Satpuda Ke Ghane Jangal Neend Me Dube Hue Se Unghte Anmane Jangal

Satpuda Ke Ghane Jangal Neend Me Dube Hue Se Unghte Anmane Jangal सतपुड़ा के घने जंगल नींद में डूबे हुए से ऊँघते अनमने जंगल   सन्दर्भ व प्रसंग – प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ श्री भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता सतपुड़ा के घने जंगल से अवतरित है. यहाँ पर कवि सतपुड़ा के जंगलों का वर्णन कर रहा है. व्याख्या –...