Beware विज्ञापनों से सावधान


BEWARE (वर्तमान विज्ञापन से सावधान)

वर्तमान समय में विज्ञापन एक अभिशाप के समान है. इस युग की संस्कृति ने विज्ञापन को हमारे जीवन कि अनिवार्य अंग बना दिया है. पिछली सदी में हुई आद्योगिक क्रांति की यह अति आवश्यक बुराई है. हम विज्ञापनों के BEWARE से  कभी नहीं बच सकते.

अखबार देखिये, सडको पर निकलिए, विज्ञापन हर जगह मोजूद रहते है. अपनी लुभावनी भाषा, रंग बिरंगे आकर्षक चित्रों और संगीत के जरिये बस हमें एक ही काम कि प्रेरणा देते है खरीदो और खरीदो.




जितना बड़ा भारतीय बाजार है, उतना ही बड़ा दाव है. विज्ञापन उद्योग में भी जिस गति से व्यापार बड रहा है, उस तरह कि तेजी वाले उद्योग कम ही है. वर्ष १९९४ में विज्ञापन खर्च लगभग ३००० करोड़ रूपये था. और इसमें लगभग ३५% से ४०% कि डर से बढ़त जारी है. विज्ञापन पर खर्च करने वाली कंपनियों में हिंदुस्तान लीवर ९० करोड़ रूपये खर्च कर सबसे ऊपर है.

आई टी सी Beware, ब्रुकब्रांड, कोलगेट पोमेलिव, गाडफ्रे फिलिप्स, नेस्ले, गोदरेज, प्रोटेक्टर एंड गेम्बल एम् आर ऍफ़ व् फिलिप्स प्रथम १० बड़ी खर्च करने वाली कंपनियों में है. विज्ञापनो से बहुत से लाभ भी है. बड़े व्यापारी अपने माल का विक्रय करने के लिए विज्ञापन पर बहुत व्यय करते है.

Beware विज्ञापनों से सावधान

Beware विज्ञापनों से सावधान

फुटकर व्यापारियो को इसका लाभ अपने आप मिल जाता है. तथा उन्हें विज्ञापनों पर अधिक व्यय करने के आवश्यक नहीं रहती है. विज्ञापनो से उपभोक्ता अपनी माँग बनाये रखते है. जिससे कि व्यापारी वस्तुओ कि पूर्ति बराबर मात्रा में करते रहते है.

इससे वस्तुओ कि पूर्ति में कमी नहीं आती है. विज्ञापन से हमें नई-नई वस्तुओ कि जानकारिया प्राप्त होती है, जिससे हम उसका उपभोग कर लाभ प्राप्त कर सकते है. विज्ञापनों कि मदद से हम तम्बाखू, सिगरेट व् अन्य हानिकारक पदार्थो से होने वाली बीमारियों को बताकर जनता को लाभ पहुचा सकते है.

यद्यपि इससे अनेको लाभ है, तो हानिया भी अत्यधिक होती है.

 

विज्ञापन से मुख्य्त: निम्नलिखित हानिया होती है

विज्ञापन वस्तुओ कि शान और प्रतिष्ठा के साथ जुड़ता है.

ज्ञापन विग्यप्त वस्तु के बारे में अतिशयोक्तिपूर्ण दावे करते है.

अपने सामानों को बेचने के लिए विज्ञापन महिला माडलों का अशोभनीय ढंग से उपयोग करते हुए पुरुषो को आकर्षित करने कि कोशिश करते है.

हमारी असुरक्षा – भावना तथा भावुकता को उभार कर विज्ञापन वस्तुओ कि कृतिम आवश्यक पैदा करते है. इन विज्ञापनों का संभवत: सबसे अनेतिक पहलु है उत्पादों को बेचने में खुबसूरत महिलाओ का दुरूपयोग अक्सर ये विज्ञापन BEWARE नारी में शालीनता कि सारी लांघ जाते है. और तो और जिन उत्पादों से नारी का दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं होता, उसके लिए भी उनका दुरूपयोग किया जाता है.

खर्चीले विज्ञापन छापने या प्रसारित करने में सबसे अव्वल शीतल पेय तथा मदिरा उद्योग है. दुसरे नम्बर पर साबुन, क्रीम, शेम्पू, एवं मोटरकार के विज्ञापन तथा तीसरे कर्म पर आते है कपडे तम्बाकू और सिगरेट.

ब्रांडो कि लोकप्रियता जानने के लिए हाल ही में किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार कोलगेट सर्वाधिक लोकप्रिय ब्रांड पाया गया. दूसरा स्थान विक्स एवं तीसरा स्थान लाइफबॉय साबुन का रहा. एच. एम्. टी व् फिलिप्स क्रमश: चोथे व् पाचवे स्थान पर रहे. बाटा, लक्स, डेटॉल, ब्रितानिया और सिर्फ अगले पाच स्थानों पर रहे.

उपयुक्त सूचि से अपने आप यह तथ्य स्पष्ट हों जाता है कि विज्ञापन बाजी का यह सारा खेल गेर जरुरी है, जो हानिकारक तथा सामाजिक और आर्थिक असमानता पैदा करने वाली वस्तुओ को लेकर खेला जा रहा है.

विज्ञापन तेयार करने वाले लोग पैसो से ख़रीदे हुए अपने-अपने क्षेत्र में माहिर लोग है. वे मानव स्वभाव कि गुप्त व् सुप्त इच्छाओ की अच्छी पकड़ रखते है. उन्हें पता है कि हर व्यक्ति शक्ति और सामर्थ चाहता है तो मोटर सायकल का विज्ञापन उसके द्वारा उसे यह प्राप्त करने का भरोसा देता है.

सिगरेट जैसी निर्विवाद रूप से नुकसानदायक चीजो के प्रचार के लिए अक्सर प्रख्यात हस्तियों का सहारा लिया जाता है. कभी किसी फिल्म स्टार तो कभी किसी प्रसिध्द खिलाडी को धुएं के छल्ले निकालते हुए दिखाया जाता है, जबकि हम सभी जानते है कि जिन गुणों के कारण ये शक्सियते अपने क्षेत्र में चोटी पर पहुचती है, उनमे धुम्रपान का होई हाथ नहीं है.

मीडिया विभाग का कार्य विज्ञापन को विभिन्न प्रचार माध्यमो जेसे पत्र, पत्रिका, दूरदर्शन, रेडियो आदि द्वारा प्रकाशित/प्रचारित करना होता है. कोनसा माध्यम किस उत्पाद के लिए सही रहेगा. यह मीडिया विभाग ही योजना बनाता है.

मीडिया डाइरेक्टर मीडिया प्लानर्स, मीडिया कंट्रोलर, मीडिया मेनेजर, मीडिया असिस्टेंट आदि पद इस विभाग में होते है. दूरदर्शन व् अन्य चेनलो के आगमन से मुद्रित विज्ञापन कुछ पिछड़ गए है. अब ये द्रश्य व् श्रव्य माध्यमो से उपभोगता को आकर्षित करने के लिए लोकप्रिय संगीत एवं अन्य गुदगुदी पैदा करने वाले भावो का सहारा लेते है.

तेजी से बदलते चित्र, फदक्दार फड़कदार धुन तथा खुले आसमान के नीचे रेस्तरां में बेठे युगल या समन्दर में धमा चोकड़ी मचाने वाले किशोर किशोरियों कोको कोला को पिने के लिए हमें ललचाते है. यद्यपि यह दर्शय परदे पर दस से बारह सेकंड के लिए आता है लेकिन अपना अमित प्रभाव छोटा आता है.

आज विज्ञापन बहुत बड़ा धंधा बन गया है और खूंखार तकनीको को उपभोक्ताओ तक पहुचाने का एक मनोविज्ञान इन विज्ञापनों के कारण हम अपने साथी मानवो से विमुख होकर आत्मकेंद्रित होते जा रहे है. अतः आप खुद ही यह निर्णय कीजिये कि आप कैसे विज्ञापनों को प्रसारित होने देंगे?

प्रत्येक मनुष्य को समय का सदुपयोग करना चाहिए. समय कीमती है. लोटकर नहीं आता.

 

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