Tagged: सतपुड़ा के घने जंगल

मकड़ियों के जाल मुहँ पर 0

मकड़ियों के जाल मुहँ पर Satpuda ke jangal sndarbh prsang

मकड़ियों के जाल मुहँ पर और सर के बाल मुंह पर (मकड़ियों के जाल मुहँ पर) मच्छरों के दंश वाले दाग काले लाल मुँह पर वात झंझा वहन करते चलों इंतना सहन करते कष्ट से ये सने जंगल ऊँघते अनमने जंगल   सन्दर्भ और प्रसंग – कवि ने यहाँ पर इस जंगल की कठिन चढ़ाई का वर्णन किया...

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अटपटी उलझी लताये सन्दर्भ प्रसंग

अटपटी उलझी लताये सन्दर्भ डालियों को खींच खाए पैर को पकडे अचानक प्राण को कास ले कपाये बला की काली लताये लताओं के बने जंगल सतपुड़ा के घने जंगल ऊँघते अनमने जंगल   सन्दर्भ और प्रसंग – कवि यहाँ पर सतपुड़ा के जंगलों का वर्णन कर रहा है. व्याख्या – कवि कहता है कि सतपुड़ा के जंगलों में...

Satpuda Ke Ghane Jangal Bhawani Prsaad Mishr 0

Satpuda Ke Ghane Jangal Bhawani Prsaad Mishr

Satpuda Ke Ghane Jangal – सतपुड़ा के घने जंगल भवानीप्रसाद मिश्र जीवन परिचय Satpuda Ke Ghane Jangal  श्री भवानीप्रसाद मिश्र  का जन्म २३ मार्च १९१३ को होशंगाबाद के समीप टिकरिया ग्राम में हुआ था. नरसिंह पुर तथा होशंगाबाद में उन्होंने हाई स्कूल तक अध्ययन किया. जबलपुर के रोबर्टसन कालेज से उन्होंने बी ए की परीक्षा उतीर्ण की. सन...