स्वच्छ चाँदनी मैथलीशरण गुप्त

क्या ही स्वच्छ चाँदनी है यह है क्या ही निस्तब्ध निशा,

है स्वच्छ सुमंद गंध वह निरानंद है कौन दिशा? – स्वच्छ चाँदनी

बंद नहीं, अब भी चलते है नियति नटी के कार्य कलाप

पर कितने एकांत भाव से कितने शांत और चुपचाप.





सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश श्री मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित पंचवटी से अवतरित है. यहाँ पर कवि ने पंचवटी के रात्रिकालीन सौन्दर्य तथा प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन किया है.

मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित स्वच्छ चाँदनी के बारे में हिंदी भाषा में जानकारी

मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित स्वच्छ चाँदनी के बारे में हिंदी भाषा में जानकारी

व्याख्या – यहाँ पंचवटी में चाँदनी कितनी स्वच्छ तथा निर्मल है, रात कितनी शांत है. स्वच्छ, शीतल, सुगन्धित वायु स्वछंद मंद गति से बह रही है. इस समय पंचवटी की कौन सी दिशा आनंद से रहित है? अर्थात प्रत्येक दिशा में आनंद छाया हुआ है. रात्री में चारों और पूर्ण शांति है. फिर भी प्रकृति रूपी नटी के कार्य अब भी चल रहे है परन्तु उसके ये कार्य पूर्ण शांति के साथ चुपचाप ही चलते है. प्रकृति कभी भी विश्राम नही करती वह चुपचाप अपना काम करती रहती है.

पंचवटी का सारांश

indiahindiblog

India Hindi Blog हिंदी भाषी लोगो के लिए बनाया गया है, ये भारत के उन सभी लोगो के लिए है जो खुद ऑनलाइन पढ़ना चाहते है, अपने ज्ञान को बढाना चाहते है. हर तरह की जानकारियों से अपने आपको अपडेट रखना चाहते है. इसलिए हमारे द्वारा इस ब्लॉग को आपके लिए तैयार किया गया. आप इस ब्लॉग में सभी तरह की जानकारियों का ज्ञान ले सकते है. इस ब्लॉग में आपको चिकित्सा, टेक्नोलॉजी, खेल, सामान्य ज्ञान, इतिहास, अनमोल विचार, इन सभी का संग्रह आपके लिए यहाँ पर उपलब्ध है.

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *