Heart Attack Problem Solution Treatment

Heart Attack (हृदय रोग के कारण)

विश्व में प्रतिवर्ष दो करोड़ व्यक्ति ह्रदय-रोग से मरते है। यह ह्रदय-रोग क्या है ? सीधे अर्थ में ह्रदय के किसी एक या एक से अधिक भीतरी या बाहरी भाग में वित्रातीय द्रव का रुकना या एकत्र होना ह्रदय रोग कहलाता है। इन वित्रातीय द्रव्यों का ह्रदय पर बड़ा प्रभाव पड़ता है, परिणामस्वरूप ह्रदय-रोग का जन्म होता है। इस Heart Attack treatment ह्रदय-रोग के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं।




human heart attack problems

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शारीरिक श्रम करना Do manual labor

शारीरिक श्रम न करने, व्यायाम आदि न करने, टहलने न जाने, योगासन आदि न करने के कारण व्यक्ति ह्रदय रोगों का शिकार हो जाता है।

किसी भी प्रकार का व्यायाम न करने से हमारे शरीर की धमनियाँ कठोर हो जाती हैं। इससे रक्त प्रवाह में अवरोध उत्पन्न होता है।

टेबल-कुर्सी पर बैठ कर काम करने वाले व्यक्ति Heart Attack ह्रदय-रोग से अधिक पीड़ित रहते हैं।

 

शारीरिक भार का बढ़ना  Body weight gain

अधिक भारी शरीर हृदय-रोग का घर है। ह्रदय पर चर्बी चढ़ जाने से जीवन शक्ति कमजोर हो जाती है। अधिक वजन से ह्रदय पर जोर पड़ता है। यह चर्बी पुरुषों के शरीर में धमनियों में जमा हो जाती है। इससे ह्रदय रोग की संभावना बाद जाती है।

 

गरिष्ठ एवं असंतुलित भोजन  Heavy and unbalanced diet

गरिष्ठ भोजन शरीर में Acidity बढ़ता है। इससे अनेक रोग उत्पन्न Many diseases हो जाते हैं। आवश्यकता से अधिक भोजन करने से पाचन – संस्थान बिगड़ जाता है। असंतुलित भोजन से क्षारत्व और अम्लत्व का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे Heart Attack ह्रदय-रोग हो जाते हैं।

मांसाहार में अम्लता की मात्रा अधिक होती है, जिससे रक्त गाढ़ा हो जाता है। इससे ह्रदय स्वाभाविक रूप से काम नहीं कर पाता है। क्लोरोस्ट्राल धमनियों में जमकर उन्हें कठोर या कड़ा कर देता है। इससे धमनियों में  कारोनोरी थ्राम्ब्रोसिस रोग हो जाता है।

वसा व अम्ल रक्त में थक्के उत्पन्न करते हैं। ये धमनियों में अवरोध उत्पन्न करते हैं। इससे ह्रदय रोग की संभावना प्रबल हो जाती है।

 

रक्तचाप तथा अन्य रोग Blood pressure and other diseases

रक्तचाप बढ़ने से किसी भी समय कोई भी रोग ह्रदय में हो सकता है। सुजाक रोग के कीटाणु महाधमनियों में पहुँचकर रोग को जन्म देते हैं। अन्य प्रकार से भी ये कीटाणु शरीर में पहुँचकर ह्रदय के आन्तरिक आवरण में विकार उत्पन्न करते हैं।

ज्ञातव्य है कि धमनियों के तन्तुमय ऊत्तकों में भीतरी सतह पर चूना, लवण, चर्बी आदि जमा हो जाने से और धमनियों का व्यास घत जाने से व्यक्ति का रक्त-चाप बाद जाता है। परिणामस्वरूप Heart Attack ह्रदय-रोग उत्पन्न हो जाता है।

मत – ज्वर, मधुमेह, निमोनिया, रक्तहीनता, क्षयरोग आदि के कारण भी रक्त विषाक्त हो जाता है, तब ह्रदय अस्वस्थ हो जाता है और उसकी गति मंद पड़ जाती है।

 

औषधियों का अधिक सेवन  High consumption of drugs

एलोपैथिक औषधियों के अधिक सेवन से ह्रदय को बड़ी क्षति पहुँचती है। विशेषकर भस्म, आसव, ज्वरनाशक औषधियाँ ह्रदय पर बुरा प्रभाव डालती हैं।

 

मानसिक तनाव Mental Stress

यह सहज एवं स्वभाविक है कि तनावग्रस्त और थका हुआ शरीर कभी स्वस्थ नहीं रहता हैं। मानसिक तनाव के कारण एड्रेनलिन के स्त्राव के कारण कॉरोनरी रक्त कोषाणु संकुचित हो जाते हैं। ह्रदय की पेशियाँ आवश्यक रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं। अतः ह्रदय पीड़ा होने लगती है।

अत्यधिक श्रम करना और पर्याप्त विश्राम करना Excessive labor and not enough rest

अत्यधिक श्रम करने और विश्राम न करने से ह्रदय दुर्बल हो जाता है। इसी प्रकार अधिक नींद लेना और काम नींद लेना दोनों ही ह्रदय-रोग के कारण सिद्ध होते हैं।

 

वृध्दावस्था Old age

वृध्दावस्था में ह्रदय की धमनियों सख्त हो जाती हैं। उस पर श्वेत खुरदरे चटके पड़ जाते हैं। रक्त के प्रवाह का मार्ग सँकरा हो जाता है, जिससे रक्त का थक्का जम जाता है और ह्रदय को नया रक्त मिलना अवरुद्ध हो जाता है और एक दिन ह्रदय काम करना बंद कर देता है।

 

अधिक गर्मी और अधिक ठण्ड More heat and cold

मानव शरीर में अधिक गर्मी बढ़ जाने से उसे सामान्य स्थिति में लाने के लिए ह्रदय को अधिक परिश्रम करना पड़ता हैं, जिससे ह्रदय अस्वस्थ हो जाता है। इसी प्रकार अत्यधिक ठण्डक में शरीर को गर्म करने के लिए भी ह्रदय को अधिक श्रम करना पड़ता है, जिससे भी ह्रदय अस्वस्थ हो जाता है।

 

गर्भवस्था  Pregnancy

गर्भवस्था में स्त्री के ह्रदय की पेशियों के तंतु फैलकर मोटे हो जाते हैं, जिससे ह्रदय की धड़कन तेज हो जाती है और वह कमजोर हो जाता है। इससे भी ह्रदय रोग उत्पन्न हो जाता है।

 

अधिक कार्य More work

वर्ष की उम्र के बाद अधिक कीर्यक्षय करने से भी ह्रदय रोग बढ़ जाते हैं।

 

वंश परम्परा Lineage

वंश परम्परा से भी ह्रदय रोग आगे बढ़ता जाता है। इसका आहार – विहार और स्वास्थ पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता हैं।

 

नशे की प्रवृत्ति Drunk trend

नशे की प्रवृत्ति के कारण नब्ज की गति और ह्रदय की धड़कन बढ़ जाती है। इसका ह्रदय पर प्रभाव पड़ता है। फलस्वरूप ह्रदय रोग हो सकता है।

 

अति आकांशा

आज के युग का व्यक्ति अति भौतिकवादी हो गया है। इसी के साथ वह अति आकांक्षावादी हो गया है। इसलिए वह सदैव दबाव में जीवित रहता है, जिसका उसके ह्रदय पर भी भरी प्रभाव पड़ता है।

 

गतिशील जीवन शैली Dynamic lifestyle

आज के युग के व्यक्ति का जीवन दुनियाभर की आपाधापी में बीतने से अधिक गतिशील हो गया है, जिसके कारण उसके ह्रदय को भी उतनी ही तेजगति से काम करना पड़ता है। परिणामतः ह्रदय-रोग का जन्म होता है, जो कि मानव-जीवन के लिए खतरे की घंटी का काम करता है।

 

 

The main measures of prevention of cardiovascular disease ह्रदय रोग के निवारण के मुख्य उपाय

  1. ह्रदय रोग से बचाव करना मानव का शरीर धर्म है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं
  2. व्यक्ति को प्रतिदिन थोड़ा बहुत परिश्रम और व्यायाम अवश्य करना चाहिए। प्रातःकाल में भ्रमण करना भी उत्तम माना गया है।
  3. व्यक्ति को संतुलित आहार लेना चाहिए। गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए। अधिक मीठा और चटपटा भोजन स्वास्थ के लिए हानिकारक ही होता है। भूख से कम भोजन करना सर्वोत्तम है।
  4. विटामिन बी ड़ी ई तथा कैल्शियम युक्त पदार्थ तथा दही, शहद एवं अंकुरित अन्न खाने से ह्रदय रोगों से बचा जा सकता है।
  5. मानसिक तनाव से बचने और शांत तथा सादा जीवन व्यतीत करने से भी ह्रदय रोगों से व्यक्ति बहुत कुछ बच सकता है।
  6. व्यक्ति को अपने उद्वेगों और दबावों से बचने का प्रयास करना चाहिए।
  7. पारिवारिक वातावरण शांत, सौहार्द्रपूर्ण, श्रेमपूर्ण, सम्मानजनक और स्वस्थ होना चाहिए।
  8. सप्ताह में एक-दो दिन अवकाश मनायें और अपने आप को प्रकृति के सुखद और शान्त वातावरण में छोड़ देवें।
  9. मन में सदैव सकारात्मक दृश्टिकोण रखें।
  10. व्यसनों से सदैव दूर ही रहें। व्यसन व्यक्ति को एक दिन मृत्यु के मुँह में धकेल देते हैं।
  11. मानसिक दुष्प्रवृत्तियों को अपने मन में स्थान न देवें, क्योकि ये ही तो व्यक्ति को पतन के गर्त में ले जाती हैं।
  12. प्रतिदिन अपने आराध्य का सच्चे मन से ध्यान करें और पाप कर्मों से बचने का उपक्रम करें।
  13. अनावश्यक चिन्ताओं से मुक्त रहें। चिंताएँ चिता से भी बढ़कर होती हैं। व्यक्ति को जीवित अवस्था में ही जला डालने का काम करती हैं।
  14. प्रेक्षाध्यान, अनुप्रेक्षा, कायोत्सर्ग का नियमित अभ्यास करें।
  15. दूसरो के प्रति सदैव शुभ भावनाए रखे।
  16. किसी भी प्रकार का ह्रदय जन्म रोग उत्पन्न होते ही विशेषज्ञ चिकित्सक से उचित परामर्श लेकर उचित उपचार कराएँ।
  17. यदि आपने उपयुक्त उपाय किये, तो ह्रदय रोगो से निश्चय ही मुक्ति मिल सकेगी और स्वस्थ तथा सुखी जीवन का आनन्द प्राप्त कर सकेंगे।

 

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