Plant Wildlife Economic Life Information


पृथ्वी से जुडीं भूमि, वन्य जगत, नदियों के धरातलीय और आर्थिक जीवन के बारे में जानकारी (Land and The People, Plant Wildlife Economic Life Information)

मनुष्य और पर्यावरण एक दूसरे पर निर्भर करते है. मनुष्य की जीवन शैली और गतिविधियों पर ही भौतिक और प्राकृतिक पर्यावरण आश्रित है. मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ही पर्यावरण में बदलाव भी किया है. विभिन्न प्रदेशों में समान पर्यावरण होने पर भी मनुष्य के विभिन्न क्रियाकलापों में अंतर होता है. जैसे कि गंगा ब्रह्मपुत्र बेसिन जैसा आर्थिक या सांस्कृतिक जीवन पाया जाता है वैसा अमेजन बेसिन में नहीं पाया जाता. इसी प्रकार संसार के घास स्थल के सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन में भी भिन्नता दिखाई पड़ती है. आस्ट्रेलिया का डाउन्स घास प्रदेश उत्तरी अमेरिका के प्रेयरी से सर्वथा भिन्न है. आइये अब हम संसार के विभिन्न प्रदेशों के (Plant Wildlife Economic Life Information) जीवन की प्रतिरूपता की विस्तार से चर्चा करें.




 

प्रेयरी (Prairie)

यह उत्तरी अमेरिका का विशाल घास का मैदान है. इसका अधिकतर भाग संयुक्त राज्य में स्थित है. इसका उत्तरी भाग कनाडा में है. इस घास प्रदेश के दक्षिण पूर्व में बड़ी-बड़ी झीले स्थित है.

 

मिट्टी और नदियों के धरातल (Surface soil and Rivers)

Plant Wildlife Economic Life Information यहाँ का धरातल चौरस होने के साथ ही लहरदार भी है. यह पश्चिम की और से धीरे धीरे ऊँचा हो गया है. इसके कनाडा वाले भाग में संस्केचवान नदी एवं उसकी सहायक नदियाँ बहती है और सयुक्त राज्य अमेरिका वाले भाग में मिसीसिपी एवं उनकी सहायक नदियाँ बहती है. इन नदियों के द्वारा लाइ गई मिट्टी बहुत उपजाऊ है. यह प्रदेश विश्व का सबसे अधिक गेहूँ उत्पादन करता है.

 

प्रदेशों की जलवायु (Climate Regions)

प्रेयरी प्रदेश के प्रभाव से बहुत दूर है इसलिए यहाँ की जलवायु शीतोष्ण कटिबंधीय प्रदेशों की अपेक्षा ठंडों और शुष्क है. शीतकाल यहाँ बहुत ठंडा होता है. ग्रीष्म काल गर्म (कौण) होता है. वार्षिक वर्षा बहुत कम होती है. शीतकाल में हिमवर्षा होती है. अधिकांश वर्षा ग्रीष्म और बसंत ऋतु में होती है. इसके उत्तरी भाग में ठंडी हवाएं चलती है. जो ध्रुवीय क्षेत्रों से आती है.

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वनस्पति और वन्य जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी (Important Information about Plant the Wildlife )

वर्षा की अधिकता के कारण यहाँ पेड बहुत कम है. पूर्वी भाग में लंबी घास होती है क्योकि यह भाग आद्र है, पश्चिमी भाग शुष्क है इसलिए यहाँ पर छोटी-छोटी घास है. विलो, एल्डर और पोपलर के वृक्ष रौकी पर्वत के ढालों पर उगते है. प्रेयरी प्रदेश में वनस्पति की अभाव के कारण खेतों को साफ़ करके फसल उगाने और पालने के लिए फार्मों का निर्माण किया गया है.

अब यहाँ के जंगलों से जंगली पाइसन तथा भेड़िये लुप्त हो गए है. यहाँ पर कुत्ते, कोयोट, जैक, रैविट, वैजर लार्क, हाक तथा रेटल स्नेक आदि साँप और विभिन्न प्रकार के जंतु पाए जाते है. ग्रासहापर्स नामक कीट पतंगे तथा मक्खियाँ बहुतायत में है.

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आर्थिक जीवन (Economic Life  Related Things)

यहाँ का प्रमुख व्यवसाय पशुपालन है. यहाँ पर रेंज नामक बड़े-बड़े फार्मों में पशु पालते है. उन्हें मक्का खिलाकर मोटा किया जाता है. फिर उन्हें वधशालाओं में भेजा जाता है. पश्चिम के शुष्कतर क्षेत्रों में गाय, भैस पाली जाती है. यहाँ पर रेंच २००० एकड़ से भी अधिक विशाल होते है. कहीं कहीं तो ये एक लाख एकड़ में फैले होते है. ग्रीष्म और शरद ऋतु में चलने वाली चिनुक हवाएँ घास को चारे में बदल देती है. यह चारा ही पशुओं का मुख्य आहार है. पशुओं की देखरेख के लिए चरवाहे होते है.

यहाँ गेहूँ के विशाल फ़ार्म है जो यंत्रीकृत होते है. प्रेयरी की मुख्य उपज गेहूँ है, इसके अतिरिक्त यहाँ पर जौ और जई का भी उत्पादन किया जाता है. यहाँ गेहूँ बसंत ऋतु में बोया जाता है तथा अगस्त के महीने में काटा जाता है. फसल काटने तथा दाना निकालने का काम मशीन द्वारा होता है. कनाडा में विनीपेग नामक एक विशाल गेहूँ की मंडी है जहाँ गेहूँ तथा अन्य खाद्यान रेलों द्वारा भेजे जाते है.

कनाडा में बैंडन, रेजीना, एडमंटन सस्केटन, केलगरी आदि मुख्य नगर है. बिस्मार्क, स्प्रंगफिल्ड, लिंकन, सेंटपाल, मिनियापोलस तथा क्न्साल संयुक्त राज्य अमेरिका के मुख्य नगर है. विश्व की सबसे बड़ी मंडी शिकागो, प्रेयरी के पूर्वी किनारे पर स्थित है. यह सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन है साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रमुख ओद्योगिक तथा वाणिज्यिक केंद्र है.

प्रेयरी मुख्य रूप से खेती पर आधारित है. यहाँ का प्रमुख उद्योग माँस की पैकिंग और खाद्य प्रसंस्करण है. इसके  अतिरिक्त यहाँ तेल-शोधन पर लोहा-इस्पात, मोटर गाड़ियाँ, जलयान निर्माण आदि उद्योग फल फूल रहे है.

सन १८८५ से १९१५ के मध्य में प्रेयरी में बस्तियों की स्थापना हुई घास के प्रदेशों को साफ़ करके फ़ार्म तथा परिवहन जाल का विकास किया गया जिसका पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. अपरदन तथा अकालों में बढ़ोत्तरी हुई

पवन अपरदन अंक सक्रिय हुआ परिणामस्वरूप मिट्टी की ऊपरी परत उपजाऊ से ह्रामुस संयुक्त सूक्ष्म चीका की परत का अपरदन हो गया. इसके गंभीर परिणामो को सोचकर सरकार ने संरक्षण के उचित उपाय करने शुरू कर दिए है. जिनमे पशुचारण पर रोक तथा लंबी घास लगाना सम्मिलित है.

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प्रारम्भिक लोग (Early People)

ये घास के मैदान यूरोपियनों के आने से पहले अमेरिकन इंडियन के निवास स्थान थे. इन लोगो को ब्लेक फुट इंडियन कहा जाता था. इसके अतिरिक्त यहाँ अपाचे, क्रो, पाउनी तथा क्री नामक आदिम जातियाँ रहती थी. ये आखेट तथा भोजन संग्रह द्वारा जीवन यापन करती थी. यहाँ की स्थलाकृति पूर्वी कनाडा और ब्रिटिश द्वीप समूहों से आकर बसने वाले लोगो के द्वारा परिवर्तित कर दी गई.

इन लोगो ने घास के मैदान को साफ़ करके फार्म बनाएँ. १८८५ में यहाँ पर रेलमार्ग बनाएँ गए. इन रेलमार्गों के सहारे लोगों ने अपनी बस्तियाँ बना ली. आज यहाँ पर अधिकांश बस्तियाँ रेलमार्ग बनाएँ गए. इन रेलमार्गों के सहारे लोगो ने अपनी बस्तियाँ बना ली. आज यहाँ पर अधिकाश बस्तियाँ रेलमार्ग के सहारे ही बनी हुई है.

इस समय भारत में बनने वाले रेलमार्ग भी बड़े बड़े नगरों को जोड़ रहे है. कनाडा में रेलमार्ग बनने के बाद बस्तियाँ बनाई गई थी. इसके विपरीत भारत में पहले बस्तियाँ और फिर रेलमार्ग बने.

 

वेल्ड (Weld)

स्थिति वेल्ड दक्षिणी अफ्रीका के पठार के पूर्वी भाग में स्थित है. यह एक उपोष्ण कटिबंध घास का मैदान है. इसका क्षेत्रफल केप प्रान्त के पूर्वी भाग, सम्पूर्ण ओरेंज फ्री स्ट्रीट और ट्रांसवाल के सम्पूर्ण भाग में फैला है.

 

धरातल (Surface)

यह एक पठारी भाग है इसलिए समुद्र तल से इसकी ऊँचाई विभिन्न स्थान पर प्रथक प्रथक है ऊँचाई के अनुपात से इसको तीन भागों में बाँटा गया है.

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उच्च ब्लेड (High Blade)

यह पूर्वी भाग में स्थित है. इसकी ऊचाई ११२० मीटर से १६७० मीटर तक है. यह मध्यवर्ती कटक (श्रेणी) होने के कारण जल का विभाजन करती है. यहाँ कहीं-कहीं तीव्र ढालों वाली पहाड़ियाँ तो कहीं बाहर घाटियाँ है. यहाँ से निकलने वाली ओरेंज, लाल, साबी और लीपापो नदी दक्षिणी अफ्रीका की सबसे लम्बी नदी है यह अटलांटिक महासागर में गिरती है. मापुतो की खाड़ी में लिपोपो नदी बहती है.

मध्य वेल्ड की ऊँचाई लगभग ६१० मीटर से ११२० मीटर तक है. निम्न वेल्ड की ऊचाई ६१० मीटर से भी कम है.

 

ग्रीष्म  शीत जलवायु (Summer Cold Climate)

वेल्ड समुद्र के समीप ही है. यहाँ ग्रीष्म ऋतु छोटी होने के साथ ही उष्ण होती है. शीत ऋतु ठंडी होने के साथ लंबी होती है. वर्षा बहुत कम होती है. प्राय: अकाल पड़ते है.

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वनस्पति और वन्य जीवन

वर्षा अल्प होने के कारण यहाँ घासें ही उगती है. पश्चिम के शुष्क भागों में अकाल को सहन करने वाली वनस्पति उगती है. जहाँ जल उपलब्ध है वहाँ मरुला और एकेशिया के वृक्ष उगते है यहाँ संरक्षित क्षेत्रो में शेर, चीता, जिराफ, सेबल, सिप्रंग, बोक और ओरिक्स आदि जंतु पाए जाते है कगूर नामक राष्ट्रीय उद्योगों में इनका संरक्षण होता है.

 

आर्थिक जीवन

प्रेयरी क्षेत्र के ठीक विपरीत यहाँ धरातल अनुपजाऊ तथा चट्टानी है. इसलिए यहाँ कृषि का पूर्णत: अभाव है. साथ की यहाँ जल के संसाधन सीमित है और अकाल पड़ता रहता है. फिर भी वेल्ड की मुख्य फसले गेहूँ, जौ, मक्का, जेई, आलू, तम्बाकू, कपास, गन्ना आदि है.

वेल्ड पशुपालन के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ पश्चिमी शुष्क भाग में भेड़ पाली जाती है. जबकि पूर्वी आद्र भाग में अन्य पशु पाले जाते है. भेड़ मुख्यत: ऊन के लिए पाली जाती है. उच्च वेल्ड में प्राप्त होने वाले बहुमूल्य खनिज हीरा, सोना, युरेनियम, प्लेटेनियम, लोहा तथा कोयला है. हिरा मुख्य रूप से प्रिटोरिया और किबरले में उपलब्ध होता है.

रत्नों वाले हीरों के अतिरिक्त ओद्योगिक महत्व के हीरे यहाँ प्राप्त होते है. विट वाटर्स लैंड स्वर्ण प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध है. सोने के विशाल भंडारों के कारण ही इस प्रदेश में जोहांसेनबर्ग नामक नगर का विकास हुआ. सोने की प्राप्ति के कारण ही यहाँ लोहा, इस्पात, धात्विक पदार्थ, परिवहन उपकरण, रसायन आदि खनिज आधारित उद्योग तथा वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण तथा डेयरी पदार्थ जैसे कृषि आदि उद्योगों का विकास हुआ है. वेल्ड प्रदेश में खनन तथा विनिर्माणी उद्योग कृषि से अधिक उन्नतिशील है.

 

जनसंख्या (Population)

वेल्ड के मूल निवासी होटेंटोट कहलाते है. उनकी आजीविका के साधन पशुचारण, आखेट और भोजन संग्रह थे. अब इनकी जनसख्या बहुत कम हो गई है. यहाँ पर गौरों सहित अनेक प्रजातियाँ रहती है. सबसे पहले डच लोग यहाँ रहने आये, वे बोअर कहलाते थे. उद्योगों के विकास होने पर यहाँ अनेक नगर बस गए. यहाँ का विशालतम नगर जोहान्सबर्ग है. यहाँ की राजधानी और ओद्योगिक नगर प्रिटोरिया है. बुलावायो प्रमुख ओद्योगिक केंद्र तथा हरारे जिम्बाम्बे की राजधानी है.

 

अमेजन बेसिन (Amazon Basin)

अमेजन विश्व की द्वितीय विशालतम नदी है. इसमें बड़ी नदी नील नदी है. यदि पानी की मात्रा से विचार करें तो यह विश्व में सबसे बड़ी है. इसका अपवाह क्षेत्र विश्व में सबसे बड़ा है.

 

स्थिति

अमेजन बेसिन ब्राजील के अंतर्गत आता है. पश्चिम की और इसका विस्तार दक्षिणी अमेरिका के बोलीविया, इक्वेडोर, पीरु, कोलम्बिया तथा वेनेजुएला देशों में है. यह उत्तर पूर्व में गुयाना के तट के सहारे फैला है

 

धरातल

अमेजन बेसिन विश्व के प्रमुख मैदानों में से एक है. इसकी रचना अमेजन और उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई महीन मिट्टी से हुई. अधिक वर्षा मिट्टी के पोषक तत्व को बहा ले जाती है और मिट्टी अनुपजाऊ को जाती है. अमेजन नदी पश्चिम में पीरु के एंडीज पर्वतों से निकलकर पूर्व की और से बहती हुई अटलांटिक महासागर में गिर जाती है.

 

गर्म और आर्द्र जलवायु (Hot and Humid Climate)

यहाँ की जलवायु गर्म तथा आर्द्र है.दैनिक तथा वार्षिक ताप में कोई अंतर नहीं है. पूरे वर्ष आद्रता रहती है. रातें लम्बी व ठंडी होती है. यहाँ पूरे वर्ष भर वर्षा होती है. जिससे मौसम चिपचिपा व असहय रहता है. कुछ क्षेत्रों में ३५०० सेमी तक वर्षा होती है.

 

प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation)

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अमेजन बेसिन में सेल्वा नामक सघन वन पाए जाते है ये उष्ण कटिबंधीय वर्षा वाले वन है. आद्रता की अधिकता के कारण यहाँ अनेक प्रकार के वन पाए जाते है. साथ ही पौधें, झाड़ियाँ और लताएँ भी बहुतायत में पाई जाती है. यहाँ ताड़, महोगनी , रोजवुड, आबनूस आदि कठोर लकड़ी वाले वृक्ष पाए जाते है. यहाँ वनों के वितान बने हुए है जो इतने घने है कि सूर्य की की किरणे भी वनों के भीतरी भाग में प्रवेश नहीं कर पाती.

बेसिन को वनों से बहुत लाभ है. यहाँ बाल्सा नामक वृक्ष पाए जाते है. जिनकी लकड़ी बहुत हल्की होती है इसलिए वह नाव बनांने में प्रयोग की जाती है. कारनोबा नामक ताड़ के वृक्ष से मोम, सिलकोना वृक्ष की छाल से कुनैन प्राप्त होता है. इसके अतिरिक्त वनों से जंगली रबड़, रेजिन, सेलुलोज, तेल और रेशे भी प्राप्त होते है. चिकल से चुइंगम बनाया जाता है.

वन्य जीवन जीवों के लिए समृद्ध है (Rich wildlife organisms)

अमेजन बेसिन वन्य जीवन में भी बहुत समृद्ध है. यहाँ रंग बिरंगे जीव पाए जाते है. सरिस्रपों में मगरमच्छ, विशालकाय अनाकोंडा आदि मुख्य से रूप पाए जाते है. इसके अतिरिक्त तालाबो और नदियों में अनेक प्रकार की मछलियाँ पाई जाती है. पिरान्हा नामक माँसभक्षी मछली उल्लेखनीय है.

 

जंगलों में रहने वाली आदिम जातियाँ (Primitive tribes living in forests)

वनों की अधिकता के कारण यहाँ आदिम जातियाँ निवास करती है. यहाँ के निवासियों के जीवनयापन के साधन आखेट, मत्स्यस्योपादन तथा भोजन संग्रह है. यहाँ पर अमेरिकन इंडियन लोग स्थानातरी कृषि द्वारा कसावा, चावल, मक्का, फलियाँ और आलू उगाते है. वाणिज्यिक फसलों में कोको, कहवा, ब्राजील गिरियाँ और काली मिर्च आदि प्रमुख फसल है.

कोलबंस के द्वारा १४४२ में नई दुनिया की खोज के बाद यहाँ के लोगो के जीवन में बहुत अधिक परिवर्तन हुआ है. साथ की अमेजन बेसिन के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. दक्षिणी अमेरिका से आये यूरोपीयन लोगों ने यहाँ के प्राकृतिक संसाधनो का शोषण बहुत निर्दयता से किया है पहले वनों से प्राकृतिक रबड़ का एकत्रण किया जाता था जो अब पूर्ण रूप से अनुपयोगी हो गया है. अब उसके स्थान पर बागाती खेती आरम्भ हो गई है.

 

गंगा ब्रह्मपुत्र मैदान और नदियों की स्थिति (Ganges and Brahmaputra rivers ground conditions)

गंगा ब्रह्मपुत्र बेसिन का मैदान हिमालय के दक्षिणी में २५०० किमी लम्बी तथा १५० से ४०० किमी चौड़ी पेटी में स्थित है. यह सघन आबादी वाला प्रदेश है. इसका डेल्टा बांग्लादेश में स्थित है.

 

नदी के धरातल (River Surface Information)

गंगा ब्रह्मपुत्र का मैदान गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाई काँच मिट्टी से बना है. ब्रह्मपुत्र नदी के मैदान की अपेक्षा गंगा का मैदान अधिक विस्तृत है. इसका विस्तार उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल तक है. गंगा और उसकी सहायक नदियों ने यहाँ अनेक अपरदनात्मक तथा निक्षेपात्मक स्थलाकृतियों की रचना की है इस मैदान का ढाल मंद है और पूर्व की और जाता है. यहाँ सेकड़ों मीटर मीटे कॉप के निक्षेप है. इसलिए यह मैदान संसार का सबसे अधिक उपजाऊ मैदान है.

ब्रह्मपुत्र का मैदान भारत में केवल असम राज्य में सीमित है. यह मैदान ब्रह्मपुत्र और सहायक नदियों द्वारा लाई  गई कॉप मिट्टी से निर्मित है. ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से निकलकर पूर्व की और बहती हुई अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है. तत्पश्चात असम की तंग घाटी में बहते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है. वहाँ गंगा के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है. यहाँ ये दोनों एक डेल्टा का निर्माण करती है. इसको सुन्दर वन कहते है. यह विश्व का विशालतम डेल्टा है.

 

गंगा (Ganges)

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ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ बहुत आती है और ये बाढ़ बहुत ही भयंकर होती है. इनसे जन धन की बहुत हानि होती है. इसलिए ब्रह्मपुत्र को असम का शोक कहा जाता है.

 

जलवायु (Climate)

यहाँ की जलवायु सामान्य है. ग्रीष्म ऋतु में गर्मी तथा शीत ऋतु में सर्दी पड़ती है. दक्षिणी पश्चिमी भाग से आने वाली मानसूनों के द्वारा यहाँ वर्षा खूब होती है. भूमध्य सागर की और से आने वाले चक्रवातीय तूफानों से यहाँ शीत ऋतु में वर्षा होती है. वर्षा की मात्रा क्रमशः पश्चिम की और घटती जाती है.

 

वनस्पति (Plant)

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प्राचीनकाल में गंगा का बेसिन घने उष्ण कटिबंधीय वनों से युक्त था जिसे कृषि  योग्य भूमि बनाने के लिए साफ़ करना पड़ा. डेल्टाई प्रदेश में ज्वारीय वन मिलते है. ब्रह्मपुत्र वेसिनो में उष्ण कटिबंधीय सदापर्णी और पर्णपाती वन मिलते है. असम में उष्णकटिबंधीय सदापर्णी तथा पर्णपाती वन मिलते है.

 

वन्य जीवन (The Wildlife)

गंगा ब्रह्मपुत्र के बेसिन में वन्य जीवन लगभग समाप्त हो गया है. यहाँ एक सींग वाला गैंडा, बाघ, चीता, लकड़बघ्घा, हाथी, बन्दर, साँप के अतिरिक्त अनेक प्रकार के पक्षी मिलते है. मगरमच्छ, हिरन, घडियाल तथा मछलियाँ भी यहाँ पर बहुतायात में पाई जाती है. सुन्दर वन रॉयल बंगाल बाघों का प्राकृतिक आवास है.

जनसंख्या तथा आर्थिक स्थिति (Population and economic situation)

ब्रह्मपुत्र के मैदान की अपेक्षा गंगा का मैदान अधिक जनसंख्या वाला स्थान है. गंगा के मैदानी भाग के निवासी, आर्यों एवं तुर्कों, अफगान, फ़ारसी, अरब मंगोल आदि के मिश्रण से उत्पन्न प्रजाति के है. यहाँ के निवासी कृषि द्वारा जीवनयापन करते है. यहाँ पर फल, दालें तथा सब्जियाँ भी उगाई जाती है. यहाँ की फसलें चाय, गन्ना, तिलहन, जूट आदि है. जूट की पैदावार मुख्य रूप से बंगाल में, असम में, असम में चाय तथा उत्तर प्रदेश में गन्ना की पैदावार होती है. उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त वर्षा तथा सिचाई के आधुनिक साधनों के कारण यहाँ कृषि उन्नत रही है. दुधारू पशु गाय, भैसों के अतिरक्त, भेड़, बकरियाँ, सूअर और मुर्गी भी यहाँ पाले जाते है.

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यहाँ सूती, ऊनी, रेशमी, जूट वस्त्र, चीनी, कागज आदि कृषि पर आधारित उद्योग उन्नत अवस्था में है. बर्तन बनाना तथा धातु शिल्प आदि काफी विकसित है. उत्तर प्रदेश में खनिज पदार्थों का अभाव है. असम के कुछ कोयला तथा पेट्रोलियम मिलता है इसलिए यहाँ तेलशोधन उद्योग विकसित हो गया है.

गंगा के बेसिन में आबादी अधिक होने के कारण रेलों और सड़कों का जल बिछा है. गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ परिवहन के उत्तम साधन है.

गंगा के मैदान में अनेक नगर तथा कस्बे बसें है. गंगा के तट पर कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना आदि नगर सबसे है. दिल्ली (भारत की राजधानी) यमुना नदी के किनारे स्थिर है . पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता हुन्गली नदी के तट पर स्थित है. यह बहुत बड़ी नगर तथा नदी पत्तन है.

इसी प्रकार डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है. ढाका, बांग्लादेश की राजधानी है.

 

मरुस्थल (Desert Information)

मरुस्थल  के मुख्य लक्षण अत्यधिक शुष्कता तथा विरल वनस्पतिक है. अक्षांशीय स्थिति के अनुसार मरुस्थल गर्म अथवा ठंडे होते है. मरुस्थल का पर्यावरण अत्यंत कठोर होता है. यहाँ जीवन यापन के साधनों की कमी होती है. इसलिए मानव जीवन बाधित रहता है. आर्थिक विकास भी बहुत सीमित होता है. गर्म और ठंडे मरुस्थलो का जीवन भिन्न होता है.

 

सहारा मरुस्थल (The Sahara Desert)

स्थिति तथा धरातल – यह विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल है. यह पूर्व में लाल सागर से लेकर पश्चिम में अटलांटिक महासागर तक अफ्रीका के उत्तरी भाग में फैला है. इस मरुस्थल में रेत के टीले (बालू का स्तूप) है जो लगातार पलायन करते रहते है. यहाँ पर कहीं कहीं बजरी से ढके मैदान भी है जिन्हें रेंग या सेरिर कहा जाता है.

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रेत के निक्षेपों का विस्तार अर्ग कहलाता है. मरुस्थल में वायु की अपवाहन क्रिया द्वारा बने समुद्र जल से नीचे विशाल गर्त पाए जाते है. जैसे कटारा का गर्त. ये समुद्र तल से १३३ मीटर गहरा है. कहीं कहीं जल के निकट उपजाऊ क्षेत्र भी मिल जाते है, ये मरुघान कहलाते है. मिश्र में सिवा गर्त प्रसिद्ध मरुघान है.

विश्व प्रसिद्ध नदी मरुस्थल के पूर्वी भाग में दक्षिण से उत्तर को बहती है. यह भूमध्य सागर में गिरती है. इस प्रदेश के दक्षिण पश्चिमी भाग में नाइजर नदी बहती है. यहाँ पर अनेक वादी भी है. यह वास्तव में चौरम तली वाली जलधराये होती है. यह बहुधा शुष्क होती है लेकिन वर्षाकाल में मरुस्थल में बाढ़े पैदा करती है.

 

जलवायु (Climate)

यहाँ की जलवायु शुष्क तथा उष्ण होती है. यहाँ दैनिक तथा वार्षिक तापांतर बहुत अधिक होते है. पश्चिमी तटीय भाग में ठंडी कनारी की धारा के कारण जलवायु सम रहती है. उत्तरी सारा में गर्म और रेतीली हवाएं चलती है. जिन्हें लीबिया में गिबली तथा मिस्त्र मी ख़मसिन कहा जाता है. दक्षिणी सहारा में शीतकाल में हरमहन नामक शुष्क हवाएं उत्तर पूर्वी दिशा में चलती है.

 

प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य जीवन (Natural Plant And wildlife)

यहाँ पर घासे, झाड़ियों तथा कटीले पौधों के अतिरिक्त कोई भी वनस्पति प्राप्त नहीं होती है. वादियों में कहीं कहीं ताड़ और एकेशिया के वृक्ष उग आते है. यहाँ खरगोश, लोमड़ी, हिरन, गीदड़, चूहे आदि जंतु तथा साँप, मकड़ी और छिपकली आदि वन्य जंतु मिलते है. ऊट पालतू पशु है इसे मरुस्थल का जहाज कहाँ जाता है.

पर्यावरण के शुष्क होने के कारण बंजारा पशुचारण एक विशेष प्रकार का समायोजन है. यहाँ फुलानी जनसमुदायों का मुख्य धंधा ऊट तथा भेड़ बकरियां पालना है. अरब से आकर बसने वाले बिहू लोग तथा तुआरेग ऊट तथा भेड़ बकरियां पालते है. बंजारे धुमक्कड जीवन बिताते है. उनका मुख्य धंधा पशुपालन होता है. वे अपने पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लेकर घूमते रहते है.

वे जहाँ जाते है अपने तंबू डाल लेते है. उनके पास बर्तनों के अतिरिक्त और कोई सामान नहीं होता है. वे अपने डेरे, वस्त्र, कम्बल और कालीन आदि स्वयं बनाते है. वे ऊन, खाल, चमड़ा आदि जो उन्हें अपने पशुओं से ही मिल जाता है, को बेचकर मरुघान के किसानो से छुहारे और अन्य खाद्यान खरीदते है.

Plant Wildlife Economic Life Information

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मरुस्थल के निवासी स्थाई खेती करते है. नील नदी की घाटी में रहने वाले किसानों को फैलाहिन कहते है. वे सिचाई पद्धति से खेती करते है. यहाँ के किसान सघन खेती करते है. इसके अंतर्गत एक खेत में एक वर्ष में २ या ३ फसल उग सकते है. आस्वान बाँध के निर्माण के बाद कृषि के लिए वर्षपर्यत सिचाईं की सुविधा प्राप्त हो गई है.

सहारा मरुस्थल का व्यापार और पर्यटन उद्योग भी उन्नत अवस्था में है. काहिरा के निकट गीजा के पिरामिड तथा स्फिक्स विश्व के करोंड़ों पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करते है. यह खनिज सम्पन्न देश है. नाइजर में युरेनियम अल्जीरिया में तथा मारीटेनिया में लौह धातु, अल्जीरिया, मिस्त्र एवं लीबिया में पेट्रोलियम प्राप्त होता है. इस प्रदेश में तेलशोधन तथा खनन प्रमुख आर्थिक व्यवसाय है.

यहाँ परिवहन का मुख्य साधन ऊट है लेकिन अब सड़क मार्गों का विकास हो जाने से मोटरगाड़ियाँ और ट्रक भी उपलब्ध हो जाते है. नील नदी आंतरिक परिवहन का उत्तम साधन है. स्वेज नहर के बन जाने से सहारा मरुस्थल विश्व के शेष भागों से भी जुड़ गया है.

 

लद्दाख शीतल मरुस्थल (Cold desert Ladakh)

शीतल और गर्म मरुस्थलो में अनेक समानताये और अनेक भिन्नताए पाई जाती है. न्यून वर्षा, विरल वनस्पति, उजाड़, धरातल और गैर आबाद क्षेत्र तो शीतल और उष्ण दौनों ही मरुस्थलों में मुख्य रूप से पाए जाते है. उष्ण मरुस्थल को शुष्कता (अकाल) से उत्पन्न मरुस्थल तथा ठंडे मरुस्थल को शीत से उत्पन्न मरुस्थल कहा जा सकता है. शीत मरुस्थल में मरुघान नहीं होते है. लद्दाख ऐसा ही एक मरुस्थल है.

 

स्थिति तथा धरातल (Position and surface)

लद्दाक जम्मू कश्मीर (भारत) के पूर्वी भाग में स्थित है. यह एक ऐसा चट्टानी मरुस्थल है जो उच्च मैदान, गहरी घाटियों द्वारा विच्छेदित है. इसका उच्च मैदान पूर्व में है जो पश्चिम की और जाते जाते नीचा होता गया है. लद्दाक श्रेणी इस प्रदेश में विस्तृत है. इसके दक्षिण पूर्व मेरु पशु स्थित है जो समुद्र तल से लगभग ४१०० मीटर ऊपर है. इसका पानी खारा है. सिंधु नदी यहाँ प्रमुख नदी है. सिंधु नदी की सहायक नदियाँ जास्कर तथा श्योक है.

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जलवायु (Climate)

लद्दाक की जलवायु शुष्क व ठंडी है. क्योकि यह समुद्रतल से और दूर है. यहाँ वार्षिक वर्षा केवल ८४ मिलीलीटर होती है. वर्षा हिमपात के रूप में होती है. लोह यहाँ का सबसे बड़ा ठंडा स्थान है. जनवरी में यहाँ का तापमान २८ डिग्री सेल्सियस तक पहुच जाता है.

 

वनस्पति और वन्य जीवन (Plants and Wildlife)

लद्दाक की जलवायु कठोर है इसलिए यहाँ पर विरल वनस्पति पाई जाती है. नदी घाटियों में बोर्नेविलों और पोपलर के वृक्ष पाये जाते है. जुनीपर के वृक्ष पर्वतीय ढालों पर पाए जाते है. पर्वतों के ढालों पर केवल घासें और झाड़ियाँ ही उग पाती है.

यहाँ जंगली बकरिया, खरगोश, याक, बारहसिंघा, खच्चर जैसा कियांग जंतु मुख्य रूप से पाए जाते है. लद्दाख में ठंड के कारण छिपकली के अतिरिक्त कोई सरीसर्प नहीं पाया जाता है. यहाँ विशिष्ट पक्षी कबूतर, चिकारा, हेरोन, केरम क्रो पेनटेल है.

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जनसख्या और आर्थिक जीवन (Population and Economic Life)

लद्दाख का प्राकृतिक पर्यावरण मानव निवास के लिए उपयुक्त न होने के कारण यह विरल आबाद है. यहाँ आबादी का ओसत घनत्व २ व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है. पश्चिम लद्दाख में मुख्यत: मुसलमान तथा पूर्वी लद्दाख में तिब्बती बौद्ध है. इसी से जुडी Plant Wildlife Economic Life Information.

लद्दाख के निवासी कृषक या चरवाहे है. कृषक निचली घाटी में तथा चरवाहे ऊपरी घाटियों में रहते है. यहाँ के किसान गेंहू, ज्वार बाजरा, जो, बक गेहूं, मटर, फलियाँ, मूली शलजम आदि उगाते है. साथ ही ऊनी कपड़ा भी बुनते है. यहाँ के चरवाहे भेड़ बकरियाँ, याक और खच्चर पालते है. भेड़, बकरियाँ, दूध, माँस और ऊँन के लिए पाली जाती है. याक और खच्चर भारवाहन के लिए पाले जाते है.

कठोर पर्यावरण होने के कारण यहाँ केवल बुनाई-कटाई, कालीन बनाना, कढाई आदि शिल्प कलाओं का ही विकास हुआ है. तीन दशकों से लद्दाख में भरी परिवर्तन हुआ है. लद्दाख पर्यटन का प्रमुख उद्योग बन गया है.

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दुर्गम होने के अतिरिक्त लेह विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया है. यहाँ पर ४०० से अधिक होटल बन गये है. इनके अतिरिक्त गोपां और मठ भी पर्यटकों के विशेष आकर्षण के केंद्र है.

श्रीनगर लेह मार्ग खुल जाने से यहाँ पर्यटन का बहुत विकास हुआ है. लेह से श्रीनगर, जम्मू तथा दिल्ली के लिए विमान सेवाएँ भी उपलब्ध है. मलाली लेह मार्ग विश्व का सर्वोच सड़क मार्ग है.

इसके अतिरिक्त लद्दाख अनेक साहसिक खेल-कूद, ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, राफ्टिंग, केनीइग आदि के लिए भी पर्यटकों का स्वर्ग है. इससे स्थानीय लोगों की जीवन शैली में भी बहुत परिवर्तन हुए है.

 

महत्वूर्ण तथ्य (Significant Facts About Plant Wildlife Economic Life Information)

  • प्रेयरी उत्तरी अमेरिका में स्थित शीतोष्ण कटिबंधीय घास का प्रदेश है.
  • १८८५ में रेलमार्ग बनने के बाद प्रेयरी में रेलमार्ग के सहारे बस्तियाँ बनने लगी.
  • प्रेयरी की प्राकृतिक स्थलाकृतियाँ फार्मिंग और रेचिंग से बदल गई. अनेक वन्य जीवों की जातियाँ नष्ट हो गई. मिट्टी के अपरदन की समस्या भी गंभीर हो गई.
  • वेल्ड दक्षिणी अफ्रीका का उपोष्ण कटिबंधीय घास का मैदान है. यहाँ का मुख्य व्यवसाय पशुपालन, खेती तथा खनन है.
  • अमेजन बेसिन दक्षिण अमेरिका के ब्राजील में स्थित है. यहाँ अमेजन और उसकी सहायक नदियाँ (जिनकी संख्या लगभग ११००) बहती है.
  • अमेजन बेसिन के लोगो खेती करते है. यहाँ बागाती खेती, वनोद्योग तथा खनन भी उन्नत अवस्था में है.
  • गंगा, ब्रह्मपुत्र का बेसिन विश्व का सबसे घनी आबादी वाला है.
  • गंगा और ब्रह्मपुत्र मिलकर सुन्दरमन नामक विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा बनाती है.
  • यहाँ के लोगों की मुख्य क्रिया कृषि है. खनिज का प्राय: आभाव है. असम में पेट्रोलियम और कोयला प्राप्त होता है.
  • नदियों के किनारे बड़े-बड़े नगर है.
  • गंगा के मैदान में सड़के तथा रेलमार्ग पर्याप्त मात्रा में है. साथ ही जल परिवहन के साधन भी है.
  • सहारा विश्व का विशालतम मरुस्थल है यह एक गर्म मरुस्थल है इसके विपरीत लद्दाख एक ठंडा मरुस्थल है. यह भारत के जम्मू कश्मीर में है.
  • लद्दाख और सहारा दोनों ही मरुस्थलों के लोगो का मुख्य व्यवसाय कृषि व पशुचारण है.
  • लद्दाख के लोग बोद्ध धर्म को मानते है. अब इनकी जीवन शैली में बदलाव आ गया है.
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