजदूर की सहायता से भी घर चमकाया जा सकता है.

इसके अलावा घर के हर सदस्य को उसकी सामर्थ्य के अनुसार काम सौपें जा सकते है जैसे कि घर के बुजुर्ग, जो ज्यादा भाग दौड़ नहीं कर सकते, वे उन कामो में मदद कर सकते है जो बैठकर किये जा सके. बच्चो से कहा जा सकता है कि व अपने कमरे, अलमारियों, पढने की मेज की सफाई खुद करे, इस तरह की छौटी- छौटी मद्द् से काम किसी एक पर आकर नहीं पड़ते और देखते-देखते ही पूरे हो जाते है.

जल्दी ही पता चलता है कि जो काम इतना डरा रहे थे, वे तो त्यौहार के आने से कई दिन पहले ही ख़त्म हो गए, बल्कि आप जो भी कर रही है, उसे छोटे कामों में बांटकर करे, जैसे कि अगर अलमारी की सफाई करनी हो तो एक-एक खाने को साफ़ करे या फिर रसोई में एक एक स्लेब की सफाई करे, इससे आप भी नहीं थकेंगी. न काम से बोरियत और डर पैदा होगा कि अरे इतना काम फैला है, कैसे होगा?

 

इसी तरह से अगर शांति चाहिए तो खुलापन भी होना जरुरी है. इसलिए याद रखना चाहिए कि घर सुंदर और अच्छा बहुत अधिक सामान भरकर नहीं दिखता. जिसे ब्रीदिंग स्पेस कहा जाता है, सामान उसे कम करता है. अधिक सामान की अधिक देखभाल करनी पड़ती है.

 

घर की साफ सफाई में खुद करे डिजाइनर

घर की साज-सज्जा को थौडे से हेर-फेर के साथ बदलकर सबकी वाह-वाही लूट सकती है. सोफा, दीवान, मूढे, स्टूल, डाईइंग टेबल, टीवी, टेबल लेम्प आदि की जगह बदलकर नयापन महसूस किया जा सकता है. पर्दे, चादरे, कुशन कवर्स, टेबल मेट्स, कालीन, घर के पायदान, बर्तन,क्रोकरी को साफ़ सुथरा करके और यदि जरुरत हो तो नए खरीदकर घर की रंगत में चार-चाँद लगाये जा सकते है.

साफ सफाई Home Cleanliness Information in Hindi

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ज्यादा साफ सफाई की जगहे

सबसे ज्यादा ध्यान रसोई, बाथरूम और स्टोर पर देना है क्योकि सबसे ज्यादा गंदगी, कूड़ा इन्ही जगहों पर फैलता है. रोजमर्रा के कामों में भी इन्ही जगहों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. देखा गया है कि बाथरूम और स्टोर की सफाई पर बहुत ध्यान दिया जाता है, जबकि स्टोर में हम हर उस चीज को, जो ज्यादा है और भविष्य में कभी काम आएगी, रखते जाते है. गदा बाथरूम और गन्दा किचन हजार बीमारियों का घर बन सकता है. सबसे पहले यह सोचा जाए कि क्या घर में पेंट कराना है? अगर दीवारे साफ़-सुथरी है तो उन्हें झाड़कर ही साफ किया जा सकता है. इसके अलावा पुताई करना भारी परिश्रम का काम है. सारा घर फैल जाता है और मुश्किल से सम्भालने में आता है. इसलिए यह भी सोचना चाहिए कि क्या आपके पास इतना समय है कि पेंट करा सके. अगर आप बाहर काम करती है तो समय की और भी किल्लत हो सकती है.

 

पेंट का रखे ध्यान

अगर पेंट कराना जरुरी है तो उसके बारे में पहले से सोचे और संभव हो तो सबसे पहले रसोई, बाथरूम हो पेंट कराए जिससे कि जल्दी से जल्दी किचन और बाथरूम का सामान सम्भाला जा सके और रसोई में फिर से काम शुरु हो सके. यही नहीं जो सामान फ़ालतू है. खली डब्बे, बोतले बर्तन, पुराने कपड़े, पुराना टूटा फर्नीचर उसका निपटान जरुरी है क्योकि घर से पुराना सामान जाएगा, तभी तो नया आ सकता है.

उसके रखने की जगह बन सकती है. इस पुराने सामान में से बहुत सी चीजे ऐसी है, जिन्हें बेचा जा सकता है. कुछ कपड़े जो अच्छे है, मगर अब उन्हें कोई पहनना नहीं चाहता तो उन्हें किसी ऐसे सामाजिक संगठन को दिया जा सकता है. जो गरीबों के लिए ऐसी चीजे इकट्ठी करते है. पुराने खिलौने भी दूसरों के खेलने के काम आ सकते है, खास तौर से उनके, जिनके पास खिलौने खरीदने के लिए पैसे नहीं होते.

बच्चो की पुरानी किताबे किसी पुस्तकालय को दी जा सकती है, जिससे कि अन्य बच्चे भी उनक लाभ उठा सके या कि किसी बच्चे की मदद की जा सकती है. अपने घर में काम करने वाली, बाइयों, ड्राइवरों को भी उनकी जरुरत की चीजे दी जा सकती है. सच तो यह है कि दूसरों की मदद करके जो आनदं मिलता है, वह और किसी तरह से नहीं मिल सकता. फिर त्यौहार सिर्फ उनके लिए नहीं आते, जो साधन सम्पन्न है. उनके लिए भी आते है, जिनके पास कम साधन है, इस तरह की मदद से वे भी अपने त्योहारों का भरपूर आनंद ले सकते है.

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