Jhaad Unche Or Niche Chup Khade Hai Aankh Miche

Jhaad Unche Or Niche Chup Khade Hai Aankh Miche झाड़ ऊँचे और नीचे चुप खड़े है आँख मीचे घास चुप है कास चुप है, मूक शाल पलाश चुप है. बन सके तो धसों इनमे सतपुड़ा के घने जंगल, ऊँघते अनमने जंगल. सन्दर्भ व प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता सतपुड़ा के घने जंगल से अवतरित...