India Freedom Struggle Fact Information


India Freedom Struggle स्वतंत्रता संघर्ष के तथ्य

India Freedom Struggle में देखे तो पहला अंग्रेज विरोधी संघर्ष सन्यासियों के द्वारा शुरू किया गया.

सन्यासी विद्रोह का उल्लेख बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंदमठ में किया गया है.

1887 ई में दादा भाई नौरोजी ने इंग्लैंड में भारतीय सुधार समिति की स्थापना की.



1887 ई के बाद ब्रिटिश सरकार का रुख कांग्रेस के प्रति कठोर होता चला गया.

इफरिन ने कहा, कांग्रेस केवल सूक्ष्मदर्शी अल्पसंख्या का प्रतिनिधित्व करती है .

कर्जन ने कहा, कांग्रेस अपने पतन की और लड़खड़ाती हुई जा रही है .

नौरोजी दत्त और वाचा ने घन निकास के सिधांत का प्रतिपादन किया.

लार्ड कर्जन ने 20 जुलाई 1905 ई को बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा की.

बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर 1905 ई को प्रभावी हुआ. इस दिन पूरे बंगाल में शोक दिवस मनाया गया.

बंगाल विभाजन के विरोध में 7 अगस्त 1905 ई को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आन्दोलन की घोषणा की गई.

1906 ई में कलकत्ता में हुए कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए दादाभाई नरौजी ने पहली बार स्वराज्य की माँग प्रस्तुत की.

स्वदेशी आन्दोलन चलाने के तरीके को लेकर ही कांग्रेस 1907 ई के सूरत अधिवेशन में उग्रवादी और उदारवादी नामक दो दलों में विधाजित हो गई. इस सम्मेलन की अध्यक्षता रास बिहारी बोस ने की थी.

स्वदेशी आन्दोलन के अवसर पर ही रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने अपना प्रसिद्ध गीत आमार सोनार बंगला लिखा. बाद में यही गीत बाड्ला देश का राष्ट्रीय गीत बना.

बाल गंगाधर तिलक पहले कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने देश के लिए कई बार जेल की यात्रा की.

प्लेग की समय की ज्यादतियों से प्रभावित होकर पूना के चापेकर बंधुयों ने प्लेग अधिकारी रैड और आमर्स्ट की हत्या कर दी.

बंगाल में क्रांतिकारी विचारधारा को वारिन्द्र कुमार घोष और भूपेन्द्रनाथ दत्त ने फैलाया. 1906 ई में इन दोनों ने मिलकर युगांतर नामक समाचारपत्र का प्रकाशन किया.

बंगाल में पी. मित्रा ने अनुशीलन समिति का गठन किया, जिसका उद्देश्य था, खून का बदला खून. अनुशीलन समिति की 500 शाखाए खोली गई.

अनुशीलन समिति ने हेमचन्द्र को रुसी क्रांतिकारियो से बम बनाने की कला सीखने के लिए रूस भेजा.

महराष्ट्र में विनायक दामोदर सावरकर ने 1904 ई में अभिनव भारत नामक संस्था स्थापित की.

अभिनव भारत संगठन के सदस्य पी. एन. वापट बम बनाने की कला सीखने के लिए पेरिस गए.

महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आन्दोलन उभारने का श्रेय तिलक के पत्र केसरी को जाता है.

तिलक ने 1893 ई में गणपति और 1895 ई में शिवाजी उत्सव मनाना प्रारम्भ किया.

प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस ने 30 अप्रैल 1908 ई को मुज्जफरपुर के जज किंग्जफोई की हत्या का प्रयत्न किया.

चाकी ने आत्महत्या कर ली और खुदीराम बोस को 15 वर्ष की अवस्था में 11 अगस्त 1908 ई को फाँसी दे दी गई.

1905 ई में लंदन में श्याम जी कृष्ण वर्मा ने इंडियन होमरूम सोसायटी की स्थापना की.

30 दिसम्बर 1906 ई को ढाका के नवाब सलीम उल्ला खाँ के निमंत्रण पर सम्मेलन हुआ. नवाब वकारुल मुल्क इसके अध्यक्ष थे. इसी सम्मेलन में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग का प्रथम अधिवेशन 1908 ई में अमृतसर में हुआ यहाँ आगा खाँ को इसका अध्यक्ष बना दिया गया.

जुलाई 1909 ई को मदन लाल ढींगरा ने विलियम कर्जन वाईली को गोली मारकर हत्या कर दी. 16 अगस्त 1909 को मदन लाल ढींगरा को मृत्यु दंड दिया गया.

21 दिसम्बर 1909 ई को अनंत कान्हरे ने जेक्सन को गोली मार दी.

 

वायसराय लार्ड होर्डिंग ने 1911 ई में दिल्ली में भव्य दरबार का आयोजन इंग्लैंड के सम्राट जार्ज पंचम और मेरी के स्वागत में किया. इस दरबार में निम्न घोषणाये हुई.

(i)बंगाल विभाजन को रद्द किया गया.

(ii) बंगाली भाषी क्षेत्रों को मिलाकर अलग एक प्रांत बनाया गया.

(iii)बिहार एक अलग राज्य बना, जिसमे उड़ीसा भी शामिल था.

(Iv) राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा हुई. 1912 ई में दिल्ली भारत की राजधानी बनी.

 

कोमागातामारू जहाज को बाबा गुरुदत्त सिंह 1914 ई ने किराया पर लिया था. यह जलयान 351 यात्रियों के साथ 26 सितम्बर 1914 को हुगली पँहुचा. बजबज नामक बंदरगाह पर जहाज पहुँचने पर तलाशी हुई और संघर्ष हुआ. 18 यात्री मार दिए गए और लगभग 25 यात्री घायल हुए.

 

23 दिसम्बर 1912 ई को रासबिहारी बोस ने दिल्ली में वायसराय लार्ड हार्डिंग पर बम फेका. इसके परिणाम स्वरूप 13 व्यक्ति गिरफ्तार किये गए इसमें प्रमुख थे. मास्टर अमीचंद, दीनानाथ दवाब में आकर सरकारी गवाह बन गए और मास्टर अमीचंद अवधबिहारी लाल बाल मुकुंद और बसंत कुमार विश्वास को फाँसी दे दी गई.

 

एक नवम्बर 1913 ई ने अनेक भारतीयों ने लाला हरदयाल के नेतृत्व ने सैनफ्रांसिस्को अमेरिका में गदर पार्टी की स्थापना की, सोहनसिंह भक्खना इसके प्रथम अध्यक्ष लाला हरदयाल इसके प्रथम मंत्री और काशीराम कोषाध्यक्ष चुने गये थे.

 

1915 ई में अंग्रेज सरकार ने कैसर ए हिन्द की उपाधि से महात्मा गाँधी को सम्मानित किया.

 

कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन 1916 ई में कांग्रेस के दोनों दलों में एकता हो गई. इसी अधिवेशन १९१६ ई में कांग्रेस के दोनों दलों में एकता हो गई. इसी अधिवेशन में मुस्लिम लीग ने भी कांग्रेस से मिलकर एक संयुक्त समिति की स्थापना की.

बाल गंगाधर तिलक ने स्वशासन प्राप्ति हेतु मार्च 1916 ई को पुना में होमरूम लीग की स्थापना की.

एनी बेसेंट ने सितम्बर 1916 ई में मद्रास में होमरूम लीग को स्थापना की. जार्ज अरुण्डैल को लीग का सचिव बनाया.

गाँधीजी ने प्रथम विश्व युद्ध के समय लोगों को सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया. इसलिए लोगो ने इन्हें भर्ती कराने वाला सार्जेंट कहने लगे.

1916 ई में गांधीजी ने अहमदाबाद के करीब साबरमती आश्रम की स्थापना की.

बिहार के एक किसान नेता राजकुमार ने गांधीजी को चम्पारण आने को प्रेरित किया.

गाँधीजी ने सत्याग्रह का सर्वप्रथम प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में किया. भारत में सत्याग्रह का पहला प्रयोग 1917 ई में चम्पारण में किया गया.

चम्पारण विद्रोह के कारण अंग्रेजो को तीनकठिया प्रथा को समाप्त करना पड़ा.

बेसेंट ने 20 अगस्त 1917 ई को होमरूम लीग को समाप्त करने की घोषणा की.

महात्मा गाँधी ने पहली बार भूख हड़ताल अहमदाबाद मिल मजदूरों के हड़ताल 1918 ई के समर्थन में की थी.

गांधीजी ने 1918 ई में गुजरात के खेडा जिले में कर नही आन्दोलन चलाया.

India Freedom Struggle

India Freedom Struggle

19 मार्च 1919 ई को रौलट एक्ट लागू किया गया. इसके अनुसार किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाये गिरफ्तार किया जा सकता था, परन्तु उसके विरुद्ध न कोई अपील न कोई दलील और न कोई वकील किया जा सकता था.

गाँधी ने इस कानून के विरुद्ध 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल करवाई.

13 अप्रैल 1919 ई को अमृतसर में जालियावाला बाग हत्याकांड हुआ. डॉ सतपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में हो रही जनसभा पर जेनरल डायर ने अंधाधुंध गोली चलवाई. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार इसमें 379 व्यक्ति और कांग्रेस समिति के अनुसार लगभग 1000 व्यक्ति मारे गए.

जलियांवाला बाग़ हत्याकांड में हंसराज नामक भारतीय ने डायर का सहयोग किया था.

शंकरन नायर ने जालियावाला बाग़ हत्याकांड के विरोध में वायसराय की कार्यकारिणी परिषद के सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

India Freedom Struggle में जलियावाला बाग़ हत्याकांड की जाँच के लिए सरकार ने 19 अक्टूबर 1919 ई में लाई हंटर की अध्यक्षता के एक कमेटी का गठन किया. इसमें पाँच अंग्रेज और तीन भारतीय सर चिमन लाल सीतलवाड, साहबजादा सुल्तान अहमद और जगत नारायण सदस्य थे.

कांग्रेस ने जालियावाला बाग़ हत्याकांड की जाँच के लिए मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में एक आयोग नियुक्त किया. इसके अन्य सदस्यों में मोतीलाल नेहरु और गांधीजी थे.

कांग्रेस ने जालियावाला बाग़ हत्याकांड की जाँच के लिए मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में एक आयोग नियुक्त किया. इसके अन्य सदस्यों में मोतीलाल नेहरु और गांधीजी थे.

जालियावाला बाग़ कभी जल्ली नामक व्यक्ति की सम्पत्ति थी.

खिलाफत आन्दोलन भारतीय मुसलमानों का मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध विशेषकर ब्रिटेन के खिलाफ टर्की के खिलाफा के समर्थन में आदोंलन था.

19 अक्टूबर 1919 ई को समूचे देश में खिलाफत दिवस मनाया गया.

23 नवम्बर 1919 ई को हिन्दू और मुसलमानों की एक संयुक्त कांफ्रेंस हुई, जिसकी अध्यक्षता महात्मा गाँधी ने की.

रालेट एक्ट जलियावाला बाग कांड और खिलाफत आन्दोलन के उत्तर में गाँधी जी ने 1 अगस्त 1920  ई को असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ किया. असहयोग आन्दोलन की पुष्टि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दिसम्बर 1920 ई के नागापुर अधिवेशन में की.

मुहम्मद अली को सर्वप्रथम असहयोग आन्दोलन में गिरफ्तार किया गया.

मुहम्मद अली जिन्ना, एनी बेसेंट तथा विपिन चंद्रपाल कांग्रेस के असहयोग आन्दोलन से सहमत नहीं थे. अत: उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी.

India Freedom Struggle में पांच फरवरी 1922 ई को गौरखपुर जिले के चौरी चौरा नामक स्थान पर असहयोग आन्दोलनकारियों ने क्रोध ने आकर थाने में आग लगा दी, जिसमे एक थानेदार और 21 सिपाहियों की मृत्यु हो गई. इस घटना से दुषित होकर गांधीजी ने 11 फरवरी 1922 ई को असहयोग आन्दोलन स्थगित कर दिया.

13 मार्च 1922 ई को गाँधीजी को गिरफ्तार कर 6 वर्ष की कड़ी कारावास की सजा सुनाई गई, स्वास्थ्य सम्बंधी कारणों से गाँधी को 5 फरवरी 1924 ई को रिहा कर दिया गया.

1922 ई के मेवाड़ भील आन्दोलन का नेता मोतीलाल तेजावत था.

1923 ई में इलाहाबाद में चितरंजनदास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस के अंतर्गत स्वराज्य पार्टी की स्थापना की.

महात्मा गाँधी सिर्फ एक बार कांग्रेस के बेलगाँव अधिवेशन 1924 में इसके अध्यक्ष चुने गए.

शचीन्द्र सान्याल ने 1924 ई में हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की. भगत सिंह ने 1928 ई में इसका नाम बदल कर हिन्दुस्तान सोशललिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन रख दिया.

India Freedom Struggle में 9 अगस्त 1925 ई को जब रेलगाड़ी से सरकारी खजाना सहारनपुर से लखनऊ की और जा रहा था, तो इसे काकोरी नामक स्टेशन पर लूट लिया गया. इसे ही काकोरी कांड कहा गया. सरकारी खजाना लुटने का विचार राम प्रसाद बिस्मल का था. इसमें राम प्रसाद बिस्मल राजेन्द्र लाहिड़ी, रोशन सिंह और अशफाकउल्ला खाँ को दिसम्बर 1927 ई में फाँसी दे दी गई और शचीन्द्र सान्याल को आजीवन कारावास की सजा मिली. मन्मथनाथ गुप्त को 14 वर्ष की कैद हुई.

सम्भवत: अशफाकउल्ला खाँ पहले भारतीय क्रन्तिकारी मुसलमान थे, जो देश की स्वतंत्रता के लिए फाँसी के तख्ते पर लटके थे.

साइमन कमीशन 3 फरवरी 1928 ई को भारत आया. इसे वाईट मैं कमीशन भी कहते है.

India Freedom Struggle में 30 अक्टूबर 1928 ई को लाहौर में साइमन आयोग के विरुद्ध प्रदर्शन करते समय पुलिस की लाठी से लाला लाजपत राय घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई.

साइमन कमीशन का बहिष्कार न करने वाले दो दल थे. जस्टिस पार्टी और पंजाब यूनियस्टी पार्टी.

भगतसिंह के नेतृत्व में पंजाब के क्रांतिकारियों ने 17 दिसम्बर 1928 ई को लाहौर के तत्कालीन सहायक पुलिस कप्तान सॉण्ड्स को गोली मार दी.

पब्लिक सेफ्टी बिल पास होने के विरोध में 8 अप्रैल 1929 ई को बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह ने सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में खाली बेंचों पर बम फेका.

1929 ई के कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य का अपना लक्ष्य घोषित किया.  इस अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहर लाल नेहरु कर रहे थे. 31 दिसम्बर 1929 ई को रात 12 बजे जवाहर लाल नेहरु ने रावी नदी के तट पर नव गृहीत तिंरगे झंडे को फहराया. इसी अधिवेशन ने 26 जनवरी 1930 ई को प्रथम स्वाधीनता दिवस के रूप में मानने का निश्चय किया गया. इसी के साथ प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने जाने की परम्परा शुरु हुई.

12 मार्च 1930 ई को गाँधीजी ने अपने 79 समर्थको के साथ साबरमती स्थित अपने आश्रम से 240 किमी 200 मील दूर डांडी के लिए प्रस्थान किया. लगभग 24 दिनों बाद 6 अप्रैल 1930 ई को डांडी पहुँच कर गांधीजी ने नमक कानून तोडा. सुभाष चन्द्र बोस ने गांधीजी के नमक सत्याग्रह की तुलना नेपोलियन के पेरिस यात्रा से की.

8 मार्च 1931 ई को गाँधी इरविन पैक्ट हुआ. इसके बाद गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित कर दिया.

गाँधी इरविन समझौता को दिल्ली समझौता के नाम से भी जाना जाता है.

दूसरा गोलमेज सम्मेलन 7 दिसम्बर 1931 ई को हुआ. महात्मा गाँधी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में इसमें भाग लिया. परन्तु यह सम्मेलन सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के कारण असफल रहा.

नोट – प्रथम गोलमेज सम्मेलन 12 नवम्बर 1930 ई और तृतीय गोलमेज सम्मेलन 17 नवम्बर 1932 ई में हुआ.

तीनो गोलमेज सम्मेलन के समय इंग्लैंड का प्रधानमन्त्री जेम्स रेम्जे मैकाडोनाल्ड था.

India Freedom Struggle में दूसरे गोलमेज सम्मेलन की असफलता के बाद गाँधी के 3 जनवरी 1932 ई पुन: सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया. सविनय अवज्ञा आन्दोलन अंतिम रूप से 7 अप्रैल 1934 को वापस लिया गया.

सविनय अवज्ञा आन्दोलन में पठान सत्याग्रहियों पर गोली चलाने से गढ़वाल रायफल्स ने इंकार कर दिया.

चन्द्रशेखर आजाद पुलिस मुठभेड़ में 23 फरवरी 1931 ई को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हुए.

23 मार्च 1931 ई को सुखदेव भगत सिंह और राजगुरु को फाँसी पर लटका दिया गया.

मई 1934 ई कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना हुई.

India Freedom Struggle में 1939 ई में महात्मा गाँधी द्वारा प्रस्तावित प्रत्याशी पट्टाभि सीतारमैय्या को हटाकर सुभाष चन्द्रबोस कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए.

1 मई 1939 ई को सुभाष चन्द्र बोस ने कांग्रेस के भीतर ही एक नए गुट का गठन किया. जिसे फारवर्ड ब्लाक कहा गया. सुभाष चन्द्र बोस ने स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान फ्री इन्डियन लीजन नामक सेना बनायी थी.

13 मार्च 1940 ई को लंदन में पंजाब के सुनाम नामक स्थान के सरदार ऊधमसिंह ने पंजाब के भूतपूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर डायर की गोली मारकर हत्या कर दी.

गांधीजी ने 17 अक्टूबर 1940 ई को पावनार ने व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन शुरु किया. इस आन्दोलन के प्रथम सत्याग्रही बिनोबाभावे, दुसरे सत्याग्रही जवाहर लाल नेहरु और तीसरे सत्याग्रही ब्रह्रादत्त थे, इस आन्दोलन को दिल्ली चलो, आन्दोलन भी कहा गया.

24 मार्च 1940 ई को मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में अध्यक्षता करते हुए मुहम्मद अली जिन्ना ने भारत से अलग मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान की मांग की. मुस्लिम लीग के 1940 ई के दिल्ली अधिवेशन में खलीकुज्ज्मान ने पाकिस्तान नाम से अलग राष्ट्र का प्रस्ताव रखा.

वर्धा 1942 ई में कांग्रेस ने अंग्रेजो भारत छोड़ों प्रस्ताव पारित किया.

7 अगस्त 1942 ई को कांग्रेस की बैठक बम्बई के एतिहासिक ग्वालिया टैंक में हुई.

गाँधी के भारत छोड़ों प्रस्ताव को कांग्रेस कार्य समिति ने 8 अगस्त 1942 ई को स्वीकार कर लिया.

भारत छोड़ों आन्दोलन की शुरुआत 9 अगस्त 1942 ई को हुई. इसी आन्दोलन में गांधीजी ने करो या मरो का नारा दिया.

India Freedom Struggle में 9 अगस्त 1942 ई को सवेरे ही गांधीजी और कांग्रेस के अन्य सभी महत्वपूर्ण नेता गिरफ्तार कर लिए गये. गांधीजी को पूना के आगा खाँ महल में तथा कांग्रेस कार्य कारिणी के अन्य सदस्यों को अहमदनगर के दुर्ग में रखा गया था. राजेन्द्र प्रसाद को भी नजरबंद कर दिया गया था. 9 मई 1944 ई को गाँधी जी को जेल से छोड़ा गया.

India Freedom Struggle में आजाद हिन्द फौज की स्थापना का विचार सर्वप्रथम कैप्टन मोहन सिंह के मन में आया.

आजाद हिन्द फौज की प्रथम डिवीजन का गठन 1 सितम्बर 1942 ई को कैप्टन मोहन सिंह के द्वारा किया गया परन्तु वह असफल रहा.

आजाद हिन्द फौज का सफलतापूर्वक स्थापना का श्रेय रास बिहारी बोस को दिया जाता है.

अक्टूबर 1943 ई में सुभाष चन्द्रबोस को आजाद हिन्द फौज का सर्वोच्च सेनापति बनाया गया था. आजाद हिन्द फौज के तीन ब्रिगेडों के नाम सुभाष ब्रिगेड, गाँधी ब्रिगेड और नेहरु ब्रिगेड. महिलाओ के ब्रिगेड का नाम लक्ष्मीबाई रेजिमेंट था.

आजाद हिन्द फौज का झंडा कांग्रेस के तिरंगे झंडे की भांति था, जिस पर दहाड़ते हुए शेर का चिन्ह था.

8 नवम्बर 1943 ई को जापान ने अंडमान और निकोबार द्वीप सुभाष चन्द्र बोस को सौंप दिए. नेता जी ने इनका नाम क्रमश: शहीद द्वीप और स्वराज्य द्वीप रखा.

टोकियों जाते हुए फर्मुसा द्वीप के बाद अचानक हवाई जहाज में आग लग जाने से सुभाष चन्द्र बोस 18 अगस्त 1945 ई को मारे गए. परन्तु इस दुर्घटना को अभी तक प्रमाणिक नहीं माना गया है.

नोट – India Freedom Struggle में सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 ई को कटक उड़ीसा में हुआ था. मेजर शाहनवाज खाँ पर राजद्रोह का आरोप लगाकर दिल्ली के लाल किले पर नवम्बर 1945 ई में मुकदमा चलाया गया. वायसराय ने इनकी सजा माफ कर दी.

आजाद हिन्द फौज के अधियुक्तों की तरफ से तेजबहादुर सप्रू जवाहर लाल नेहरु, भोला भाई देसाई और के. एन. काटजू ने पैरवी की.

कराची ने 20 फरवरी 1946 ई वायुसेना के कुछ सैनिको ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध हड़ताल कर दी. बम्बई, लाहौर, दिल्ली में भी यह शीघ्र ही फैल गई. इसमें लगभग 5200 सैनिकों ने भाग लिया. इनकी प्रमुख माँग थी कि भारतीय और अंग्रेज सैनिको में बराबरी का व्यवहार किया जाय.

नौसेना विद्रोह 19 फरवरी 1946 ई को मुंबई आई. एन. एस तलवार नामक जहाज के नौसैनिकों के द्वारा किया गया. 5000 सैनिको ने आजाद हिन्द फौज के बिल्ले लगाये. इन्होने भी बराबरी की माँग की.

India Freedom Struggle में कैबिनेट मिशन योजना को स्वीकार किये जाने के पश्चात् संबिधान सभा के निर्माण के लिए हुए चुनाव जुलाई 1946 ई में कांग्रेस ने 214 सामान्य स्थानों में से 205 स्थान प्राप्त किये और मुस्लिम लीग ने 78 मुस्लिम स्थानों में से 73 स्थान प्राप्त किये. कांग्रेस को 4 सिक्ख सदस्यों का भी समर्थन प्राप्त था.

मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 ई को सीधी कार्यवाई दिवस मनाया.

27 मार्च 1947 ई को मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान दिवस के रूप में मनाया.

जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व के अंतरिम सरकार का गठन 2 सितम्बर 1946 ई को हुआ. 26 अक्टूबर 1946 ई को लीग अंतरिम सरकार में सम्मिलित हुई.

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय कांग्रेस के अध्यक्ष जे. बी. कृपलानी और ब्रिटेन के प्रधान मंत्री क्लीमेंट एटली लेबर पार्टी थे.

भगत सिंह के विरुद्ध मुखबिर करने के कारण फणीन्द्र घोष की हत्या बैकुंठ शुक्ल ने की थी.

महात्मा गाँधी द्वारा स्थापित हरिजन सेवक संघ के संस्थापक अध्यक्ष घनश्याम दास बिंडला थे.

India Freedom Struggle में गाँधीजी ने कांग्रेस की सदस्यता से दो बार त्यागपत्र दिया. 1925 में और 1930 ई में.

बाटों और छोड़ो का नारा लीग ने दिसम्बर 1943 ई के कराँची अधिवेशन ने दिया.

कांग्रेस का प्रथम ब्रिटिश अध्यक्ष जार्ज युल थे.

मैं देश की बालू से ही कांग्रेस से भी बड़ा आन्दोलन खड़ा कर दूंगा. यह कथन है महात्मा गाँधी का.

डंडा फौज का गठन पंजाब में चमनदीप ने किया.

दीनबंधु मित्र का नाटक नील दर्पण में नील की खेती करने वाले पर हुए अत्याचार का उल्लेख है.

राष्ट्रवादी अहरार आन्दोलन मजहर उल हक़ ने प्रारम्भ किया.

आत्मसम्मान आन्दोलन की शुरुआत रामस्वामी नायकर ने की.

निरंकारी आन्दोलन की शुरुआत दयालदास ने की.

India Freedom Struggle में ब्रम्हासमाज का प्रतिज्ञापत्र देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने तैयार किया.

देवसमाज के संस्थापक शिव नायायण अग्निहोत्री थे.

तरुण स्त्रीसभा की स्थापना कलकत्ता में की गई.

भारत, भारतीयों के लिए यह नारा आर्य समाज ने दिया.

अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना लखनऊ में हुई.

स्वामी विवेकानंद ने 1893 ई में शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन को सम्बोधित किया.

दिल्ली षड्यंत्र केस में दीनानाथ के द्वारा मुखबिरी की गई थी.

अलीपुर केस में सरकारी गवाह नरेंद्र गोसाई बन गया था.

India Freedom Struggle में चन्द्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 ई को मध्य भारत के भावरा नामक गाँव में हुआ था.

सबसे कम उम्र में फाँसी की सजा पानेवाला क्रांतिकारी खुदीराम बोस था.

इन्कलाब जिंदाबाद का नारा भगत सिंह ने दिया.

शहीद ए आजम के नाम से भगत सिंह को जाना जाता है.

भगत सिंह को फाँसी की सजा सुनानेवाला न्यायाधीश जी. सी हिल्टन था.

सबके लिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर का नारा श्री नारायण गुरु ने दिया.

सर्वन हिन्दुओ की फांसीवादी कांग्रेस कहकर कांग्रेस का चरित्र निरूपण मोहम्मद अली जिन्ना ने किया.

मैं एक क्रांतिकारी के रूप में कार्य करता हूँ. यह कथन है जवाहर लाल नेहरू का.

India Freedom Struggle में महात्मा गाँधी को रवीन्द्र नाथ टैगौर ने सर्वप्रथम महात्मा कहा.

महात्मा गाँधी को सर्वप्रथम राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित सुभाष चन्द्र बोस ने किया.

बल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि बारदोली सत्याग्रह की सफलता के बाद वहाँ के महिलाओं की और से गाँधी जी ने प्रदान की.

सुभाष चन्द्र बोस को सर्वप्रथम नेताजी एडोल्फ हिटलर ने कहा था.

गोखले के आध्यात्मिक और राजनीतिक गुरु एम. जी. रानाडे थे.

महात्मा गाँधी के राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले थे.

सुभाष चन्द्र बोस के राजनीतिक गुरु देशबंधु चितरंजन दास थे.

भारत का बिस्मार्क सरदार बल्लभ भाई पटेल को कहा जाता है.

शुद्धि आन्दोलन के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती थे.

India Freedom Struggle में 19 वी शताब्दी के भारतीय पुनर्जागरण का पिता राजा राममोहन राय को कहा जाता है.

अखिल भारतीय हरिजन संघ की स्थापना महात्मा गाँधी ने की थी.

चर्चिल ने महात्मा गाँधी को अर्धनग्न फ़क़ीर कहा था.

राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद से सम्बंधित है.

यंग बंगाल आन्दोलन का प्रवर्तक विवियन डेरीजियो था.

काग्रेस ने मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में भारत छोड़ो प्रस्ताव को पारित किया.

भारत के पितामह दादाभाई नौरोजी को कहा जाता है.

गोपाल हरि देशमुख को लोकहितवादी के नाम से भी जाना जाता है.

बिना ताज का बादशाह सुरेन्द्रनाथ बनर्जी को कहा जाता है.

ए. ओ. ह्रूम को हरमिट ऑफ़ शिमला कहा जाता है.

ए. ओ ह्रूम 1885 – 1907 ई तक कांग्रेस के महामंत्री रहे.

India Freedom Struggle में कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष बदरुद्दीन तैयबजी थे.

रौलेट एक्ट के बिना अपील, बिना वकील तथा बिना दलील का कानून कहा गया.

मुहम्मद अली और शौकतअली ने 1920 ई में खिलाफत आन्दोलन की शुरुआत की.

तीनो गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेने वाले भारतीय नेता थे. डॉ भीमराव अम्बेडकर.

22 दिसम्बर 1939 ई को कांग्रेस मंत्रिमंडल ने सामूहिक रूप से त्यागपत्र दिया. इस दिन को मुस्लिम लीग ने मुक्ति दिवस के रूप में मनाया.

पाकिस्तान शब्द का जन्मदाता चौधरी रहमत अली थे.

गांधीजी ने क्रिप्स प्रस्ताव पर कहा यह एक आगे की तारीख का चेक है. जिसका बैंक नष्ट होने वाला है.

India Freedom Struggle में तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा. और जय हिन्द यह नारा सुभाष चन्द्र बोस ने दिया.

इंडिया इन्डिपेंड्स लीग की स्थापना रास बिहारी बोस ने की थी.

राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरन कुख्यात सेलुलर जेल अंडमान में स्थित है.

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