Human Environment की खास जानकारियाँ


मानवीय पर्यावरण बस्तिया परिवहन तथा संचार (Human Environment Settlements Transport and Communication)

आप जानते है कि आदिमानव प्रकृति की गौद में रहता था. आज फिर प्रकार वन्य जीव वनों में रहते है, उसी प्रकार मानव भी वनों में रहता था. और अपने प्राकृतिक पर्यावरण Human Environment से ही अपनी सभी आवश्कताओं की पूर्ति करता था. उस समय न तो उसे कृषि का ज्ञान था और न ही वह पशु पालता था. जंगली फल फूल खाकर ही अपना जीवन निर्वाह करता था. उस समय न ही किसी प्रकार की बस्तियाँ थी और न ही कोई परिवहन तथा संचार के साधन थे.




Human Environment, Transport and Communication, Human Settlements, Human Communication

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मानवीय पर्यावरण का अर्थ (The meaning of the human environment)

पृथ्वी पर मानव ही एक ऐसा प्राणी है जिसने प्राकृतिक पर्यावरण Human Environment को अपने अनुकूल बनाने का निरंतर प्रयास किया है. और आज मानव के प्रयासों से प्राकृतिक पर्यावरण में इतना बदलाव आया है. जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है. मानव द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण में लाये गए बदलाव को ही मानवीय पर्यावरण कहा जाता है. मानवीय अथवा सांस्कृतिक पर्यावरण हमारे सम्पूर्ण पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण अंग है.

आदिमानव वन्य जीवों की तरह गुफाओं या पेड़ों पर रहते थे तथा भोजन की खोज में एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाते रहते थे. जब धीरे धीरे मानव ने पशुओं को पालना आरम्भ किया, तो वह एक स्थान पर अपनी झोपड़ी बनाकर रहने लगा. इस प्रकार छोटी छोटी बस्तियां बनने लगी.

 

बस्तियां Settlements

ये ऐसे स्थान है जहाँ लोग अपने लिए घर बनाते है. प्रारम्भ में बस्तियों का विकास नदी घाटियों के निकट हुआ क्योकि वहाँ खेती के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध था एवं भूमि उपजाऊ थी. व्यापार वाणिज्य एवं विनिर्माण के विकास के साथ ही मानव बस्तियों का आकार बड़ा होता गया. नदी घाटियों के निकट बस्तियाँ पनपने लगी एवं सभ्यता का विकास हुआ.

कुछ प्राचीन नदी घाटियों में विकसित प्रसिद्ध सभ्यताए थी. सिन्धु घाटी की सभ्यता (वर्तमान भारत एवं पाकिस्तान) नील घाटी की सभ्यता (मिस्त्र) ह्रांगहे घाटी की सभ्यता (चीन) एवं टिगरिस-युफ़रेटीज घाटियों की सभ्यता (वर्तमान इराक).

बस्तियाँ स्थाई या अस्थाई हो सकती है. जो बस्तियाँ कुछ समय के लिए बनाई जाती है, उन्हें अस्थाई बस्तियाँ कहते है. घने जंगलों, गर्म एवं ठन्डे रेगिस्तानों तथा पर्वतों के निवासी प्राय: अस्थाई बस्तियों में रहते है. वे आखेट, संग्रहण एवं स्थानांतरी कृषि करते है. कुछ लोग अपने पशुओं के साथ ऋतु प्रवास करते है. ये लोग भी अस्थाई बस्तियों में रहते है परन्तु अधिकतर स्थाई बस्तियां है. जिनमे लोग अपने रहने के लिए कच्चे या पक्के मकान बनाते है.

 

स्थाई बस्तियों को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting permanent settlements)

आपने देखा कि खेती के अविष्कार से ही स्थाई बस्तियों का विकास हुआ. आपने यह भी देखा कि आरम्भ में लोगो ने नदी घाटियों में बस्तियां स्थापित करना आरम्भ किया. इसके पीछे जल की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण और आधारभूत कारक था. आज भी गावों, कस्बों या नगरों के विकास के जल के स्त्रोत विशेष महत्व रखते है. जल स्त्रोतों के चारों और विकसित बस्तियों को आद्र बिंदु बस्तियाँ कहते है.

स्थलाकृति भी बस्तियों के विकास में एक महत्वपूर्ण कारक है. पर्वतीय क्षेत्रों की तुलना में मैदानी क्षेत्रों में बड़ी-बड़ीं बस्तियाँ बनाना आसान है. आप देखेंगे कि विश्व के सभी बड़े-बड़े नगर मैदानी क्षेत्रों में पाए जाते है. मैदानी क्षेत्रों में सड़कें तथा रेलमार्ग बनाना भी सुगम है.

स्थाई बस्तियाँ बनाने के लिए अनुकूल जलवायु का भी योगदान होता है. बहुत ठंडे बहुत गर्म एवं शुष्क क्षेत्रों में रहना कठिन होता है. अत: इन क्षेत्रों में स्थाई बस्तियों का विकास कम होता है.

वर्तमान ओद्योगिक के युग मैं ओद्योगिक क्षेत्रों में अनेक बड़े नगर विकसित हो जाते है. समुद्र तटीय क्षेत्रों के आसपास नगरों का विकास पत्तनों के रूप में होता है. क्योकि अधिकतर अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्र द्वारा ही होता है.

 

ग्रामीण एवं शहरी बस्तियाँ (Rural and urban settlements)

बस्तियों के आकार एवं लोंगो के मुख्य व्यवसायों के आधार बस्तियों को दो भागों में विधाजित किया जाता है. ग्रामीण बस्तियाँ (Rural Settlements) एवं शहरी बस्तियाँ (Urban Settlements) ग्रामीण बस्तियाँ आकार में छोटी होती है जबकि शहरी बस्तियाँ आकार में काफी बड़ी होती है. ग्रामीण बस्तियों में रहने वाले लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि होता है, जबकि शहरी बस्तियों में रहने वाले लोग प्राय: व्यापार, उद्योंग, परिवहन, संचार एवं अन्य व्यवसायों जैसे दफ्तरों में काम करना आदि में सलग्न रहते है.

 

ग्रामीण बस्ती Rural Settlement

ग्रामीण बस्ती सघन (Compact) या प्रकीर्ण (Sparse) हो सकती है. सघन बस्तियों में घर दूर-दूर व्यापक क्षेत्र में फैले होते है. प्रकीर्ण बस्तियाँ मुख्यत: पहाड़ी क्षेत्रों, घने जंगलों एवं मरुस्थलों में पाई जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने पर्यावरण के अनुकूल घर बनाते है. अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में ढाल वाली छत बनाते है. जिन क्षेत्रों में वर्षा के समय जल का जमाव होता है, वहाँ ऊँचें प्लेटफार्म या स्टिल्ट पर घर बनाते है.

 

नगरीय क्षेत्र (City Area)

नगरीय क्षेत्रों में प्राय: लोग सीमेंट, पत्थर, लोहे, लकड़ी, कंकरीट, आदि सामग्री का प्रयोग करके पक्के मकान बनाते है. नगरीय बस्तियाँ प्राय: सघन होती है. आजकल ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक लोग नौकरी बेहतर शिक्षा एवं चिकित्सीय सुविधा के कारण नगरों की और पलायन कर रहे है, इससे शहरों की जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है, जिसके कारण अनेक बड़ें-बड़ें नगरों में गंदी बस्तियाँ देखी जा सकती है. ऐसे स्थान पर लोग भीड़-भाड़ एवं अस्वस्थकारी परिस्थितियों में रहते है. इसके विपरीत, गाँवों में खुली भूमि एवं साँस लेने के लिए ताजी हवा मिलती है.

 

गर्म जलवायु Hot Climate

गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में मिट्टी की मोटी दिवार वाले घर पाए जाते है, जिनकी छतें फूंस की बनी होती है. स्थानीय सामग्री जैसे – पत्थर, पंक, चिकनी मिट्टी, तृण आदि का उपयोग घर बनाने के लिए किया जाता है. बहुत ठन्डे प्रदेश टुंड्रा में लोग बर्फ के गुम्बदनुमा घर बनाते है, जिन्हें इग्लू कहते है.

 

परिवहन Transportation

परिवहन लोगों एवं सामान के आवागमन के साधन होते है. पुराने समय में अधिक दूरी की यात्रा करने में बहुत समय लगता था क्योकि लोग या तो पैदल चलते थे या अपने सामान को ढोने के लिए पशुओं का प्रयोग करते थे. पहिए की खोज से परिवहन आसान हो गया. समय के साथ साथ परिवहन के विभिन्न साधनों का विकास होता गया, लेकिन आज भी लोग परिवहन के लिए पशुओं का प्रयोग करते है.

हमारे देश में सामान्यत: परिवहन के लिए  घोड़ों, खच्चरों, गधों, बैलों एवं ऊटों का प्रयोग किया जाता है. दक्षिणी अमेरिका के एंडीज पर्वत के क्षेत्र में लामा का उपयोग उसी तरह होता है जैसे तिब्बत में याक का उपयोग होता है. हमारे देश के उत्तर पर्वतीय क्षेत्रों में भी याक का उपयोग होता है.

 

मानवीय पर्यावरण (Human Environment) से जुड़ी आधुनिक परिवहन के प्रमुख साधनों को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है.

  • स्थल मार्ग (सड़क एवं रेल मार्ग)
  • जल मार्ग (नार्वे, स्टीमर एवं जलयान)
  • वायु मार्ग (हवाई जहाज तथा हेलीकाप्टर)

 

स्थल मार्ग सड़के (Land Roads and Human Environment)

सड़के कम दूरी के यातायात के लिए सबसे प्रमुख परिवहन का साधन है. सड़कें पक्की एवं कच्ची हो सकती है. कच्ची सड़कें प्राय: ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाती है. मैदानी क्षेत्रों में सड़कें बनाना आसान है. भारत के सभी कस्बे एवं नगर तथा अनेक ग्रामीण क्षेत्र भी पक्की सड़कों से जुड़ें है. मरुस्थलों, वनों एवं ऊँचें पर्वतों के कुछ स्थान भी पक्की सड़कों से जुड़ें है. मरुस्थलों, वनों एवं ऊँचें पर्वतों के कुछ स्थान भी पक्की सड़कों से जुड़ें है. हिमालय पर्वत पर मनाली लेह राज मार्ग विश्व के सबसे ऊचें सड़क मार्गों में से एक है. भूमिगत सड़कों को भुमिबत मार्ग (Subway) कहते है. फ्लाई ओवर (Flyover) उत्थित संरचनाओ के ऊपर बड़े नगरों में बनाये जाते है.

 

रेल यातायात (Rail traffic and Human Environment)

भूमि पर लम्बी दूरी की यात्रा के लिए तथा सामान लाने ले जाने के लिए रेल यातायात सड़कों की तुलना में सस्ती एवं सुविधाजनक है. परन्तु रेल लाइने बनाने के लिए सड़कों की तुलना में अधिक पूँजी एवं कौशल की आवश्यकता है. वाष्प के इंजन की खोज एवं ओद्योगिक क्रांति ने रेल परिवहन के तीव्र विकास में योगदान दिया. प्रारम्भ में रेल इंजनो में ईधन के रूप में कोयले का प्रयोग किया जाता था.

परन्तु अब इनमें डीजल का प्रयोग होने लगा है. तीव्र गति से चलने वाली रेलों के इंजन बिजली से भी चलाए जाते है. यात्री गाड़ियों के अतिरिक्त सामान ले जाने के लिए विशेष मालगाड़ियाँ होती है जिनके द्वारा प्रतिदिन लाखों टन सामान ले जाया जाता है.

लंबी दूरी की रेलगाड़ियों में यात्रियों की सुविधा के लिए शयन कक्ष होते है. भारत के मैदानी क्षेत्रों में रेल लाइने बिछाना प्राय: संभव नहीं होता. उन्नत प्रोद्योगिकीय कौशल में दुगर्म पहाड़ी क्षेर्त्रों में कुछ रेलमार्ग बनाये गए है, परंतु संख्या काफी कम है.

विश्व के कुछ बड़े नगरों की भाती अब भारत के दो बड़े नगरों कोलकाता और दिल्ली में भूमिगत रेल लाइन (मेट्रो रेल) भी बिछाई गई है. इनके दो प्रमुख लाभ है. एक तो लोगों को सड़क यातायात की भीड़ भाड़ से राहत मिलती है और दूसरे वायु प्रदूषण नहीं होता. लोग कम खर्चे में सुगमतापूर्वक अपने-अपने कार्य स्थल को जा सकते है.

 

जल परिवहन (Water Transport and Human Environment)

यह परिवहन का प्राचीनतम साधन है. जल परिवहन सबसे सस्ता परिवहन का साधन है. पुराने समय में जब परिवहन के अन्य आधुनिक साधन नहीं थे, लोग नावों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान को जाते थे. आजकल कम बड़ी-बड़ी यंत्रचलित नावों, स्टीमरों तथा जलयानों का प्रयोग करते है. व्यापारिक जलयान भारी मात्रा में बदन आकार एवं भारी सामान एक देश से दूसरे देश को ले जाते है. ये मार्ग पत्तनों से जुड़ें होते है.

जलमार्ग मुख्यत: दो प्रकार के होते है. अंतर्देशीय जलमार्ग एवं समुद्री जलमार्ग नाव्य नदियों एवं झीलों का प्रयोग अंतर्देशीय जलमार्ग के लिए होता है. कुछ महत्वपूर्ण अंतर्देशीय जलमार्ग है. गंगा ब्रम्हापुत्रनदी तंत्र, उत्तरी अमेरिका में ग्रेट लेक एवं अफ्रीका में नील नदी.

समुद्री एवं महासागरीय मार्गों का उपयोग मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए किया जाता है. इन मार्गों पर स्थित कुछ प्रसिध्द पत्तन है एशिया में सिंगापुर एवं मुंबई, उत्तरी अमेरिका में न्यूयार्क एवं लॉस एंजिल्स, दक्षिण अमेरिका में रियोडिजेनेरियो, अफ्रीका में डरबन एवं केपटाउन, आस्ट्रेलिया में सिडनी, यूरोप में लंदन.

भूमध्य सागर एवं लाल सागर को जोड़ने वाली स्वेज नहर तथा मध्य अमेरिका में आटलानटिक महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली पनामा नहर के बन जाने से बिभिन्न देशों के बीच महासागरीय एवं सागरीय मार्गों की दूरियाँ काफी कम हो गई है.

 

वायु परिवहन (Air Transport and Human Environment)

बीसवी सदी के आरंभ में विकसित यह परिवहन का सबसे तीव्रगामी साधन है. परन्तु ईधन की लागत अधिक होने के कारण यह सर्वाधिक महँगा साधन है. वायु यातायात ख़राब मौसम जैसे – कोहरा एवं तूफ़ान से कुप्रभावित होता है. यह यातायात का ऐसा साधन है, जो सर्वाधिक दुर्गम एवं दुरूह स्थानों तक पहुँच सकता है. विशेष रूप से जहाँ सड़क एवं रेलमार्ग नहीं है.

हेलीकाप्टर अगम्य स्थानों एवं संकटकालीन स्थितियों में लोगो को बचाने एवं भोजन, जल, कपड़े एवं दवाएँ पहुचने के लिए एक बहुत ही उपयोगी साधन है. कुछ महत्वपूर्ण हवाई पत्तन है. दिल्ली, मुंबई, न्युयोर्क, लन्दन, पेरिस, रोम, फ्रेंकफर्ट एवं काहिरा. हवाई यात्रा ने परिवहन को इतना द्रुत बना दिया है कि आज भारत से यूरोप की यात्रा करने में केवल ६ से ८ घंटे का समय लगता है.

आज इतने विशाल वायुयान है जो सेकड़ों यात्रियों को उनके सामान सहित ले जा सकते है. व्यापारिक सामान ले जाने के लिए विशेष प्रकार के वायुयान होते है. जिन्हें कारगो प्लेन कहते है.

 

मानवीय पर्यावरण और संचार (Communications Information and Human Environment)

संचार के विभिन्न साधनों द्वारा हम दूसरों तक अपना संदेश पहुचाते है. तकनीकी विकास के साथ मानव ने संचार के नए एवं तीव्र साधनों को विकसित कर लिया है. संचार के विभिन्न साधनों द्वारा हम व्यक्तिगत रूप से अपने मित्रों एवं सम्बंधियो को संदेश पहुचाते है.

विभिन्न प्रकार की व्यापारिक गतिविधियों में इन साधनों का उपयोग होता है. डाक तार, टेलीफोन, फैक्स तथ इन्टरनेट (ई-मेल) आदि व्यक्तिगत संचार के साधन है. परन्तु आज के युग में जनमानस को संदेश पहुचाने के लिए एवं मनोरंजन के लिए भी विभिन्न प्रकार के संचार के साधनों का विकास हुआ है. इन्हें जनसंचार के साधन कहा जाता है. जैसे रेडियों टेलीविजन, समाचार पत्र जनसंचार के सशक्त साधन है.

संचार के क्षेत्र में विकास से विश्व में सूचना क्रांति आई है. सेटेलाईट से संचार में तीव्रता आई है. तेल की खोज, वनों का सर्वेक्षण, भूमि जल खनिज संपदा. मौसम पौर्वानुमान एवं आपदा पूर्व चेतावनी आदि में सेटेलाइट सहायक होते है. आज सेल्युलर फ़ोन के द्वारा बेतार टेलीफ़ोन संचार अत्यधिक लोकप्रिय हो चुका है.

अब हम इन्टरनेट द्वारा घर बैठे ही रेल, हवाई जहाज एवं सिनेमा साधनों के फलस्वरूप विश्व के लोग एक दुसरे के निकटतम सम्पर्क में आ गए और पूरा विश्व सिकुड़कर एक गावँ जैसा हो गया है. आज हम एक व्रहद विश्व समाज के रूप में विकसित हो रहे है.

महत्वपूर्ण तथ्य Key Facts

  • मानव द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण में लाये गए बदलाव को ही मानवीय पर्यावरण (Human Environment) कहा जाता है.
  • जब मानव ने कृषि करना एवं पशु पालन आरम्भ किया तो वह एक स्थान पर अपनी झोपडी बनाकर रहने लगा. इस प्रकार छोटी छोटी बस्तियाँ बनने लगी.
  • प्रारम्भ में बस्तियों का विकास नदी घाटियों के निकट हुआ क्योकि वहाँ खेती के लिए पर्याप्त मात्र में जल उपलब्ध था एवं भूमि उपजाऊ थी.
  • बस्तियाँ स्थाई तथा अस्थाई हो सकती है. घने जंगलों, गर्म एवं ठंडे रेगिस्तानों तथा पर्वतों के निवासी प्राय: अस्थाई बस्तियों में रहते है. कुछ लोग अपने पशुओं के साथ ऋतु प्रवास करते है. ये लोग भी अस्थाई बस्तियों में रहते है.
  • स्थाई बस्तियों को प्रभावित करने वाले कारक है जल की उपलब्धता, स्थलाकृति, अनुकूल जलवायु, ओद्योगिक विकास एवं समुद्रतट की समीपता. जल स्त्रोतों के चारों और विकसित बस्तियों को आद्र बिंदु बस्तियाँ कहा जाता है.
  • बस्तियों के आकार एवं लोगो के मुख्य व्यवसायों के आधार पर बस्तियों को दो भागों में विभाजित किया जाता है. ग्रामीण बस्तियाँ एवं शहरी बस्तियाँ.
  • ग्रामीण बस्तियाँ सघन या प्रकीर्ण हो सकती है. प्रकीर्ण बस्तियाँ मुख्यतः पहाड़ी क्षेत्रों घने जगलों एवं मरुस्थलों में पाई जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने पर्यावरण के अनुकूल घर बनाते है. नगरीय बस्तियाँ प्राय: सघन होती है.
  • ग्रामीण क्षेत्रो के शहरी क्षेत्रों की और लोगों के पलायन के कारण शहरों की जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है जिसके फलस्वरूप अनेक लोग नंदी बस्तियों में रहे है. शहरों में वायु प्रदूषण भी एक गंभीर समस्या है.
  • परिवहन लोगों एवं समान के आवागमन के साधन है. आधुनिक परिवहन के प्रमुख साधनों को तीन भागों में विभजित किया जा सकता है. स्थल मार्ग, जल मार्ग एवं वायु मार्ग.
  • सड़के एवं रेलमार्ग स्थल पर परिवहन के मुख्य साधन है. कम दूरी की यात्रा के लिए सडकें अधिक उपयुक्त है जबकि लम्बी दुरी की यात्रा के लिए रेल मार्ग सस्ता एवं सुविधाजनक साधन है. सड़कें तथा रेलमार्ग बनाने के लिए मैदानी क्षेत्र अधिक उपयुक्त होते है.
  • जल परिवहन का सबसे सस्ता साधन है. जल मार्ग के दो प्रकार के होते है. अंतर्देशीय जलमार्ग एवं समुद्री जलमार्ग. अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए नदियों एवं झीलों का प्रयोग किया जाता है. समुद्र में अनेक जलयान व्यापारिक सामान एक देश से दुसरे देश को ले जाते है.
  • वायु यातायात परिवहन का सबसे तीव्र परन्तु सबसे महँगा साधन है. हेलिकोप्टरों द्वारा दुर्गम स्थानों में भी पहुँचा जा सकता है. जहाँ सड़कें या रेलमार्ग नहीं है.
  • संचार के विभिन्न साधनों द्वारा हम दूसरों तक अपना सन्देश पहुँचाते है. डाक तार, टेलीफोन, फैक्स, तथा इन्टरनेट, (ई-मेल) आदि व्यक्तिगत संचार के साधन है. रेडियों, टेलीविजन एवं समाचार पत्र जनसंचार के सशक्त साधन है.
  • संचार के क्षेत्र में विकास से विश्व में सूचना क्रांति आई है. सेटेलाईट से संचार में तीव्रता आई है. संचार के इन विकसित साधनों के फलस्वरूप आज हम एक वृहद विश्व समाज के रूप में विकसित हो रहे है.

 

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