मकड़ियों के जाल मुहँ पर Satpuda ke jangal sndarbh prsang

मकड़ियों के जाल मुहँ पर और सर के बाल मुंह पर (मकड़ियों के जाल मुहँ पर) मच्छरों के दंश वाले दाग काले लाल मुँह पर वात झंझा वहन करते चलों इंतना सहन करते कष्ट से ये सने जंगल ऊँघते अनमने जंगल   सन्दर्भ और प्रसंग – कवि ने यहाँ पर इस जंगल की कठिन चढ़ाई का वर्णन किया...