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प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन 0

प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन

प्रकृति के क्रिया मैथलीशरण गुप्त द्वारा प्रकृति के क्रिया कलापों का वर्णन है बिखरे देती वसुंधरा मोती सबके सोने पर, रवि बटोर लेता है उनको सदा सबेरा होने पर. और विरामदायनी अपनी संध्या को दे जाता है, शून्य श्याम तनु जिससे उसका नया रूप झलकता है. सन्दर्भ प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियो में कवि मैथलीशरण गुप्त ने प्रकृति के...

पंचवटी का सारांश 2

पंचवटी का सारांश Summary of Panchavati

पंचवटी का सारांश पंचवटी राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त का प्रसिद्ध खंडकाव्य है. भगवान श्री राम ने सीता और लक्ष्मण सहित चौदह वर्ष की वनवास अवधि में तेरह वर्ष पंचवटी नामक वन में बिताये थे. पंचवटी महाराष्ट्र में नासिक के निकट गोदावरी नदी के तट पर स्थित है. पंचवटी के प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन इस खंडकाव्य में किया गया है....