Satpuda Ke Ghane Jangal Me Sade Gale Patte

Satpuda Ke Ghane Jangal Me Sade Gale Patte सड़े पत्ते गले पत्ते हरे पत्ते जले पत्ते वन्य पथ को ढक रहे से पंक दल में पले पत्ते चलो इन पर चल सको तो दलो इनको दल सको तो ये घिनोने घने जंगल उघते अनमने जंगल. सन्दर्भ और प्रसंग – कवि ने सतपुड़ा के इन जंगलो में पाए जाने...