Author: indiahindiblog

व्यक्तित्व विकास की जानकारी 0

व्यक्तित्व विकास की जानकारी

चारित्रिक विकास से ही व्यक्तित्व विकास संभव व्यक्तित्व विकास के कारण व्यक्ति की पूजा होती है और व्यक्तित्व का निर्माण मानवीय तथा चारित्रिक गुणों के कारण होता है. व्यक्तित्व चाहे पारिवारिक हो या सामाजिक बगैर चरित्र शीलता के उसकी न तो विश्वनीयता रहती है और न ही प्रतिष्ठा. चाहे कोई बालक हो या व्यस्क अथवा बुजुर्ग, उसका चरित्र...

Bacche Apni Jimmedari Lena Sikh Gaye Hai 0

Bacche Apni Jimmedari Lena Sikh Gaye Hai

Bacche Apni Jimmedari Lena Sikh Gaye Hai आज के इस युग में बच्चे अपने आप में सेल्फ डिपेंडेंट हो गए है इसी बात को आपके लिए (Bacche Apni Jimmedari Lena Sikh Gaye Hai)  में की गई है. अधिकतर युवा अब अपने जेब खर्च के लिए माँ बाप पर निर्भर नहीं रहना चाहते. हाल ही में हुए एक रिसर्च...

Satpuda Ke Ghane Jangal Bhawani Prsaad Mishr 0

Satpuda Ke Ghane Jangal Bhawani Prsaad Mishr

Satpuda Ke Ghane Jangal – सतपुड़ा के घने जंगल भवानीप्रसाद मिश्र जीवन परिचय Satpuda Ke Ghane Jangal  श्री भवानीप्रसाद मिश्र  का जन्म २३ मार्च १९१३ को होशंगाबाद के समीप टिकरिया ग्राम में हुआ था. नरसिंह पुर तथा होशंगाबाद में उन्होंने हाई स्कूल तक अध्ययन किया. जबलपुर के रोबर्टसन कालेज से उन्होंने बी ए की परीक्षा उतीर्ण की. सन...

पंचवटी का सौदर्य 1

पंचवटी का सौदर्य Panchavati

पंचवटी का सौदर्य पंचवटी का सौदर्य जिसमे पंचवटी मैथलीशरण गुप्त ने प्रकृति के सौदर्य का दर्शाया है. आँखों के आगे हरियाली रहती है हर घड़ी यहाँ जहाँ तहाँ झाड़ी में झिरती है झरनों की झड़ी यहाँ वन की एक-एक हिमकणिका जैसी सरस और शुचि है, क्या सौ-सौ नागरिक जनों की वैसी विमल रम्य रूचि है? सन्दर्भ प्रसंग –...

प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन 0

प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन

प्रकृति के क्रिया मैथलीशरण गुप्त द्वारा प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन है बिखरे देती वसुंधरा मोती सबके सोने पर, रवि बटोर लेता है उनको सदा सबेरा होने पर. और विरामदायनी अपनी संध्या को दे जाता है, शून्य श्याम तनु जिससे उसका नया रूप झलकता है. सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियो में कवि मैथलीशरण गुप्त ने प्रकृति के...

मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित स्वच्छ चाँदनी के बारे में हिंदी भाषा में जानकारी 0

स्वच्छ चाँदनी मैथलीशरण गुप्त

क्या ही स्वच्छ चाँदनी है यह है क्या ही निस्तब्ध निशा, है स्वच्छ सुमंद गंध वह निरानंद है कौन दिशा? – स्वच्छ चाँदनी बंद नहीं, अब भी चलते है नियति नटी के कार्य कलाप पर कितने एकांत भाव से कितने शांत और चुपचाप. सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश श्री मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित पंचवटी से अवतरित है. यहाँ पर...

चारू चन्द्र की चंचल किरणें 0

चारू चन्द्र की चंचल किरणें

चारू चन्द्र की चंचल किरणें खेल रही है जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बल में. पुलक प्रकट करती है धरती हरित तृणों की नौकों से, मानो झूम रहे है तरु भी मंद पवन के झोकों से. सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पद्याश राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित पंचवटी खंडकाव्य से है. यहाँ पर कवि...

पंचवटी का सारांश 0

पंचवटी का सारांश Summary of Panchavati

पंचवटी का सारांश पंचवटी राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त का प्रसिद्ध खंडकाव्य है. भगवान श्री राम ने सीता और लक्ष्मण सहित चौदह वर्ष की वनवास अवधि में तेरह वर्ष पंचवटी नामक वन में बिताये थे. पंचवटी महाराष्ट्र में नासिक के निकट गोदावरी नदी के तट पर स्थित है. पंचवटी के प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन इस खंडकाव्य में किया गया है....

मैथलीशरण गुप्त 0

मैथिलीशरण गुप्त जीवन परिचय

मैथिलीशरण गुप्त मैथिलीशरण गुप्त का जन्म उत्तर प्रदेश के झाँसी जनपद के अंतर्गत चिरगांव के एक प्रतिष्ठित वैश्य परिवार में 13 अगस्त 1886 को हुआ था. इनके पिता सेठ रामचरण निष्ठावान राम भक्त तथा कवि थे. अत: गुप्तजी को कविता करने कि प्रेरणा अपने पिता से प्राप्त हुई. सरस्वती के सम्पादक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सम्पर्क में...

हिंदी कविता विकासक्रम 0

हिंदी कविता विकासक्रम | Hindi Poetry Development

हिंदी कविता विकासक्रम हिंदी साहित्य का प्रारम्भ पध्य रचना से हुआ. इसलिए हिंदी कविता विकासक्रम हिंदी साहित्य का इतिहास कविता के विकासक्रम से जुड़ा है. हिंदी भाषा का प्रारम्भ लगभग आठवी नवी शताब्दी से ही हो गया था. लेकिन उसका व्यवस्थित तथा निश्चित स्वरूप दसवी शताब्दी में मिलता है. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का प्रारम्भ संवत...