Self Challenge स्वयं को चुनौती दीजिये


अपने आपको मजबूत बनाने के लिए खुद को चुनौती  (Self  Challenge) दीजिये. आप चाहे किसी भी फिल्ड में काम करते हो या आप जो भी करते है उस काम को करने के प्रति आप जो भी लक्ष्य तय करते है उसके लिए आपको motivational self challenge की बहुत आवश्यकता है

Self Challenge स्वयं को चुनौती दीजिये

Self Challenge स्वयं को चुनौती दीजिये

मनुष्य के मन में दो शक्तियाँ निवास करती है. भय और विश्वास ये दोनों शक्तियाँ मनुष्य की विचारधारा पर नियंत्रण पाने के लिए निरंतर एक दुसरे से संघर्ष करती रहती है. किन्तु इन दोनों शक्तियों में विश्वास की जड़े बहुत गहराई लिए हुए होती है. और भय की जड़े बहुत उथली होती है.




 

अत: व्यक्तित्व निर्माण के क्रम में ध्यान रखिये कि आपकी विचारशक्ति पर भय का नियंत्रण न हो इसकी क्षमता आप में है. सिर्फ मन को इस प्रकार ढालने की आवश्यकता है. आप अपने मन मस्तिष्क में जो भी निर्णय लेंगे, उसे पूरा करने की क्षमता आप में निहित है. किन्तु इसके लिए दृढ़ विश्वास और निरंतर प्रयत्नों में लगे रहने की आवश्यकता है. दृढ़ विश्वास के साथ प्रयत्नों में लगे रहिये.

 

सफलता की सुनहरी मंजिल स्वत: आपके पास आती दिखाई देने लगेगी. ऐसा नहीं है कि ज्ञान का भंडार विश्व के महान व्यक्तियों के पास ही है. आप में भी अजस्त्र ज्ञान के स्त्रोत प्रवाहित है. सिर्फ उनका दोहन करना सीखिए.

 

आप देखिये की विश्व के ज्ञानकोश में ऐसी कोई बात नहीं, जो आपकी जानकारी से परे हो. आप भी ज्ञान का भंडार बन सकते है. अगर कोई ज्ञान का दंभ आपके आगे प्रदशित करता है, तो इसका यह अर्थ कदापि नहीं की आप अज्ञानी है अथवा वह बहुत विद्वान है.

 

विश्वास में महान शक्ति निहित है. चाहे वह विश्वास किसी अदृश्य शक्ति के प्रति हो या अपने प्रति. विश्वास शरीर की उर्जाओ को मुक्त कर देता है. जिससे आपको निर्णय करने की शक्ति मिलती है. एक विद्वान ने कहा है. “आत्महीनता विचारों का तरना है.”

 

उसके माधुर्य को आप अस्वीकार कर दीजिये. दर्पण के सामने खड़े होकर अपने स्वाभिमान को जगाइए स्वयं को चुनोती दीजिये. स्वयं विचार कीजिये कि आप में क्या कमी है? आप क्या नहीं कर सकते है? आपके पास एक मस्तिष्क है. उसमें उन्नत शक्ति है.

 

आपके शरीर में अनंत उर्जा है. नियमित रूप से आप इस पर विचार करने की क्रिया को दोहराते रहिये. आप देखेंगे कि आप में विश्वास की वृद्धि हो रही है. असफलता या सफलता एक मानसिक स्थिति है. इसे स्वीकार करना या नकारना पूरी तरह आपके वश में है.

 

किन्तु यह तभी संभव है, जब आप अपने में विश्वास पैदा करें. मन में भीरुता मत लाइये. यदि आपके मन में किसी बात के प्रति संशय है, तो उसे संशय मत बना रहे दीजिये. अपनी शंका का समाधान कीजिये. ऐसा कभी मत सोचिये कि यदि आप ऐसा करेंगे तो लोग आपको अल्प्बुध्धि समझेंगे.

 

ऐसा करने से आपके ज्ञान में वृद्धि होगी और ज्ञान में वृद्धि होने से आपके विश्वास में वृद्धि होगी. किसी कार्य में तन्मयता के साथ लग जाना ही सफलता की पहली शर्त है. यदि आपने अपने उदेश्य की पूर्ति के लिए कार्य में पूरी  निष्ठा व ईमानदारी से लगने की शर्त पूरी कर ली. तो निश्चित जानिए की आपकी सफलता के मार्ग में व्यवधान उपस्थित न होगा.

 

आप में क्या कमियाँ है. इसका ज्ञान आपको होना चाहिए. इसका ज्ञान हमें तभी होगा. जब हम स्वयं का परिक्षण नियमित करेंगे.

 

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