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प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन 0

प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन

प्रकृति के क्रिया मैथलीशरण गुप्त द्वारा प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन है बिखरे देती वसुंधरा मोती सबके सोने पर, रवि बटोर लेता है उनको सदा सबेरा होने पर. और विरामदायनी अपनी संध्या को दे जाता है, शून्य श्याम तनु जिससे उसका नया रूप झलकता है. सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियो में कवि मैथलीशरण गुप्त ने प्रकृति के...

मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित स्वच्छ चाँदनी के बारे में हिंदी भाषा में जानकारी 1

स्वच्छ चाँदनी मैथलीशरण गुप्त

क्या ही स्वच्छ चाँदनी है यह है क्या ही निस्तब्ध निशा, है स्वच्छ सुमंद गंध वह निरानंद है कौन दिशा? – स्वच्छ चाँदनी बंद नहीं, अब भी चलते है नियति नटी के कार्य कलाप पर कितने एकांत भाव से कितने शांत और चुपचाप. सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पद्यांश श्री मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित पंचवटी से अवतरित है. यहाँ पर...

चारू चन्द्र की चंचल किरणें 0

चारू चन्द्र की चंचल किरणें

चारू चन्द्र की चंचल किरणें खेल रही है जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बल में. पुलक प्रकट करती है धरती हरित तृणों की नौकों से, मानो झूम रहे है तरु भी मंद पवन के झोकों से. सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पद्याश राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त द्वारा रचित पंचवटी खंडकाव्य से है. यहाँ पर कवि...

पंचवटी का सारांश 1

पंचवटी का सारांश Summary of Panchavati

पंचवटी का सारांश पंचवटी राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त का प्रसिद्ध खंडकाव्य है. भगवान श्री राम ने सीता और लक्ष्मण सहित चौदह वर्ष की वनवास अवधि में तेरह वर्ष पंचवटी नामक वन में बिताये थे. पंचवटी महाराष्ट्र में नासिक के निकट गोदावरी नदी के तट पर स्थित है. पंचवटी के प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन इस खंडकाव्य में किया गया है....

मैथलीशरण गुप्त 0

मैथिलीशरण गुप्त जीवन परिचय

मैथिलीशरण गुप्त मैथिलीशरण गुप्त का जन्म उत्तर प्रदेश के झाँसी जनपद के अंतर्गत चिरगांव के एक प्रतिष्ठित वैश्य परिवार में 13 अगस्त 1886 को हुआ था. इनके पिता सेठ रामचरण निष्ठावान राम भक्त तथा कवि थे. अत: गुप्तजी को कविता करने कि प्रेरणा अपने पिता से प्राप्त हुई. सरस्वती के सम्पादक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सम्पर्क में...

हिंदी कविता विकासक्रम 0

हिंदी कविता विकासक्रम | Hindi Poetry Development

हिंदी कविता विकासक्रम हिंदी साहित्य का प्रारम्भ पध्य रचना से हुआ. इसलिए हिंदी कविता विकासक्रम हिंदी साहित्य का इतिहास कविता के विकासक्रम से जुड़ा है. हिंदी भाषा का प्रारम्भ लगभग आठवी नवी शताब्दी से ही हो गया था. लेकिन उसका व्यवस्थित तथा निश्चित स्वरूप दसवी शताब्दी में मिलता है. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का प्रारम्भ संवत...

हिंदी कविता 0

कविता के विषय | कविता के रूप | हिंदी कविता

 कविता के विषय कविता के विषय अनंत है. वस्तुतः व्यक्ति और समाज के जीवन का कोई भी पक्ष काव्य का विषय बन सकता है . आज का कवि जीवन के सामान्य तथा उपेक्षित पक्ष पर भी रचनाये कर रहा है. उसके विषय महापुरुषों तक ही सीमित नही है. अपितु वह छिपकली, केंचुआ तथा मेढक आदि पर भी काव्य...

हिंदी लोकोक्तियाँ 0

हिंदी लोकोक्तियाँ | हिंदी मुहावरे | मुहावरों का संग्रह

हिंदी लोकोक्तियाँ हिंदी लोकोक्तियाँ में अंधे के हाथ बटेर लगना (अयोग्य व्यक्ति को बिना मेहनत के लाभ प्राप्त होना) – मोहन बिलकुल नहीं पढ़ता था, कक्षा में भी कमजोर था. परन्तु प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो गया, सचमुच अंधे के हाथ बटेर लग गई. अन्धो में काना राजा (मूर्खों के मध्य अल्पग्य ही ज्ञानी) – रामू ही इस...

हिंदी में मुहावरे 0

हिंदी में मुहावरे | Idioms Meaning | मुहावरों का अर्थ

हिंदी में मुहावरे मुहावरे ऐसे कथन होते है, जो जीवन में संचित अनुभवों के आधार पर किसी समाज विशेष में प्रचलित हो जाते है. ऐसे ही हिंदी में मुहावरे का प्रयोग होने से कथन में आकर्षण तथा प्रभाव उत्पन्न हो जाता है. इससे भाषा सरस, सरल तथा सुबोध बन जाती है. मुहावरे सामान्य अर्थ न बतलाकर विशेष अर्थ...

विज्ञान निबंध 0

विज्ञान निबंध | Science Essay | विज्ञान के चमत्कार

विज्ञान निबंध विज्ञान निबंध में आप अपने जीवन में इस्तेमाल होने वाले विज्ञान वरदान या अभिशाप विज्ञान एक शक्ति है, जो नित नए अविष्कार करती है. वह शक्ति न तो अच्छी है, न बुरे वह तो केवल शक्ति है. अगर हम उस शक्ति से मानव कल्याण के कार्य करे तो वह वरदान प्रीतित होती है. अगर उसी से...