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Knowledge and Information

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अजगरों से भरे जंगल the secret of forest 2

अजगरों से भरे जंगल Satpuda ke ghane jungal

अजगरों से भरे जंगल अगल गति से परे जंगल – अजगरों से भरे जंगल सात-सात पहाड़ वाले बड़े छोटे झाड़ वाले शेर वाले बाघ वाले गरज और दहाड़ वाले कम्प से कनकने जंगल ऊँघते अनमने जंगल सतपुड़ा के ये वन भयंकर साँपों से भरे हुए है. ये वन दुर्गम तथा गति की सीमा से परे है. यहाँ तक मनुष्यों...

मकड़ियों के जाल मुहँ पर 0

मकड़ियों के जाल मुहँ पर Satpuda ke jangal sndarbh prsang

मकड़ियों के जाल मुहँ पर और सर के बाल मुंह पर (मकड़ियों के जाल मुहँ पर) मच्छरों के दंश वाले दाग काले लाल मुँह पर वात झंझा वहन करते चलों इंतना सहन करते कष्ट से ये सने जंगल ऊँघते अनमने जंगल   सन्दर्भ और प्रसंग – कवि ने यहाँ पर इस जंगल की कठिन चढ़ाई का वर्णन किया...

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अटपटी उलझी लताये सन्दर्भ प्रसंग

अटपटी उलझी लताये सन्दर्भ डालियों को खींच खाए पैर को पकडे अचानक प्राण को कास ले कपाये बला की काली लताये लताओं के बने जंगल सतपुड़ा के घने जंगल ऊँघते अनमने जंगल   सन्दर्भ और प्रसंग – कवि यहाँ पर सतपुड़ा के जंगलों का वर्णन कर रहा है. व्याख्या – कवि कहता है कि सतपुड़ा के जंगलों में...

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Satpuda Ke Ghane Jangal Me Sade Gale Patte

Satpuda Ke Ghane Jangal Me Sade Gale Patte सड़े पत्ते गले पत्ते हरे पत्ते जले पत्ते वन्य पथ को ढक रहे से पंक दल में पले पत्ते चलो इन पर चल सको तो दलो इनको दल सको तो ये घिनोने घने जंगल उघते अनमने जंगल. सन्दर्भ और प्रसंग – कवि ने सतपुड़ा के इन जंगलो में पाए जाने...

Jhaad Unche Or Niche Chup Khade Hai Aankh Miche 0

Jhaad Unche Or Niche Chup Khade Hai Aankh Miche

Jhaad Unche Or Niche Chup Khade Hai Aankh Miche झाड़ ऊँचे और नीचे चुप खड़े है आँख मीचे घास चुप है कास चुप है, मूक शाल पलाश चुप है. बन सके तो धसों इनमे सतपुड़ा के घने जंगल, ऊँघते अनमने जंगल. सन्दर्भ व प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता सतपुड़ा के घने जंगल से अवतरित...

Satpuda ke ghane jangal neend me dube hue se, all Information in Hindi 0

Satpuda Ke Ghane Jangal Neend Me Dube Hue Se Unghte Anmane Jangal

Satpuda Ke Ghane Jangal Neend Me Dube Hue Se Unghte Anmane Jangal सतपुड़ा के घने जंगल नींद में डूबे हुए से ऊँघते अनमने जंगल   सन्दर्भ व प्रसंग – प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ श्री भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता सतपुड़ा के घने जंगल से अवतरित है. यहाँ पर कवि सतपुड़ा के जंगलों का वर्णन कर रहा है. व्याख्या –...

व्यक्तित्व विकास की जानकारी 0

व्यक्तित्व विकास की जानकारी

चारित्रिक विकास से ही व्यक्तित्व विकास संभव व्यक्तित्व विकास के कारण व्यक्ति की पूजा होती है और व्यक्तित्व का निर्माण मानवीय तथा चारित्रिक गुणों के कारण होता है. व्यक्तित्व चाहे पारिवारिक हो या सामाजिक बगैर चरित्र शीलता के उसकी न तो विश्वनीयता रहती है और न ही प्रतिष्ठा. चाहे कोई बालक हो या व्यस्क अथवा बुजुर्ग, उसका चरित्र...