Curfew in India National Day


हमारा नवीन राष्ट्रीय पर्व Curfew  कर्फ्यू

भारत त्योहारों का देश है. वर्ष भर अनेक त्यौहार परम्परागत उत्साह एवं सद्भावनापूर्ण तरीके से मनाये जाते है. विभिन्न त्योहारों की प्रष्ठ भूमि में सेकड़ो कहानियों किवदंतियों एवं जनमानस की भावनाए Curfew in India जुड़ी है.




Curfew in India National Day

Curfew in India National Day

कर्फ्यू भारत की नवीनतम राष्ट्रीय पर्व है, जो वर्षभर देश के विभिन्न प्रान्तों, शहरों आदि में समय-असमय समारोहपूर्वक मनाया जाता है. वैसे तो इस पर्व का कोई निर्धारित दिनांक या महीना नहीं है, परन्तु पिछले कुछ वर्षो से इसे अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर में पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता रहा है.

कर्फ्यू पर्व से विभिन्न कहानियाँ एवं भावनाए जुड़ी है. कभी आरक्षण कभी भूमि विवाद, कभी मंदिर, मस्जिद विवाद आदि कारणों को सामने रखकर विभिन्न समुदाय वर्ग राजनीतिक दल, बेरोजगार बड़े ही पूर्ण तरीके से इस त्योहार को मानते है.

इस त्यौहार की शुरुआत धारा १४४ से होती है. तत्पश्चात् प्रशासन स्थिति अनुसार कर्फ्यू मनाये जाने की घोषणा करता है. कर्फ्यू मनाये जाने को कोई निश्चित अवधि नहीं होती है. सामान्य यह अनिश्चित कालीन होता है.

कर्फ्यू ग्रस्त क्षेत्र के रहवासियों को घर से निकलने की अनुमति नहीं होती है. पुलिस, अर्ध सैनिक पर बल, सेना इत्यादि पर फ्लेग मार्च करते है.

यही कहीं लोगों का समूह दिखाई दे, तो डंडे, आसू गैस, गोलियों आदि का प्रयोग किया जाता है. ऐसे अवसरों पर भीड़ द्वारा भी पत्थर चलाकर, गाडियों, घरो में आग लगाकर परम्परागत कर्फ्यू उत्साह का प्रदशन किया जाता है.

गोली चलाये जाने अथवा भगदड़ होने पर अनेक लोगों की जाने जाना तथा रेडियो, टीवी, व् समाचार प्रत्रो द्वारा स्थिति तनावपूर्ण किन्तु नियंत्रण में होने की उल्लासपूर्ण उद्घोषणा की जाती है.

कर्फ्यू पर्व की समाप्ति प्राय: धीरे-धीरे होती है. पहले कुछ घंटो की छुट फिर रात का कर्फ्यू इस तरह मंथर गति से यह पर्व समाप्ति की दिशा में बढ़ता है. स्थिति पूरी तरह सामान्य होने पर प्रशासन द्वारा कर्फ्यू समाप्ति की घोषणा की जाती है.

राजनीतिक दलों द्वारा एक दुसरे की छीछालेदार की जाती है. कई बार शासन विपक्ष की मांग पर जांच आयोग का गठन भी करता है. जो अगले कर्फ्यू पर्व लगने तक अपना जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है. कर्फ्यू पर्व के अनेक लाभ है.

जैसे – गरीब मजदूर पैसे न होने से भूखे रहते है. फलस्वरूप देश का अनाज संग्रह बढ़ता है. सब्जी, दूध जैसी देनिक आवश्यकताओ की वस्तुये महंगी मिलती है. इन्हें बेचने वाले अधिक लाभ कमाकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार करते है.

शासकीय कर्मचारी को आकस्मिक – अर्जित अवकाश के लिए बगेर सवेतनिक अवकाश का आनंद प्राप्त होता है. इस तरह कर्फ्यू पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है. आइये, हम अपने आपको शिक्षित, संस्कृत एवं धर्म निरपेक्ष होने की चिंता से मुक्त कर धूम धाम से कर्फ्यू पर्व मनाये.

 

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1 Response

  1. November 9, 2017

    Such a nice blog.

    I have read an amazing article here.

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