प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन

प्रकृति के क्रिया मैथलीशरण गुप्त द्वारा प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन है बिखरे देती वसुंधरा मोती सबके सोने पर, रवि बटोर लेता है उनको सदा सबेरा होने पर. और विरामदायनी अपनी संध्या को दे जाता है, शून्य श्याम तनु जिससे उसका नया रूप झलकता है. सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियो में कवि मैथलीशरण गुप्त ने प्रकृति के...